नेपाल भारत साहित्य महोत्सव से मजबूत हो रहे संबंध
काठमांडौं : वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के साथ क्रांतिधरा साहित्य अकादमी मेरठ, भारत द्वारा हिन्दी अकादमी नेपाल के सहयोग से काठमाडौं, नेपाल में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय नेपाल भारत साहित्य महोत्सव का शुभारंभ हुआ। नेपाल भारत साहित्य महोत्सव का उद्घाटन नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री सम्माननीय झलनाथ खनाल द्वारा किया गया।

नेपाल भारत साहित्य महोत्सव के आयोजक डा विजय पंडित ने बताया कि काठमाडौं नेपाल के होटल बद्रीनाथ के भव्य सभागार में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय नेपाल भारत साहित्य महोत्सव में नेपाल से दो सौ साहित्यिक, सामाजिक , सांस्कृतिक और पत्रकारिता से जुड़ी विभूतियों के साथ समस्त भारत से सौ से अधिक शिक्षाविद, वरिष्ठ व नवोदित लेखक, कवि, पत्रकार, शोधार्थीयों, पर्यावरणविद् और समाजसेवीयों की सहभागिता रही ।
आयोजक डॉ विजय पंडित ने अपने उद्बोधन में कहा कि नेपाल भारत साहित्य महोत्सव आयोजन का उद्देश्य मुख्य उद्देश्य ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ नेपाल और भारत के बीच साहित्य, कला, संस्कृति, शोध, आध्यात्म माध्यम से दिलो को दिलो से जोड़ना, एक दूसरे के लेखन व शोध से रूबरू कराना, अनुवाद, प्रकाशन, विचारों के आदान प्रदान, परस्पर सहयोग व मैत्री की भावना, पठन – पाठन व साहित्य के दायरे का विस्तार और नवोदित व गुमनाम कलमकार बन्धुओं को वरिष्ठ साहित्यकारों के सानिध्य में एक अंतर्राष्ट्रीय मंच प्रदान करना हैं।
देवभूमि नेपाल में आयोजित तीन दिवसीय नेपाल भारत साहित्य महोत्सव के सप्तम् संस्करण का आयोजन होटल बद्रीनाथ सभागार में पुस्तक प्रदर्शनी, पुस्तक विमोचन, पुस्तक समीक्षा, साहित्यिक व सामाजिक परिचर्चाएं, साक्षात्कार, लघुकथा, शोधपत्र, ओपन माईक, बहुभाषी कवि सम्मेलन, चारू सम्मेलन, मुशायरा व सम्मान सत्र आयोजित किए गए।
इस साहित्यिक यात्रा में वसुद्धैव कुटुम्बकम् की भावना के साथ आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन के मुख्य अतिथि नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल जी रहे, विशिष्ट अतिथि के रूप में नेपाल भारत मैत्री संघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र मोहन झा, कार्यक्रम संरक्षक, समाजसेवी अमर किशोर सिंह और वरिष्ठ समाजसेवी सुशील जैन, जनार्दन अधिकारी धड़कन, डॉ देवी पंथी, भूटान से विशेष तौर पर आंमत्रित लेखक लक्ष्मी दास शर्मा, अच्युत घिमिरे उन्मुक्त, पत्रकार व लेखिका ममता मृदुल, वरिष्ठ शिक्षाविद् नीरज नैथानी, वरिष्ठ साहित्यकार अजीत सिंह राठौर व पर्यावरणविद् जल स्टार रमेश चंद्र गोयल व क्रांतिधरा साहित्य अकादमी की अध्यक्ष पूनम पंडित और आयोजक डॉ विजय पंडित मंचासीन रहे।

मुख्य अतिथि नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री श्री झलनाथ खनाल ने नेपाल व भारत के ऐतिहासिक सांस्कृतिक साहित्यिक व सामाजिक संबंधों पर विस्तृत प्रकाश डाला और आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि नेपाल भारत साहित्य महोत्सव के नियमित आयोजन से दोनों देशों के संबंध मजबूत हो रहे हैं।
आयोजक पूनम पंडित ने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है लेकिन साहित्य एक दीपक की तरह भी काम करता है जो समाज को सही राह दिखाता है।
उद्घाटन समारोह में अनेक पुस्तकों का विमोचन किया गया जिनमें मुख्य रूप से
1-अनुवादित अंतर्ध्वानि गीत संग्रह – डाॅ. सीमा वर्णिका, कानपुर
2-लफ़्ज़ दर लफ़्ज़ ग़ज़ल संग्रह- डाॅ. सीमा वर्णिका, कानपुर
3-आग पानी हूँ मैं काव्य संग्रह – कमलेश तन्हा
4- कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् (गीता-चतुष्पदी) प्रो. (डॉ.) सरोजिनी ‘तनहा’
5- बच्चे हैं सब फूलों जैसे (60 कविताओं का रंगीन सचित्र बालगीत संग्रह) डॉ. धर्मेन्द्र सिंह धरम, मैनपुरिया
6-निलंबित मौन के स्वर का नेपाली भाषा में अनुवाद का विमोचन डॉ मनीष शुक्ल
7-काठमांडू (लघुकथा संग्रह) – मोहसिना अख़्तर
8-जू जू बाल गीत संग्रह – श्री अजीत सिंह राठौर
9-शक्ति स्वरूपा:धरती माता-शंभु प्रसाद भट्ट ‘स्नेहिल’
10- डॉ ऊषा शा कोलकाता की पुस्तक तपस्विनी शबरी
11- दीपा पन्त ‘शीतल’ की पुस्तक: तुम पूजित मैं अर्पित
12- जल स्टार रमेश गोयल की जल चालीसा
13- मल्लिका सारडा की From the diaries of a Daughter.
14- डॉ सुशीला जांगड़ा की पुस्तक ‘प्रकाश बिंदु’
15- चरण सिंह स्वामी की पुस्तक ‘मेरठ का इतिहास’

दूसरे सत्र पर्यावरण व जल संरक्षण को समर्पित रहा जिसमें मुख्य वक्ता हरियाणा भारत के जल स्टार रमेश चंद्र गोयल रहे उनकी पुस्तक जल चालीसा का विमोचन किया, जल स्टार रमेश चंद्र गोयल ने सभी को जल संचय करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि जल संचय जीवन संचय के समान होता है हमें जल की प्रत्येक बूंद के संचयन करना चाहिए, ऐसे में जब भूजल स्तर गिरता जा रहा है तो लेखकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है उन्हें अपनी कलम के माध्यम से जल संचय के लिए जन जाग्रति अभियान चलाना चाहिए।
तृतीय सत्र में बहुभाषी कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, संचालन उदयपुर, राजस्थान से आंमत्रित दीपा पन्त ‘शीतल’ ने किया। असम से डॉ विष्णु भंडारी, डॉ हेमप्रभा सेकिया, शिव शंकर हाजरिका, मध्य प्रदेश नरसिंह पुर से विख्यात हास्य कवि डॉ शंकर सहर्ष, ज्योति तिवारी और डॉ महेश अनघड़, कानपुर से डॉ अजीत सिंह राठौर, डा सीमा वर्णिका, अन्नपूर्णा बाजपेयी, कमलेश शुक्ला कीर्ति, ज्योति तिवारी, दीप कुमार शुक्ल, श्री आलोक तिवारी, धर्मेन्द्र सिंह धर्म मैनपुरिया, मैनपुरी, डॉ सरोजिनी तनहा, चरण सिंह स्वामी, डाॅ. दया निर्दोषी गाजियाबाद, ऐनी दीवानी, गाजियाबाद, चरणसिंह स्वामी, मेरठ, कमलेश तनहा, मेरठ, घनश्याम दास, मेरठ, डॉ ऊषा शा, कोलकाता, डॉ मनीष शुक्ला, लखनऊ, श्रीदेवेन्द्र उनियाल, उत्तराखंड, रक्षा उनियाल, उत्तराखंड, उत्तराखंड, माधुरी नैथानी, उत्तराखंड, श्री शम्भू प्रसाद भट्ट स्नेहिल, उत्तराखंड, पूर्णी देवी भट्ट, उत्तराखंड, संजय नौडियाल, उत्तराखंड, अनीता नौडियाल, उत्तराखंड, श्रीगोपाल कृष्ण नौटियाल, उत्तराखंड, मंजू नौटियाल, उत्तराखंड, आरती रावत पुण्डीर, उत्तराखंड, कौशल्या नैथानी, उत्तराखंड, विमल बहुगुणा, उत्तराखंड, डा प्रमोद कुमार श्रोत्रिय, पिथौरागढ, डा कीर्तिवल्लभ शक्टा, डा प्रकाश चमोली, मीनाक्षी, चमोली, सुरेश कुमार सुलोदिया, हरियाणा, डॉ सुशीला जांगड़ा, हरियाणा, शुभांगी राज शर्मा, गाजियाबाद, आनंद श्रीवास्तव, पूनम श्रीवास्तव प्रयागराज, लखनऊ से कामिनी श्रीवास्तव, राजीव श्रीवास्तव, पटना से नूतन सिन्हा, शुभादित्य सिन्हा , श्वेता जी, कीर्ति सहित अन्य वरिष्ठ व नवोदित कवियों ने रचना पाठ किया।
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय नेपाल भारत साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन सभी सहभागियों ने पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन किए और तीन गाड़ीयों में सवार होकर विश्व धरोहर सूची में शामिल ऐतिहासिक स्थल पाठन दरबार और भक्तपुर दरबार स्क्वायर का अवलोकन / भ्रमण किया।
शाम को एक बार फिर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
तृतीय दिवस के प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।इंदौर की शीतल देवयानी ने सरस्वती वंदना की । ममता मृदुल व समूह ने नेपाली सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
भारत की ओर से विलुप्त होती जा रही आल्हा विधा को अंतरराष्ट्रीय आल्हा गायक संग्राम सिंह कन्नौज ने प्रस्तुत किया तो समूचा सभागार तालियों से गूंज उठा।
इसी क्रम में लघुकथा सत्र के प्रमुख अतिथि तुलसी हरि कोइराला रहे और सत्र सञ्चालन ममता मृदुल ने किया ।
लघुकथा पाठ करने वाले नेपाल से गोम विक्रम, रोशन पराजुली, बिक्रम भक्त जोशी, रमेन्द्र कोइराला, शुक्रराज कुँवर, रामचन्द्र महतो कुसवाहा, प्रार्थना खनाल, एन्जल निलु, सुनिता निरौला पौडेल, ध्रुवराज थापा पुरुष, निशिता जोशी, लक्ष्मी पोखरेल, पि.पी कोइराला, रामकुमार पण्डित, प्रमुख अतिथि तुलसीहरि कोइराला और भारत से लघुकथा लेखन में दो बडे नाम शामिल हुए डा प्रियंका श्रीवास्तव शुभ्र, पटना और संगीता गोविल, गाजियाबाद और लघुकथा पाठ किया ।
जनार्दन अधिकारी धड़कन के नेतृत्व में खोरिया साहित्य सृजना नेपाल की ओर से खोरिया साहित्य व सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए जो सभी के द्वारा सराहे गए।
भारत, नेपाल और भूटान से आमंत्रित कलमकारों ने चारू, गीत, ग़ज़ल प्रस्तुत किए और पुस्तकों का विमोचन किया गया, जिसका संचालन डा देवी पंथी ने किया ।
समापन समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षाविद् साहित्यकार व बर्दघाट प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति डॉ घनश्याम परिश्रमी द्वारा की गई। संचालन डॉ कंचना झा द्वारा किया गया। समापन समारोह में सभी साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक और पत्रकारिता जगत से जुड़े आंमत्रित विभूतियों को सम्मानित किया गया।
शिक्षा के साथ सामाजिक, साहित्यिक व सांस्कृतिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के ऊ उदयपुर राजस्थान से आंमत्रित देवयानी जोशी, बुलंदशहर उत्तर प्रदेश की जूही शर्मा, मेरठ भारत से अरमान कौशिक और नवलपरासी से लक्ष्मी शर्मा को ‘यूथ आइकॉन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय नेपाल भारत साहित्य महोत्सव में काठमांडू घोषणा पत्र जारी किया गया जिसमें नेपाल भारत साहित्य महोत्सव के आयोजक डॉ विजय पंडित ने अपने सहयोगियों डॉ शंकर सहर्ष, डॉ सीमा वर्णिका, दीपा पन्त ‘शीतल’, नीरज नैथानी, डॉ कंचना झा आदि के साथ जारी किया।
1) तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय नेपाल भारत साहित्य महोत्सव नेपाल के अन्य शहरों में भी प्रत्येक वर्ष आयोजित कर निरंतरता बनाए रखेंगे।
2) नेपाल व भारत के युवाओं को आयोजन से जोड़ने और उनकी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित की जाएगी।
3) नेपाली व हिन्दी पुस्तकों के प्रकाशन अनुवाद व शोध की योजना पर कार्य किया जाएगा।
4) धरातल पर आयोजनों के साथ ही आनलाईन कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे।
5) भारत की तरह ही नेपाल में भी साहित्यिक, सामाजिक विभूतियों के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण के वृहद स्तर पर जनजागृति के कार्यक्रम शुरू कर जमीनी स्तर पर प्रयास किये जायेंगे।
5) युवाओं व स्कूली बच्चों को पुरस्कृत किया जाएगा।
6) विलुप्त होती जा रही भाषाओं, लोकगीत व लोककलाओं के संरक्षण के कार्य के साथ उनसे जुड़े रंगकर्मीयों कलाकारों, लेखकों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
7) प्रत्येक वर्ष एक स्मारिका अवश्य प्रकाशित की जाएगी।
कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ घनश्याम परिश्रमी ने अपने उद्बोधन में नेपाल भारत के ऐतिहासिक सांस्कृतिक साहित्यिक राजनैतिक संबंधों के लिए इस आयोजन को महत्वपूर्ण बताया और निरंतरता बनाए रखने पर जोर दिया।
उद्घाटन समारोह में सरस्वती वंदना दीपा पन्त ‘शीतल’ द्वारा की गई। आयोजक डॉ विजय पंडित और पूनम पंडित, यशोदा शर्मा, एडमिन लक्ष्मी शर्मा ने सभी का रूद्राक्ष की माला पहनाकर और तिलक लगा कर स्वागत किया।
खोरिया साहित्य सृजना नेपाल के सदस्यों द्वारा जनार्दन अधिकारी धड़कन के नेतृत्व में शंख ध्वनि, मंत्रोच्चार करते हुए अतिथियों का स्वागत किया। उद्घाटन समारोह में भारत की ओर से दीपा पन्त ‘शीतल’ और देवयानी जोशी ने सांस्कृतिक कार्यक्रम सत्र में राजस्थानी नृत्य प्रस्तुत किया तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। समारोह का संचालन हिन्दी नेपाली भोजपुरी मैथिली भाषाओं पर मजबूत पकड़ रखने वाली पत्रकार, कवयित्री डॉ कंचना झा द्वारा किया गया।
आयोजक डॉ विजय पंडित ने अपने समापन उद्बोधन में नेपाल, भारत व भूटान से आमंत्रित सभी अतिथियों व सहभागीयों का आभार व्यक्त किया और कलम के माध्यम से समाज को जागृत करने का आह्वान किया, समापन समारोह में व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने के लिए दीपा पन्त और सीमा वर्णिका को विशेष रूप से सम्मानित किया गया ।

