राष्ट्रीय संकल्प को राष्ट्रीय परिणामों में बदलना चाहिए: उपराष्ट्रपति
Vice President Shri C. P. Radhakrishnan addressed the 66th Course of the National Defence College in New Delhi, emphasising that national strategy must translate national purpose into action and national intent into tangible outcomes.
- उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान का आह्वान किया; कहा- किसी भी देश को दूसरे देश की सीमाओं का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए
- उप-राष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के 66वें पाठ्यक्रम को संबोधित किया
नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एनडीसी) के 66वें पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को "भारत के मूल मूल्य, राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय उद्देश्य" विषय पर संबोधित किया। उपराष्ट्रपति ने भारतीय सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं, पुलिस और अन्य सरकारी संगठनों के अधिकारियों के साथ-साथ मित्र विदेशी देशों के 41 अधिकारियों सहित 122 प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में रणनीतिक सोच, एकीकृत नीति निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।
श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि राष्ट्रीय मूल्य राष्ट्रीय पहचान की आधारशिला हैं और विश्व के साथ किसी देश के जुड़ाव का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने भारत के सभ्यतागत दर्शन 'वसुधैव कुटुंबकम' (विश्व एक परिवार है) का उदाहरण दिया। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की वैक्सीन मैत्री पहल, आपदाओं के दौरान प्राथमिक सहायता प्रदान करने वाली संस्था के रूप में इसकी भूमिका और जलवायु परिवर्तन और आपदा से निपटने की क्षमता से संबंधित अंतरराष्ट्रीय पहलों में इसके नेतृत्व को इन मूल्यों को व्यावहारिक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित संप्रभुता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता जैसे संवैधानिक मूल्यों से प्रेरित हैं। उन्होंने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना; इसके लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और संघीय स्वरूप को बनाए रखना; इसके रणनीतिक, राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाना; विकास और मानव विकास के लिए एक स्थिर और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना; और अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता में योगदान देना जैसी पांच व्यापक प्राथमिकताओं पर बल दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा के बढ़ते परस्पर जुड़ाव का उल्लेख करते हुए, श्री राधाकृष्णन ने आतंकवाद, साइबर खतरों, महामारियों, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय अपराध जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा और साझा वैश्विक हितों को आगे बढ़ाना अक्सर परस्पर सहायक उद्देश्य होते हैं, जिनके लिए समन्वित कार्रवाई, सूचना साझाकरण और राष्ट्रों के बीच आपसी विश्वास की आवश्यकता होती है।
वर्ष 2047 तक विकसित भारत को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने उपलब्ध संसाधनों, सुदृढ़ नीतिगत विकल्पों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ दीर्घकालिक दृष्टिकोण को संरेखित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा में भारत की भूमि, हवाई क्षेत्र, समुद्री हितों और साइबर क्षेत्र की रक्षा करना, साथ ही सतत विकास और समृद्धि के लिए परिस्थितियां बनाना शामिल है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का लक्ष्य विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनना है, लेकिन दूसरों पर प्रभुत्व स्थापित करने या उन्हें अपनी शर्तें मनवाने के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी देश हम पर अनैतिक शर्तें न थोपे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र की संप्रभुता और आत्मसम्मान का सम्मान किया जाना चाहिए और देशों को एक-दूसरे की क्षेत्रीय सीमाओं का अतिक्रमण करने से बचना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने भावी रणनीतिक नेताओं के रूप में उपस्थित प्रतिभागियों से संस्थागत और व्यावसायिक सीमाओं से परे एक एकीकृत और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने राष्ट्रों को परिभाषित करने वाले मूल्यों को समझने, संरक्षित किए जाने वाले हितों की पहचान करने, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, उन्हें बुद्धिमानी से प्राथमिकता देने और राष्ट्रीय संकल्पों को मूर्त परिणामों में बदलने के लिए रणनीतियां विकसित करने का आह्वान किया।
What's Your Reaction?