नई इबारत लिखने को तैयार वि. सभा चुनाव परिणाम
- पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में चार मई को विधान सभा के चुनाव परिणाम कराएंगे जन-शक्ति का अहसास
डॉ मनीष शुक्ल
भारत में मतदान के बाद किए जाने किए जाने वाले एक्जिट पोल विश्वसनीय न हों लेकिन जनता के रुझान की झलक जरूर दिखला जाते हैं| पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में विधान सभा के मतदान हो चुके हैं| इस बार इन राज्यों में किसकी सरकार बनेगी, चार मई को आने वाले परिणाम से तय हो जाएगा| ये चुनाव परिणाम लोकतन्त्र की नींव को थोड़ा और मजबूत करते हुए नई इबारत जरूर लिखेंगे| इसका कारण है तमाम शंका- आशंका वाद- विवाद के बावजूद ऐतिहासिक मतदान होना है| बंगाल और तमिलनाडु जैसे राजनीतिक रूप से जागरूक राज्यों में जिस संख्या में जनता ने मतदान किया है, उसका आंकलन किसी भी सर्वे के सैंपल साइज से नहीं किया जा सकता है| हाँ,चुनाव यह जरूर बयान कर रह हैं कि जनता अपने वोट की ताकत को समझती है| वह इस ताकत का भरपूर इस्तेमाल भी कर सकती है| जन शक्ति के अस्तित्व का अहसास कराना भी जानती है|
विधान सभा के लिए पांच राज्यों में हुए मतदान के बाद आ रहे एग्जिट पोल्स में जो अनुमान अभी तक नजर आ रहे हैं, उसके मुताबिक असम में भाजपा सरकार एक बार फिर से बड़े बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। केरल में दस साल बाद कांग्रेस गठबंधन की वापसी होती दिख रही है। पुडुचेरी में भी बीजेपी गठबंधन सत्ता का दामन थाम सकता है। इन तीनों राज्यों के एग्जिट पोल चुनाव परिणामों के करीब हो सकते हैं| असम में मुख्यमंत्री हेमंत विश्वशर्मा की फायर ब्रांड छवि और पिछले पाँच वर्षों के कामकाज पर जनता दोबारा मुहर लगा सकती है| केरल की जनता इस बार कांग्रेस के हाथों में सत्ता की कमान सौंपकर वामपंथ का सफाया कर सकती है| राज्य के चुनाव परिणाम कांग्रेस की देश व्यापी वापसी का एक और मौका बन सकते हैं| पुडुचेरी में भाजपा की वापसी दक्षिण में उसके कदमों को टिकाए रख सकती है|
तमाम विवाद और राजनीतिक दलों के बीच खिंचतान के बाद पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव परिणाम लोकतन्त्र की नई इबारत लिखने जा रहे हैं| कई सर्वे एजेंसियों ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लंबे शासन के समापन की भविष्यवाणी की है। बंगाल वो राज्य है जहां ममता बनर्जी ने दशकों से चले आ रहे वामपंथी शासन को उखाड़कर खुद सत्ता की कमान संभाली थी| उस समय वामपंथियों और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच खूनी संघर्ष आम था| दीदी ने तब बंगाल की सड़कों पर उतरकर संघर्ष किया| खुद को निर्विवाद तौर पर साबित किया| माँ, माटी और मानुष का नारा देकर बंगाली अस्मिता को जाग्रत किया| दीदी आज भी बंगाल की सबसे बड़ी और सबसे लोकप्रिय नेता हैं| हालांकि भाजपा का दमन वाले वाले उनके पूर्व सिपाही शुवेंदु अधिकारी आज कड़ी चुनौती दे रहे हैं|
इन सालों में टीएमसी सरकार की लोकप्रियता का ग्राफ जरूर ऊपर- नीचे होता रहा है| सबसे बड़ी बात यह भी है राज्य की रक्त चरित्र राजनीति का चेहरा भी नहीं बदला है| कभी वामपंथ की सरकार से संघर्ष करने वाले टीएमसी कार्यकर्ता अपने राजनीतिक विरोधियों का हिंसक दमन करने लगे| पिछले कुछ सालों में सत्ता के खिलाफ संघर्ष करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं पर खुलेतौर पर हिंसक वारदातें हुई हैं | टीएमसी सरकार पर लगातार भ्रष्टाचार और घोटालों के दाग लगे| बीते सालों में राज्य में होने वाली चुनावी हिंसा देश भर में चर्चा का विषय बनी| वर्तमान विधान सभा चुनाव में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के बाद राज्य में हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई| चुनावी हिंसा में एक भी जान नहीं गई| इसका परिणाम मतदान में अभूतपूर्व वृद्धि के तौर पर देखा गया| एसआईआर के बाद पनपे सुरक्षापूर्ण और निष्पक्ष माहौल ने मतदाताओं में नई उम्मीद जगाई | ऐसे में सभी राजनीतिक विचारधारा को मानने वालों ने भयमुक्त होकर वोट किया|
तमिलनाडु के चुनाव परिमाण पाँच वर्षों में सत्ता परिवर्तन के लिए जाने जाते हैं| यहाँ पर मुख्य चुनावी लड़ाई डीएमके और अन्नाद्रमुक के बीच होती रही है| इस चुनाव में डीएमके जहां सत्ता विरोधी हवा झेल रही है| अन्नाद्रमुक जयललिता जैसी करिश्माई नेता की कमी से जूझ रही है| दोनों ही मुख्य दलों का पुराना जादू नदारद है| चुनाव में पावर ब्रांड एक्टर विजय और उनकी पार्टी टीवीके भी मैदान में है| विजय पहली बार राजनीतिक के अखाड़े में किस्मत आजमा रहे हैं| कुछ एग्जिट पोल में अनुमान है कि टीवीके परिणामों में सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। ऐसा हुआ तो इतिहास में पहली बार तमिलनाडु में त्रिशंकु विधान सभा होगी| ऐसे में जनता पहली बार दो मुख्य दलों के बीच हो रही सत्ता की अदला- बदली पर रोक लगा देगी| दूसरी ओर पहली बार चुनाव लड़ने वाले नए- नवेले दल के हाथों में सत्ता की चाभी सौंप देगी| पश्चिम बंगाल में भयमुक्त होकर मनचाहे राजनीतिक दल को वोट करने वाले मतदाता लोकतन्त्र की नई इबारत लिखेंगे| चार मई को पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम भारतीय लोकतन्त्र की शक्ति का अहसास कराएंगे|

