अनुसूचित जनजाति के युवा बनेंगे बिजनेसमैन
Partnerships to reach approximately 1,000 Scheduled Tribes Entrepreneurs with a minimum of 100 to be funded and incubated under VCF-ST
- वीसीएफ-एसटी के तहत लगभग 1,000 अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों तक पहुंचने के लिए साझेदारी की जाएगी
- जिनमें से कम से कम 100 को वित्त पोषित और इनक्यूबेशन सहायता दी जाएगी
नई दिल्ली : अनुसूचित जाति- जनजाति के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की सरकारी कवायद तेज हो गई गई| अब एससी- एसटी युवाओं के लिए बिजनेस के अधिक मौके खोले जाएंगे | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के सामाजिक- अनुसूचित जनजाति आर्थिक सशक्तिकरण को तीव्र कर दिया है|
इस प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए, जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आज नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-I के सम्मेलन कक्ष में दस राज्य और टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटरों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए और उनका आदान-प्रदान किया। इसका उद्देश्य एसटी के नेतृत्व वाले स्टार्टअप और उद्यमों की पहचान करना, उन्हें इनक्यूबेट करना, सलाह देना और उनके लिए वित्तपोषण की व्यवस्था करना है।
मंत्रालय ने आईआईएम कलकत्ता इनोवेशन पार्क, टी-हब फाउंडेशन, स्टार्टअप तमिलनाडु, स्टार्टअप ओडिशा, आईआईएम उदयपुर इनक्यूबेशन सेंटर, केरल स्टार्टअप मिशन, प्राइम मेघालय, केआईआईटी टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर, फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (एफआईईडी), आईआईएम काशीपुर और एंटरप्रेन्योर स्कूल ऑफ बिजनेस, नागालैंड के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। ये सभी संस्थान मंत्रालय के साथ मिलकर काम करेंगे, ताकि देश भर में अनुसूचित जनजाति समुदायों के बीच नवाचार-आधारित उद्यमिता के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) बनाया जा सके। अपने मुख्य भाषण में, जनजातीय कार्य मंत्री माननीय श्री जुएल ओराम ने नौकरी देने वाले और नौकरी चाहने वाले, दोनों तरह के लोग तैयार करने के लक्ष्य पर ज़ोर दिया। उन्होंने जनजातीय युवाओं की क्षमता का उपयोग करने और अनुसूचित जनजाति के अधिक से अधिक नवोन्मेषकों और उद्यमियों तक पहुंचने और उनकी मदद करने पर जोर दिया।
इसके बाद जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने माननीय प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विजन को दोहराया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल बुनियादी ढांचे और एआई के क्षेत्र में जनजातीय समुदायों की तरक्की की चर्चा की।
जनजातीय कार्य मंत्रालय में सचिव सुश्री रंजना चोपड़ा ने जनजातीय समुदायों की क्षमता की पहचान करने पर बात की। उन्होंने कहा कि नवाचार उनके लिए कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन जीने के तरीके का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक जनजातीय प्रणालियों में नवाचार का खज़ाना छिपा है, जो अक्सर आधुनिक दुनिया की नज़र से ओझल हो गया है और जिसे एक व्यवस्थित रणनीति के साथ मुख्यधारा में लाने की ज़रूरत है। उन्होंने इस साझेदारी के लिए प्राथमिकताओं के बारे में बताया, जैसे देश में कुल स्टार्टअप्स और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स की संख्या के बीच के अंतर को कम करना और अधिक संख्या में एसटी उद्यमियों की मदद और मार्गदर्शन करना। इस एमओयू के तहत किए जाने वाले प्रयासों को महत्वाकांक्षी बनाने का आह्वान करते हुए, सचिव ने समानता के बजाय न्यायसंगतता के सिद्धांत पर ज़ोर दिया। उन्होंने माना कि जनजातीय स्टार्टअप और उद्यम अलग शुरुआती बिंदु से शुरू हो सकते हैं, इसलिए उन्हें समर्पित, रणनीतिक और विशेष सहायता,प्रदर्शन और नेटवर्किंग की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि आजीविका एकीकरण को बेहतर बनाने का मतलब कि वंचित समुदायों को मुख्यधारा में लाना और उन्हें पारंपरिक मॉडलों से परे आधुनिक आजीविका के अवसरों से जोड़ना है। उन्होंने जनजातीय समुदायों को केवल गुज़ारा करने वाली आजीविका से आगे बढ़कर आधुनिक और महत्वाकांक्षी आजीविका की ओर ले जाने के मुख्य लक्ष्य को स्पष्ट किया। उन्होंने इनक्यूबेटर्स से फिर आग्रह किया कि वे केवल गुज़ारा करने वाले उद्यमों का लक्ष्य न रखें, बल्कि व्यावसायिक रूप से सफल उद्यमों पर ध्यान केंद्रित करें।
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