मुख्य धारा की मीडिया यथाशीघ्र सचेत हो जाए तो ही बचेगी साख
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"सत्यं तु सत्यमेव भवति।" अर्थात सत्य तो सत्य ही होता है। खद्दरधारियों व "बड़े बाबूओं" के काले कारनामें तथा जन उत्पीड़न की खबरों को दमदारी से सामने लाना ही होगा। मेन स्ट्रीम की मीडिया व उससे जुड़े कलमकार तभी बचा पाएंगे अपनी साख। अन्यथा सोशल मीडिया इसका अस्तित्व मिटाने को आतुर। नीति नियंताओं के आगे-पीछे घूमने व अल्प व्यक्तिगत लाभ हेतु नेताओं-अधिकारियों की गणेश परिक्रमा के कारण उनकी धाक तो किंचित अब रही नहीं। समय है, अतिशीघ्र आत्मंमथन व स्व-विवेचन की। राजनीतिक रणनीति,कुशल नेतृत्व तथा आमजन की नाराजगी के बाद वर्ष 2014 में देश में नई सरकार बनी थी। सोशल मीडिया ने इसमें अहम भूमिका निभाई थी। इतिहास अपने को दोहराने पर अड़ सा गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सीजेपी के दबाव का परिणाम तो है ही, सोशल मीडिया की भी देन। सही व गलत की जानकारी "जेन जी" को अत्यधिक। मेन स्ट्रीम मीडिया का हश्र जंतर मंतर पर खूब देखने को मिला। खोई इज्जत प्राप्ति हेतु हमें बिना किसी दबाव के लिखना ही होगा। हम आमजन की सशक्त आवाज। जिस दिन से हमने बिना किसी दबाव व राग-द्वेष सच को सच लिखने का साहस फिर से शुरू कर दिया, समाज में हम पुन: "इज्जतदार" हो जाएंगे। अपने अधिकार हेतु आज हम जिसकी "गणेश परिक्रमा" कर रहे हैं, वही "नेता- बड़े बाबू" हमारे घर के गेट पर शीश नवा खड़े नजर आएंगे। आवश्यकता बस..बड़ा जज्बा दिखाने की। पुनश्च, वर्ष 2014 में देश की राजनीति बदल देने वाला सोशल मीडिया वर्तमान में परिवर्तन व देश को नई राह दिखाने को कदाचित आतुर हो चला है....!
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