हौसलों की उड़ान से हक के इंकलाब तक
अरविंद जयतिलक महिलाओं को आसमान भर बधाई और मंगल शुभकामनाएं। सिर्फ इसलिए नहीं कि आज उनका दिन है। इसलिए भी नहीं कि वे सृष्टि की निरंतरता की अनवरत व आधारभूत परमतत्व हैं। इसलिए भी नहीं कि उनके आंचल में दूध और आंखों में पानी है। इसलिए भी नहीं कि वे हौसलों की उड़ान से जहान…

