पेट्रोल नहीं बल्कि खेतों से आने वाला इथेनॉल देश का भविष्य
Farmers voice strong support for Ethanol after meeting Union Agriculture Minister Shri Shivraj Singh Chouhan
- कृषि मंत्री से मुलाकात के बाद किसानों ने किया इथेनॉल का समर्थन
- किसानों और सरकार को इथेनॉल पर गलत नैरेटिव खत्म करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए : एआईकेसीसी
- किसान भगवान की तरह हैं”: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान
- देश भर के किसान नेताओं ने इथेनॉल पर खुलकर अपनी बात रखी
नई दिल्ली : देशभर के किसान इथेनॉल को लेकर बेहद संवेदनशील हैं| वे इथेनाल के बाजार में अपनी भागेदारी चाहते हैं| इसका कारण है इथेनाल से खेत की उपज केवल मंडी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पेट्रोल पंपों और ऊर्जा बाजार तक पहुंचेगी। इससे किसानों के लिए एक नया और मजबूत बाजार तैयार होगा। जब गन्ने, मक्का, चावल और अन्य फीडस्टॉक से इथेनॉल बनाया जाएगा, तो किसानों को अधिक खरीदार मिलेंगे और फसल के खराब होने या भंडारण की समस्या कम होगी।
इन सब मुद्दों को लेकर केंद्रीय कृषि भवन में एआईकेसीसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और देश के अन्य हिस्सों के किसान नेता शामिल थे। बैठक का मुख्य ध्यान इथेनॉल, किसानों की आय, एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य), बाजारों और राष्ट्रीय कृषि नीति पर रहा। हालांकि, किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे इथेनॉल के पक्ष में हैं| वे केवल यह चाहते हैं कि इस कार्यक्रम का असली लाभ कंपनियों या बिचौलियों तक ही सीमित न रहकर सीधे किसान तक पहुंचे।
बैठक में किसानों ने कहा कि वे इथेनॉल के खिलाफ नहीं हैं बल्कि इसका पूरी तरह से समर्थन करते हैं। हालांकि, यह आवश्यक है कि किसी भी फसल—चाहे मक्का हो या गन्ना—का सही मूल्य किसानों तक पहुंचे। किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि वे चाहते हैं कि इथेनॉल नीति खेती के लिए एक नया रास्ता बनाए, न कि उनके लिए एक नई चिंता बने। उन्होंने कहा कि वे इथेनॉल के साथ हैं, यदि इथेनॉल भी उनके साथ है।
‘इथेनॉल पर नासमझी को साफ करना जरूरी है’ – किसान नेता
बैठक के दौरान, कई किसान नेताओं ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ प्लेटफॉर्मों पर इथेनॉल के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है – कभी यह कहकर कि यह वाहनों को नुकसान पहुंचाता है, तो कभी यह कहकर कि यह किसानों को नुकसान पहुंचाता है। किसानों ने मांग की कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय और किसान संगठन मिलकर स्पष्ट रूप से बताएं कि इथेनॉल से किन फसलों को किस प्रकार लाभ होगा और पानी की अधिक खपत वाली फसलों से कम पानी में भी उगने वाली फसलों की ओर कैसे बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी तक पहुंचने के लिए रील्स, शॉर्ट वीडियो और जमीनी स्तर की बैठकों के माध्यम से इथेनॉल की सही तस्वीर दिखाना आवश्यक है।
मंत्री ने सुझाव सुनकर मार्गदर्शन किया
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पूरे समय किसानों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और जमीनी स्थिति को समझने के लिए बीच-बीच में सवाल भी पूछते रहे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की सोच बिल्कुल स्पष्ट है – इथेनॉल कार्यक्रम का लाभ खेत से लेकर ईंधन की टंकी तक पूरी श्रृंखला को मिलना चाहिए, लेकिन सबसे बड़ा हिस्सा किसान के हित में जाना चाहिए। श्री शिवराज चौहान ने कहा कि इथेनॉल देश की ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ किसानों की जेब को भी मजबूत करेगा। हमारा जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि किसी भी फसल और किसी भी राज्य के साथ अन्याय न हो।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में आश्वासन दिया कि मक्का, चावल, गन्ना और अन्य फीडस्टॉक की कीमतों और मांग का संतुलन बनाए रखने के लिए नीति की समीक्षा की जाएगी। फैसले केवल किसान हित के दृष्टिकोण से लिए जाएंगे, विशेष रूप से मक्का किसानों के लाभ को ध्यान में रखकर। इथेनॉल पर उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों और तकनीकी रिपोर्टों के माध्यम से नकारात्मक नैरेटिव का जवाब दिया जाएगा और किसानों के साथ मिलकर तथ्य-आधारित संवाद को आगे बढ़ाया जाएगा।
किसानों के विचार, मंत्री का मार्गदर्शन—साझेदारी का संदेश
बैठक के अंत में एआईकेसीसी के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे गांवों तक यह संदेश लेकर जाएंगे कि तथ्यों और जमीनी अनुभवों के आधार पर इथेनॉल से जुड़े भ्रम को दूर किया जाएगा और सरकार के साथ मिलकर काम करके किसान हित में नीति बनाने की प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा। श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी यह स्पष्ट संदेश दिया कि किसान संगठन सरकार के विरोधी नहीं बल्कि नीति में भागीदार हैं। उन्होंने कहा कि हमने इथेनॉल पर किसानों के विचारों को ध्यान से सुना है; अब हमारा काम इन सुझावों के आधार पर एक ऐसा ढांचा तैयार करना है जिसमें किसान, देश और ऊर्जा – तीनों मजबूत हों।
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