जंतर मंतर : CJP के संसद मार्च में मीडिया निशाने पर क्यों!!
student protest on NEET paper leak
नई दिल्ली : 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च की तरह- तरह की तस्वीर सामने आ रही हैं| लुटियन्स दिल्ली पूरी तरह से युवाओं से पट गई है| ये युवा अपने भविष्य के लिए सड़कों पर हैं| चारों ओर से संसद कूच हो रहा है| इस पूरे आंदोलन को देश का मुख्य मीडिया और सोशल मीडिया एकसाथ कवर कर रहा है| मीडिया दिखा रहा है कि छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया है| आँसू गैस के गोले छोड़े हैं| उधर जैसे ही मुख्य मीडिया ने दिखाया कि छात्र आंदोलन नेतृत्व विहीन हो रहा है| कुछ युवा पुलिस पर पत्थरबाजी कर रहे हैं| पुलिस वाले भी घाल हो रहे हैं| हालत बेकाबू हो जाते हैं|
इसके बाद प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों की नाराज़गी मीडिया पर साफ दिखी। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पिछले कुछ सालों में मीडिया उनकी मांगों को ठीक से नहीं दिखा रहा। इस दौरान कुछ ग्राउंड रिपोर्टर भीड़ के गुस्से का शिकार हुए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पत्रकारों ने इस पर आपत्ति जताई। संवाददाता पूनम पांडे ने X पर लिखा, मीडिया से नाराज़गी हो सकती है लेकिन रिपोर्टर को टारगेट करना सही नहीं। रिपोर्टर ही ग्राउंड पर धूप-बारिश में रिपोर्टिंग करता है। नाराज़गी सही जगह निकलनी चाहिए। वहीं द हिन्दू की डिप्टी एडिटर विजेता सिंह ने कहा, "टीवी पर नफ़रत फैलाने वाले एंकरों और ग्राउंड रिपोर्टरों में फर्क करना जरूरी है। ज्यादातर टीवी रिपोर्टर काफी मेहनती होते हैं। ऐसे में आंदोलनकारियों को समझना होगा कि मीडिया के मंच के जरिए वो आंदोलन की सही तस्वीर देश तक पहुंचा सकते हैं| ऐसे में युवाओं को अपने हित में मीडिया तक शालीनता से अपनी बात पहुंचानी होगी| तभी आंदोलन का उद्देश्य सफल होगा|
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