दस लाख से अधिक आबादी वाले शहर बनेंगे आर्थिक केंद्र
- नीति आयोग ने दस लाख आबादी वाले शहरों के लिए रूपरेखा पर रिपोर्ट जारी की
नई दिल्ली : केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ने नई दिल्ली स्थित भारत पर्यावास केन्द्र में नीति आयोग द्वारा तैयार “प्रभावी शहरी शासन की ओर बढ़ते हुए– दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए एक रूपरेखा” रिपोर्ट जारी किया। इस कार्यक्रम में 10 से अधिक राज्यों के शहरी विकास मंत्रियों ने भाग लिया, जो शहरी शासन सुधारों को आगे बढ़ाने के प्रति व्यापक भागीदारी और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने और 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए भारत का शहरीकरण बहुत महत्वपूर्ण है।
शहर आर्थिक विकास को गति देने, नवाचार को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। हालांकि, उनकी संभावनाएँ कई ढांचागत चुनौतियों के कारण सीमित रह जाती है, जैसे कि संस्थागत व्यवस्थाओं का बिखरा होना, शक्तियों का सीमित हस्तांतरण, कमजोर वित्तीय स्वायत्तता और जवाबदेही का स्पष्ट न होना। इसलिए, शहरों को प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए शहरी शासन को सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है।
नीति आयोग की रिपोर्ट “प्रभावी शहरी शासन की ओर बढ़ते हुए– दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए एक रूपरेखा” इन चुनौतियों के समाधान के लिए एक केंद्रित कार्ययोजना प्रस्तुत करती है। यह रिपोर्ट क्षेत्रीय सुधारों के साथ-साथ संस्थागत आधार को सुदृढ़ करने के महत्व पर जोर देती है और भारत के दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों को प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में प्राथमिकता देती है, जो राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
यह रिपोर्ट शासन से जुड़ी लगातार बनी रहने वाली में लगातार बनी रहने वाली समस्याओं की पहचान करती है, जिनमें कमजोर और बिखरी हुई नेतृत्व नेतृत्व संरचनाएं, सीमित वित्तीय क्षमता, तथा क्षमता संबंधी कमी शामिल हैं, जो सेवा वितरण और शहरी कामकाज को प्रभावित करती हैं। यह रिपोर्ट शहर स्तर पर अधिकार, जिम्मेदारी और संसाधनों के स्पष्ट पुनर्गठन के माध्यम से सशक्त सरकारों की ओर बदलाव का आह्वान करती है। ऐसा परिवर्तन शहरों को प्रभावी विकास के इंजन और उत्तरदायी सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें में शामिल है:
एक निश्चित कार्यकाल वाले प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित मेयर की व्यवस्था के जरिए शहरी नेतृत्व को मज़बूत बनाना, जिसे एक सशक्त ‘मेयर-इन-काउंसिल’ प्रणाली का समर्थन प्राप्त हो, ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में निरंतरता, स्पष्टता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
समन्वय और जवाबदेही को बेहतर बनाने के लिए जल आपूर्ति, स्वच्छता और सार्वजनिक परिवहन जैसी प्रमुख सेवाओं को शहरी सरकारों के अधिकार क्षेत्र में लाने की सिफारिश की गई है।
नगरपालिका वित्त को सुदृढ़ करने के लिए स्वयं के स्रोतों से प्राप्त राजस्व को बढ़ाने, सशक्त राज्य वित्त आयोगों के माध्यम से अधिक पूर्वानुमेय और समयबद्ध वित्तीय हस्तांतरण सुनिश्चित करने, तथा नगरपालिका बॉण्ड जैसे बाजार-आधारित वित्तपोषण तंत्रों तक पहुंच सक्षम बनाने की सिफारिश की गई है।
सेवा वितरण में शामिल कई अर्ध-सरकारी एजेंसियों को शहरी सरकार के अधीन लाकर संस्थागत पुनर्गठन करने की सिफारिश की गई है, जिसमें भूमिकाओं का स्पष्ट निर्धारण और अधिक सुदृढ़ समन्वय ढांचा सुनिश्चित किया जाए।
प्रभावी कार्यान्वयन के लिए, रिपोर्ट यह सिफारिश करती है कि राज्य अपने नगरपालिका अधिनियमों में संशोधन करें, ताकि इन शासन सुधारों को शामिल किया जा सके। इसके साथ ही, यह आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से भी आग्रह करती है कि वह ‘मॉडल नगरपालिका कानून’ में सुधार करे और इन सुधारों को अपनाने में सहायता के लिए मार्गदर्शन तथा प्रोत्साहन भी प्रदान करे।
यह रिपोर्ट लागू करने के लिए चरणबद्ध तरीका सुझाती है, जिससे परीक्षण, सीखने और विस्तार योग्य ढांचों के विकास की सुविधा बनाने में मदद मिल सके। यह तरीका सुनिश्चित करता है कि सुधार व्यावहारिक और टिकाऊ दोनों हों। कुल मिलाकर, यह भारत में शहरी शासन को सुदृढ़ करने के लिए एक पूरी रूपरेखा पेश करती है और इस बात को स्वीकार करती है कि देश की अगली विकास अवस्था आर्थिक रूप से जीवंत, सुशासित और रहने योग्य शहरों द्वारा संचालित होगी। इसलिए, शहरी सरकारों को मजबूत बनाना सिर्फ एक प्रशासनिक प्राथमिकता नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एक रणनीतिक अनिवार्यता भी है।
नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने रिपोर्ट की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह रिपोर्ट व्यापक विचार-विमर्श, साक्ष्य-आधारित विश्लेषण और विशेषज्ञों के एक समूह के साथ वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अध्ययन का परिणाम है। उन्होंने उल्लेख किया कि “प्रभावी शहरी शासन की ओर बढ़ना” रिपोर्ट सही मायने में शहरी सरकारों की स्थापना की आवश्यकता पर जोर देती है, जो कि अभी भी एक महत्वपूर्ण कमी बनी हुई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सशक्त शहरी सरकारों के बिना भारत अपने शहरों की आर्थिक क्षमता पूरी तरह से लाभ नहीं उठा सकता, और इन सिफारिशों का प्रभावी कार्यान्वयन ही विकसित भारत के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

