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विरासत- बुद्धिमत्ता का संगम: एआई तकनीकी से लैस कारीगर  

पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत  2,500 से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण

नई दिल्ली : समावेशी डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक अग्रणी कदम उठाते हुए, भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 2,500 से अधिक लाभार्थियों – जिनमें पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार शामिल हैं – को अपनी आजीविका और व्यावसायिक संभावनाओं को बेहतर बनाने हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपकरणों का उपयोग करने के संबंध में सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया है।

यह पहल “सामाजिक कल्याण हेतु एआई” की परिकल्पना के अनुरूप है। माननीय प्रधानमंत्री ने इंडियाएआई इम्पैक्ट समिट के दौरान इस परिकल्पना पर जोर दिया था और यह दिल्ली घोषणापत्र में भी परिलक्षित होती है। यह भारत सरकार के मंत्रालयों द्वारा किया गया अपनी तरह का पहला प्रयास है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर के कारीगरों को तेजी से विकसित हो रहे एआई इकोसिस्टम में एकीकृत करना है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम व्यावहारिक एवं प्रायोगिक सत्रों के जरिए आयोजित किया गया। इसे सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया, ताकि विभिन्न व्यवसायों के कारीगरों के लिए इसकी सुलभता एवं प्रासंगिकता सुनिश्चित हो सके। प्रतिभागियों को चैटजीपीटी, इंडस और गूगल जेमिनी जैसे प्रमुख एआई प्लेटफॉर्म से परिचित कराया गया, ताकि वे वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठा सकें।

प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएं

इस कार्यक्रम का उद्देश्य कारीगरों को व्यावहारिक एआई-आधारित कौशल से सशक्त बनाना था, जिनमें शामिल हैं:

* कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से परिचय और व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले एआई उपकरणों का संक्षिप्त विवरण

* ब्रांडिंग, उत्पाद डिजाइन, पैकेजिंग और विपणन संबंधी रणनीतियां

* डिजिटल और एआई-आधारित उपायों का उपयोग करके व्यावसायिक दक्षता बढ़ाना

* ग्राहकों के साथ जुड़ाव और बाजार के पहुंच के विस्तार हेतु एआई का लाभ उठाना

* एआई-जनित उत्पाद विवरण और उच्च-गुणवत्ता वाली दृश्य सामग्री तैयार करना

अखिल भारतीय कवरेज

इस पहल में कई राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों की व्यापक भागीदारी देखी गई। लाभार्थियों का विवरण इस प्रकार है:

* तेलंगाना – 387

* महाराष्ट्र – 295

* गुजरात – 262

* राजस्थान – 251

* बिहार – 250

* कर्नाटक – 248

* उत्तर प्रदेश – 210

* पंजाब – 100

* दिल्ली – 82

* ओडिशा – 70

* गोवा – 68

* उत्तराखंड – 51

* मेघालय – 51

* त्रिपुरा – 50

* झारखंड – 43

* दमन एवं दीव – 38

* चंडीगढ़ – 36

* हिमाचल प्रदेश – 31

* सिक्किम – 20

* कुल लाभार्थी: 2,543

प्रौद्योगिकी के साथ परंपरा का सशक्तिकरण

पारंपरिक शिल्पकला में एआई को एकीकृत करके, मंत्रालय का लक्ष्य है:

* जमीनी स्तर के उद्यमियों के बीच व्याप्त डिजिटल विभाजन को पाटना

* उत्पाद मूल्य और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना

* कारीगरों को नए बाजारों और ग्राहक वर्गों तक पहुंच प्रदान करना

* सतत एवं समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देना

यह पहल भारतीय शिल्पकला की समृद्ध विरासत को डिजिटल रूप से सशक्त और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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