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भाषिणी : शुरू से अंत तक एआई सक्षम बनाने का भाषा प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय केन्द्र

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) के तहत डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (डीआईबीडी) ने भाषिणी प्लेटफॉर्म पर ‘सर्वम’ जैसे ओपन-सोर्स मॉडल सहित उन्नत एआई मॉडल की उपलब्धता को सक्षम किया है जिससे कुल आबादी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम बनाने और तैनात करने की भारत की क्षमता और अधिक मजबूत हुई है। मात्रा के हिसाब से दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के एआई सिस्टम में से एक के रूप में, भाषिणी का ‘नेशनल हब फॉर लैंग्वेज टेक्नोलॉजीज’ (एनएचएलटी) भारत के पहले पूर्ण वेंडर और क्लाउड-एग्नोस्टिक ‘एआई सॉवरेन क्लाउड’ पर संचालित होता है। यह पूर्ण डेटा अधिकार, उच्च-प्रदर्शन मापनीयता और अत्यधिक लचीलापन सुनिश्चित करता है। मजबूत ओपन-सोर्स ऑर्केस्ट्रेशन फ्रेमवर्क का लाभ उठाने वाली एक विशेष एमएलओपी पाइपलाइन द्वारा संचालित, यह प्लेटफॉर्म 350 से अधिक गहराई से अनुकूलित मॉडलों के एक विशिष्ट इकोसिस्टम का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करता है। यह बुनियादी ढांचा 500 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को निर्बाध रूप से शक्ति प्रदान करता है और एनवीआईडीआईए के एनवीसीएफ का उपयोग करते हुए प्रतिदिन 15 मिलियन (1.5 करोड़) से अधिक इन्फरेंस को प्रोसेस करता है, जो कुल मिलाकर 6 बिलियन (600 करोड़) इन्फरेंस को पार कर चुका है। यह सब ‘सब-सेकंड’ (एक सेकंड से भी कम) रिस्पॉन्स टाइम को बनाए रखते हुए किया जाता है। विदेशी हाइपरस्केलर्स से स्वतंत्र एक सुरक्षित और अत्यधिक स्केलेबल आधार तैयार करके, भाषिणी 20 से अधिक विशिष्ट एनएलपी सेवाओं का एक अद्वितीय समूह करती है, जैसे कि स्वचालित भाषा पहचान, स्पीकर डायराइजेशन और कीवर्ड स्पॉटिंग। ये सेवाएँ 36 लिखित और 23 वॉयस भाषाओं में उपलब्ध हैं, जिनमें जटिल जनजातीय बोलियों के साथ-साथ 35 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय भाषाएँ शामिल हैं।

तकनीकी दृष्टिकोण से, भाषिणी का ‘मॉडल आर्किटेक्चर’ भारतीय भाषाई परिदृश्य की जटिल वाक्य-रचना और उसकी ध्वनि संबंधी वास्तविकताओं के प्रबंधन में असाधारण गहराई प्रदर्शित करता है। यह सिस्टम उन्नत न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन (एनएमटी) के माध्यम से पुरानी ‘पाइपलाइनों’ को बाधित  करता है, जो सीधे भारतीय भाषा-से-भारतीय भाषा प्रोसेसिंग करता है। यह हिंदी पर मुख्य आधार के रूप में गणनात्मक रूप से अक्षम निर्भरता को समाप्त करता है। इसके पूरक के रूप में, इसका स्वचालित वाक् पहचान (एएसआर) इकोसिस्टम विशाल और पूर्णतः ओपन-सोर्स डेटासेट पर कड़ाई से प्रशिक्षित है, जो वास्तविक दुनिया के भाषण के लिए पारदर्शिता, समुदाय-संचालित मजबूती और अत्यधिक सटीक ध्वनि संबंधी मॉडलिंग सुनिश्चित करता है। एएसआर फ्रेमवर्क एक परिष्कृत टेक्स्ट-टू-स्पीच (टीटीएस) स्टैक के साथ निर्बाध रूप से जुड़ा है, जिसमें हाइब्रिड सीटीसी-आरएनएनटी डिकोडर्स, फास्टपिच ध्वनि संबंधी मॉडलिंग और हाईफाई-जीएएन वी1 वोकोडर्स शामिल हैं। अनुकूलित ‘डीनोइज़र’ और संदर्भ-अवगत टेक्स्ट नॉर्मलाइजेशन (टीएन) और इनवर्स टेक्स्ट नॉर्मलाइजेशन (आईटीएन) से सुसज्जित, यह ‘एंड-टू-एंड’ पाइपलाइन बेजोड़ सटीकता प्रदान करती है। यह विशेषताएँ भाषिणी को श्रेष्ठ एआई के क्षेत्र में एक तकनीकी रूप से अपराजेय और विशिष्ट पावरहाउस के रूप में स्थापित करती हैं।

‘सर्वम’ जैसे ओपन-सोर्स फाउंडेशन मॉडलों को एकीकृत करके, भाषिणी प्लेटफॉर्म भारत के ‘जनसंख्या-स्तर के भाषाई डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे’ (डीपीआई) के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करता है। यह डेवलपर्स, स्टार्टअप्स, सरकारी संस्थानों और उद्यमों के लिए एक पूर्ण एंड-टू-एंड एआई इकोसिस्टम प्रदान करता है। यह प्लेटफॉर्म वास्तविक दुनिया के उपयोग के मामलों का समर्थन करता है, जिनमें बहुभाषी संवादात्मक सहायक, नागरिक सेवा प्लेटफॉर्म, शासन इंटरफेस, ज्ञान पहुँच प्रणाली और डिजिटल सार्वजनिक सेवा अनुप्रयोग शामिल हैं। साथ ही, यह आबादी की बड़े स्तर पर तैनाती को सक्षम बनाता है।

डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन के सीईओ अमिताभ नाग ने कहा: “भाषिणी को एक पूर्णतः एंड-टू-एंड एआई इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ मॉडल, बुनियादी ढांचा और एप्लिकेशन एक ही राष्ट्रीय मंच पर मिलते हैं। उन्नत ओपन मॉडल और बड़े पैमाने पर इन्फरेंस क्षमताओं का एकीकरण डेवलपर्स, संस्थानों और नवाचारियों को ऐसे एआई समाधान बनाने, तैनात करने और स्केल करने में सक्षम बनाता है जो विश्वसनीय, सुलभ और जनसंख्या के पैमाने पर वास्तविक दुनिया के उपयोग के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।”

भाषा इंटरफेस फॉर इंडिया (भाषिणी), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत भारत की एक एआई-संचालित भाषा प्रौद्योगिकी पहल है। यह वाक् और पाठ प्रौद्योगिकियों के माध्यम से भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में बहुभाषी एआई क्षमताओं को सक्षम बनाती है। यह पहल साक्षरता और भाषा के अंतर को पाटने में मदद करती है, साथ ही पूरे देश में समावेशी डिजिटल पहुँच को मजबूत करती है।

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