दुनिया भारत को विकास और उम्मीद की एक नई किरण के रूप में देखती हैः प्रधानमंत्री

The Prime Minister, Shri Narendra Modi has shared glimpses of his address at the Economic Times World Leaders Forum 2026.

Aug 22, 2026 - 11:27
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दुनिया भारत को विकास और उम्मीद की एक नई किरण के रूप में देखती हैः प्रधानमंत्री

-          प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026को संबोधित किया

-          भारत में राजनीतिक स्थिरता और नीतियों में निरंतरता हैः प्रधानमंत्री

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026को संबोधित किया। उन्होंने उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों, नीति निर्माताओं और व्यापारिक अग्रणियों का अभिवादन करते हुए इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में भाग लेने पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। श्री मोदी ने इस वर्ष के विषय साझा भविष्यके महत्व और प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि हाल के वर्षों के वैश्विक उतार-चढ़ाव ने यह साबित कर दिया है कि सभी देशों का भविष्य आपस में जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा इसी भावना के साथ आगे बढ़ा है। यही कारण है कि भारत का जी-20 अध्यक्षता के दौरान मंत्र एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्यथा। श्री मोदी ने कहा, “साझा भविष्य की यह भावना और इसके साथ जुड़ी जिम्मेदारी 21वीं सदी की दुनिया की कई समस्याओं का समाधान करती  है।

प्रधानमंत्री ने विकास, हथियार के रूप में संसाधनों के उपयोग और बढ़ते अविश्वास पर वैश्विक चिंताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत को विकास और उम्मीद की एक किरण के रूप में देख रहा है। उन्होंने 25 करोड़ नागरिकों को गरीबी से बाहर निकालने और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का दर्जा बनाए रखने में भारत की सफलता को रेखांकित किया। श्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में घोषित सप्तधारा’ (मैनुफैक्चरिंग, प्रौद्योगिकी और हरित अर्थव्यवस्था सहित सात प्रमुख क्षेत्रों) पर सरकार के ध्यान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत आज नीतिगत स्तर पर अगली पीढ़ी के सुधार कर रहा है। शासन के स्तर पर सुधार लाया जा रहा है और जीवन को आसान बनाने के लिए सुधार लागू किए जा रहे हैं। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “सुधार हमारे लिए कोई मजबूरी नहीं हैं। यह हमारी सर्वोच्च प्रतिबद्धता और दृढ़ विश्वास है।

प्रधानमंत्री ने वर्तमान आर्थिक माहौल की तुलना अतीत की प्रतिबंधात्मक नीतियों से करते हुए लाइसेंस राज की प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट (पीएलपी) की अवधारणा को मजाकिया अंदाज में समझाया। उन्होंने कहा कि उस दौर में कंपनियों को निर्धारित सीमा से अधिक उत्पादन करने पर दंडित और माल नष्ट करने के लिए मजबूर किया जाता था। उन्होंने पिछली सरकारों की उस मानसिकता की आलोचना की जो जानबूझ कर कमी बनाए रखती थी ताकि नागरिक उन पर निर्भर रहें। इससे रोजगार सृजन बुरी तरह प्रभावित हुआ। श्री मोदी ने कहा, “इस मानसिकता वाले लोग हमेशा चाहते थे कि जरूरी चीज़ों की भारी कमी बनी रहे। नागरिकों को अभाव में रखना उनकी सोची-समझी नीति थी।

शासन के दृष्टिकोण में आए बदलाव पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने विनाशकारी पीएलपी मॉडल की तुलना वर्तमान प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना से की। उन्होंने आंकड़ों के सहारे स्पष्ट किया कि कैसे सोच में सुधार से आर्थिक परिणाम बदल जाते हैं। उन्होंने पीलीआई योजना की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि इसने 2.5 लाख करोड़ रुपए का वास्तविक निवेश आकर्षित किया, 22 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और बिक्री की, 15 लाख करोड़ रुपये का निर्यात किया और 14 लाख से अधिक रोजगार पैदा किए हैं। श्री मोदी ने कहा, “जहां पुरानें लाइसेंस राज के सजा मॉडल ने बेरोजगारी बढ़ाई, वहीं आज हमारा प्रोत्साहन मॉडल लाखों नए रोजगार पैदा कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने देश के तेज विकास का श्रेय राजनीतिक स्थिरता और नीतियों की निरंतरता को देते हुए शासन स्तर के सुधारों पर केन्द्रित एक स्पष्ट रोडमैप पेश किया। उन्होंने अनुमति नहीं मिलने तक प्रतिबंधितके पुराने रवैये की जगह अपनाए गए प्रतिबंधित नहीं होने तक अनुमतिके आधुनिक दृष्टिकोण को समझाया जिससे बार-बार नौकरशाही की अनुमति लेने की जरूरत काफी कम हो गई है। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, ‘सरकार और नागरिकों के बीच संबंध का मूल आधार गहरा विश्वास होना चाहिए, संदेह नहीं।

इस नई सोच को दर्शाने वाले विधायी सुधारों का ब्यौरा देते हुए प्रधानमंत्री ने जन विश्वास विधेयक का जिक्र किया। इस विधेयक के जरिए कई छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर कैद की सजा की जगह आर्थिक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने उद्योगों पर बोझ कम करने के लिए 40,000 से अधिक अनुपालनों को हटाने और 1,500 से अधिक पुराने कानूनों को खत्म करने की बात भी की। श्री मोदी ने कहा, ‘जब हम इन सभी बड़े सुधारों को एक साथ देखते हैं, तो हमें अंदाजा मिलता है कि हमारे व्यापार के ऊपर से कितना बड़ा बोझ उतर गया है।

राजनीतिक विरोध के बावजूद कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाने के सरकार के निरंतर प्रयास की सराहना करते हुए, प्रधानमंत्री ने मानसून सत्र के दौरान बैंक्स बुक्स साक्ष्य विधेयकके पारित होने पर खुशी जताई।  उन्होंने बताया कि 19वीं सदी के ब्रिटिश कानून की जगह डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता देने वाला आधुनिक कानून लाने से जटिलताएं काफी कम होंगी और व्यापार करने की सुगमता को बढ़ावा मिलेगा। श्री मोदी ने कहा,  "इससे कानूनी मुश्किलें कम होंगी, प्रणाली में व्यापक पारदर्शिता बढ़ेगी और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में काफी सुधार होगा।"

मानव-केंद्रित शासन के अत्यधिक महत्व पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने भारतीय रेल में बड़े पैमाने पर किए गए सुरक्षा सुधारों का ज़िक्र किया। इनमें 6,500 से ज़्यादा स्टेशनों और 10,000 लेवल क्रॉसिंग पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लगाना शामिल है। मिशन मोड में लगभग 9,000 बिना गार्ड वाली क्रॉसिंग को हटाने से 2014 से पहले के मुकाबले ट्रेन दुर्घटनाओं में 90 प्रतिशत तक की कमी आई है। इस पर श्री मोदी ने कहा, "सिस्टम ऐसे बनाए जाने चाहिए जिनमें हर एक इंसान की ज़िंदगी और उनके कीमती समय के प्रति पूरी संवेदनशीलता हो।"

प्रधानमंत्री ने आधुनिक शासन के एक बड़े उदाहरण के तौर पर रेलवे में स्वच्छता पर आए ज़बरदस्त बदलाव का ज़िक्र करते हुए कहा कि 2014 से अब तक ट्रेनों में 3.6 लाख से ज़्यादा बायो-टॉयलेट लगाए जा चुके हैं, जिससे पटरियों पर मानव मल की समस्या को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। श्री मोदी ने कहा, "यह बड़ा बदलाव सिर्फ़ स्वच्छता तक सीमित नहीं है; यह असल में यात्रियों की गरिमा, स्वच्छता और आधुनिक शासन से जुड़ा है।"

नीतिगत सुधारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार देश पर पाबंदी वाले नियम थोपने के बजाय, देश की ज़रूरतों के हिसाब से ऐसी नीतियां बनाती है जो आगे की सोच रखने वाली, लोगों के हित में और विकास को बढ़ावा देने वाली हों। उन्होंने उस अजीब स्थिति का ज़िक्र किया जब भारत के अपने नागरिकों के लिए देश का नक्शा बनाना गैर-कानूनी था और बताया कि कैसे भू-स्थानिक डेटा के नियमों में ढील देने से स्टार्टअप्स के विकास में ज़बरदस्त तेज़ी आई है। श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा, "नीतियां पूरी तरह से देश और वहां के लोगों की असल ज़रूरतों के हिसाब से ही बनाई जानी चाहिए।"

प्रधानमंत्री ने सीमा पर अवसंरचना को कमज़ोरी के बजाय एक बड़ी रणनीतिक ताकत के तौर पर देखने के लिए कहा। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने अकेले 2024 और 2025 में देश को 250 अवसंरचना परियोजनाएं समर्पित कीं। श्री मोदी ने कहा, "जब रक्षात्मक सोच मौलिक रूप से बदल गई, तो सीमा पर अवसंरचना की पूरी तस्वीर भी तेजी से बदल गई।

अत्यधिक प्रतिबंधित क्षेत्रों में अभूतपूर्व संरचनात्मक सुधारों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने 'शांति विधेयक' की बात की, जिसने परमाणु ऊर्जा को निजी क्षेत्र के लिए सफलतापूर्वक खोल दिया और 40 से अधिक आयुध कारखानों के 7 आधुनिक कॉर्पोरेट कंपनियों में बदलने के ऐतिहासिक बदलाव का भी ज़िक्र किया। उन्होंने राष्ट्र की आत्मनिर्भरता को गति देने और 2014 की तुलना में रक्षा निर्यात को 55 गुना बढ़ाने का श्रेय इन साहसिक कदमों को दिया। श्री मोदी ने कहा, "आज भारत अपनी रक्षा ज़रूरतों के लिए भी तेज़ी से आत्मनिर्भर बन रहा है और हमारा रक्षा निर्यात व्यापक रूप से बढ़ा है।"

दैनिक जीवन में 'ईज ऑफ लिविंग' (जीवन को आसान बनाने वाले) सुधारों के सहज समावेश पर विचार व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री ने ध्यान दिलाया कि डिजिटल प्रगतिचाहे किराना सामान ऑर्डर करना हो, क्यूआर कोड स्कैन करना हो या तुरंत एक-से-दूसरे को पैसे ट्रांसफर करना होसामान्य भारतीय जीवन का एक साधारण लेकिन क्रांतिकारी हिस्सा बन चुकी है।  श्री मोदी ने कहा, "ये अद्भुत चीज़ें तो कमाल की हैं ही लेकिन अब ये भारत के आम आदमी की ज़िंदगी का एक हिस्सा बन गई हैं।"

प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारतीय मध्यम वर्ग ने जो बड़े बदलाव देखे हैं, वे कई विकसित देशों में भी अभी तक एक दूर का सपना ही हैं। श्री मोदी ने कहा, "भारत में किए गए सुधारों की वजह से लोगों की ज़िंदगी में जो ज़बरदस्त बदलाव आया है, वह आज भी कई विकसित देशों में एक दूर का सपना बना हुआ है।"

भारत की डिजिटल क्रांति के मुख्य आधारों का ज़िक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि देश में दुनिया का सबसे सस्ता डेटा और सबसे तेज़ी से 5जी रोलआउट हो रहा है। उन्होंने 'आधार' को मोबाइल और बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने की तारीफ़ की, जिससे आसानी से इ-केवाईसी और डिजिटल  प्रमाणीकरण हो पाता है और बैंक खाता खोलने से लेकर आयकर रिटर्न दाखिल करने तक सब कुछ बदल गया है। श्री मोदी ने कहा, "आज अगर आपको बैंक खाता खोलना है, तो सरकार सीधे बैंक को ही आपके पास ले आई है।"

टेलीमेडिसिन के बड़े असर को दिखाते हुए, प्रधानमंत्री ने ई-संजीवनी प्लेटफ़ॉर्म की तारीफ़ की। इस प्लेटफ़ॉर्म ने लगभग 50 करोड़ टेली-परामर्श (डॉक्टर से ऑनलाइन सलाह) को मुमकिन बनाया है और उन मरीज़ों तक ज़रूरी हेल्थकेयर सेवाएँ सीधे उनकी स्क्रीन पर पहुँचाई हैं, पहले उन्हें इसके लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। श्री मोदी ने कहा, "आज डॉक्टर आसानी से मरीज़ों के घर पर, सीधे उनकी स्क्रीन पर मौजूद हैं।"

देश में यात्रा के अनुभव को आधुनिक बनाने की तारीफ़ करते हुए, प्रधानमंत्री ने हवाई अड्डों पर 'डिजी यात्रा' के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और हाईवे पर 'फास्टैग' लागू करने का ज़िक्र किया, जिससे बिना रुके और आसानी से यात्रा करना मुमकिन हुआ है। श्री मोदी ने कहा, "इससे समय की भारी बचत हो रही है, ज़िंदगी काफ़ी आसान हो रही है और करोड़ों लोग सुरक्षित रूप से अपनी प्रगति पर ध्यान दे पा रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि देश में वास्तविक बदलाव के लिए ऐसे फ़ैसले लेने की ज़रूरत है जिनका असर लंबे समय तक रहे, न कि ऐसे फ़ैसले जो सिर्फ़ तुरंत चुनावी फ़ायदा पहुँचाएँ। श्री मोदी ने कहा, "देश को बुनियादी तौर पर बदलने वाले फ़ैसले वे होते हैं जिनका असर ज़मीन पर साफ़ दिखता है और जो वर्तमान और भविष्य, दोनों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।"

इस संवहनीय दृष्टिकोण का उदाहरण देते हुए, प्रधानमंत्री ने 'पीएम कुसुम' योजना और 'पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली' योजना का ज़िक्र किया, जिनसे किसानों और मध्यम वर्ग को लंबे समय तक बहुत फ़ायदा मिलता है। उन्होंने कहा कि मुफ्त बिजली की घोषणा करने से भले ही बड़ी सुर्खियां बनतीं, लेकिन सरकार ने 50 लाख से अधिक परिवारों के लिए छत पर सोलर प्लांट को सब्सिडी देने का सशक्त मार्ग चुना। श्री मोदी ने कहा, "हम हर घर की छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, ताकि बड़े पैमाने पर संवहनीय ऊर्जा मिल सके।"

प्रधानमंत्री ने 'सूर्य घर' योजना के गहरे सामाजिक-आर्थिक असर के बारे में बताते हुए कहा कि इससे परिवार न सिर्फ़ अपने बिजली के बिल खत्म कर रहे हैं, बल्कि ग्रिड को अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई भी कर रहे हैं। इससे वे आधुनिक उपकरण खरीद पा रहे हैं और यह भी सुनिश्चित हो रहा है कि बिजली जाने की वजह से बच्चों की नींद में खलल न पड़े। श्री मोदी ने कहा, "चुनाव हों या न हों, यह 'सूर्य घर' और इसकी रोशनी देश के परिवारों को सालों-साल तक फ़ायदा पहुंचाती रहेगी।"

युवाओं, महिलाओं, किसानों और मध्यम वर्ग के लिए 'ईज़ ऑफ़ लिविंग' (जीवन को आसान बनाने) और 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' (कारोबार को आसान बनाने) के लगातार विस्तार का वादा करते हुए, प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रशासन की 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' (सुधार की गति) 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने के लिए तेज़ी से आगे बढ़ेगी। देश की मज़बूती के गहरे वैश्विक असर पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि देश की प्रगति की राह सुरक्षित होने से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी ज़बरदस्त स्थिरता आएगी। इसके बाद उन्होंने कार्यक्रम के आयोजकों का दिल से आभार जताते हुए अपना भाषण समाप्त किया। श्री मोदी ने कहा, "भारत जितना ज़्यादा स्थिर और उसका भविष्य जितना सुरक्षित होगा, दुनिया को सुरक्षा का एहसास देने की उतनी ही ज़्यादा शक्ति यहाँ से पैदा होगी।"

 

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