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कहानी : वैशाली ने बदल दी तकदीर

कहानी : वैशाली ने बदल दी तकदीर

लेखक : मनीष शुक्ल रात भर वो इधर से उधर करवट बदलती रही। आने वाली सुबह उसके संघर्ष से भरे जीवन का अंत कर सकती थी। उसके जीवन में खुशियाँ भर सकती थीं। एक ओर संघर्ष से घिरी अंधेरी ज़िंदगी दूसरी ओर रोशनी से भरा भविष्य, लेकिन फैसला लेना आसान नहीं था... बस एक फासले पर था उसका फैसला और उसकी दुनियाँ बदल सकती थी। दौलत- शौहरत, सुकून और ऐशो- आराम से भरपूर एग्रीकल्चर साइंटिस्ट की जॉब। दूसरी तरफ वैशाली के सिर पर थी माता- पिता के संघर्षों की पोटली। उनके खोये सम्मान को लौटाने का दायित्व... अपनी दो छोटी…
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लघु कथा : मेरे साहिर…

लघु कथा : मेरे साहिर…

पवन जैन सडक की तरफ खुलती बालकनी , डूबता सूरज , अदरक की चाय और कारवां पे चलते मेरे पसंदीदा गीत ..कहने को ये मेरे बेहद सुकून के पल होते हैं ..ऑफिस से घर लौटते लोग ,सभी को जल्द से जल्द घर पहुँचने की जल्दी ..जहाँ उनका कोई इन्तिज़ार कर रहा होता है . अक्सर सोचती हूँ कि बालकनी में बैठ कर चाय की हल्की हल्की चुस्कियों के साथ वक़्त गुज़ारना क्यों अच्छा लगता है , क्या मैं भी किसी का इन्तिज़ार कर रही हूँ ..लेकिन किसका ...?? क्या तुम्हारा ..? क्या सच में तुम्हारा इन्तिज़ार करती हूँ कि तुम…
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कहानी : मंदी से तरक्की की राह

लेखक : मनीष शुक्ल मंदी की तलवार अचानक ऐसे चल जाएगी ये तो कभी सोचा भी नहीं था... रौनिक उपाध्याय सुबह तैयार होकर ऑफिस गया और शाम को टर्मिनेशन लेटर लेकर घर लौट आया। रौनिक घर आकर सीधे बेड रूम में जाकर पसर गया। न सुनिधि से कुछ बोला, न ही यशी को गोद में उठाया। बस खुद में सिमट जाना चाहता था। जहां से उसको कोई आवाज देकर वापस न बुला सके। यशी और सुनिधि की आवाजें भी रौनिक के कानों तक जाकर रुक जा रही थी। दोनों से कुछ कहना चाहता था। अपना दर्द बांटना चाहता था लेकिन…
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कहानी : जेहादी नहीं डाक्टर बनेगा बेटा…

कहानी : जेहादी नहीं डाक्टर बनेगा बेटा…

लेखक : मनीष शुक्ल “साब! आप लोग घूमो, फिरो, यहाँ के नजारे लो, बरफ देखो, शिकारे पर जाओ कहवा पियो और हसीन यादें लेकर हिंदुस्तान लौट जाओ।“ यह सुनते ही शर्मा जी चौंक पड़े। वो टूरिस्ट गाइड था और कई दिनों से वो मिस्टर शर्मा को कश्मीर घूमा रहा था, अब उनके साथ घुल मिल गया था लेकिन कश्मीर को देश का हिस्सा मानने में संकोच कर रहा था। मिस्टर शर्मा ने जब उसके मुंह से सुना कि नजारे लेकर हिंदुस्तान लौट जाओ तो वो चौंक गए। उन्होने उससे सवाल किया कि क्या कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है तो…
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लघु कहानी : जोशी जी के दर्द पर मरहम

लघु कहानी : जोशी जी के दर्द पर मरहम

लेखक : मनीष शुक्ल अचानक आँखों से आंसुओं की धारा बहने लगती है। इतनी भी हिम्मत नहीं होती है कि अपना हाथ बढ़ाकर उन आंसुओं को पोंछ सकें। बस, असहनीय दर्द और अकेलेपन का अहसास यही जेहन में घूमता रहता है। शब्द खुद ब खुद बढ़बढ़ाने लगते हैं... शायद अब मेरा समय आ गया है। तभी ये लोग मुझसे दूर भागते हैं। कोई भी मेरे पास नहीं बैठता है। कोई भी मेरा ध्यान नहीं रखता है... जोशी जी बिस्तर पर लेटे- लेटे अपने वजूद को लेकर ख्याल बुन रहे थे। उनको लकवा मारे अब तीन साल हो गया था। इलाज…
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कहानी : “देहदान”

कहानी : “देहदान”

डॉ. रंजना जायसवाल बचपन  में  जब खुद को ढूंढना होता तो आस्था बारिश में भीग लेती। पानी की बूंदे सिर्फ तन को ही नहीं मन को भी अंदर तक धुल देती और वो अपने अंदर एक नई आस्था को पाती। आस्था...आस्था यही नाम तो रखा था बाबा ने उसका...क्योंकि उन्हें विश्वास था कि कुछ भी हो जाये आस्था कभी कमजोर नहीं पड़ सकती, कभी टूट नहीं सकती पर न जाने क्यों आस्था इन बीते दिनों में टूट रही थी और अंदर ही अंदर बिखर रही थी। शादी के बाद उसने भीगना भी छोड़ दिया था, पानी की बूंदें उसे हर…
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