आईआईसीए के पोस्ट ग्रेजुएट इंसॉल्वेंसी प्रोग्राम का आठवां बैच आरंभ
IICA starts 8th batch of Post Graduate Insolvency Programme
नई दिल्ली : केंद्रीय कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स -आईआईसीए ने आज अपना प्रमुख कोर्स- पोस्ट ग्रेजुएट इंसॉल्वेंसी प्रोग्राम -पीजीआईपी का आठवां बैच (2026-28) आरंभ किया। कार्यक्रम में विभिन्न व्यावसायिक पृष्ठभूमियों से आए प्रतिभागियों का स्वागत किया गया और इसमें ऋण शोधन अक्षमता पारितंत्र के प्रतिष्ठित सदस्य, संकाय सदस्य और आईआईसीए के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण -एनसीएलएटी के पूर्व अध्यक्ष और उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने आरंभिक संबोधन में दीवालियापन और ऋण शोधन अक्षमता संहिता, 2016 के परिवर्तनकारी प्रभावों का उल्लेख करते हुए इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इस संहिता ने अलग-अलग कानूनी ढांचे को एक व्यापक ऋण पुनर्भुगतान व्यवस्था से प्रतिस्थापित किया है, जो सात विधायी संशोधनों और कई नियामक सुधारों द्वारा विकसित हुई है। न्यायमूर्ति भूषण ने प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण न्यायिक आदेशों के अध्ययन और निरंतर कानूनी शोध की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक मिसालें दिवालियापन क्षेत्र के प्रत्येक पेशेवर के लिए अत्यावश्यक शिक्षण साधन हैं।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, आईआईसीए के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने पोस्ट ग्रेजुएट इंसॉल्वेंसी प्रोग्राम को संस्थान की प्रमुख क्षमता-निर्माण पहल बताया। उन्होंने कहा कि 2019 में इस पाठयक्रम को आरंभ किए जाने के बाद से भारत के दिवालियापन पारितंत्र के विकास में इसने अग्रणी भूमिका निभाई है। श्री सिंह ने कार्यक्रम में आरंभ किए गए कई नवाचारों का उल्लेख किया जिनमें अनुसंधान, विश्लेषणात्मक कौशल, एआई-आधारित शिक्षण, वित्तीय मॉडलिंग, संरचित वित्त और आचार नीति पर विशेष ध्यान देना शामिल है। नैतिकता को ऋण शोधन अक्षमता पेशे की नींव बताते हुए उन्होंने प्रतिभागियों से अपना ज्ञान निरंतर बढ़ाने और तकनीकी प्रगति के प्रति जागरूक रहने को कहा। उन्होंने कहा कि कोई भी तकनीक सत्यनिष्ठा, सही निर्णय और कड़ी मेहनत का विकल्प नहीं हो सकती। प्रतिभागियों में अकादमिक जिज्ञासा की संस्कृति बढ़ाने के लिए उन्होंने अनुसंधान उत्कृष्टता को संस्थागत मान्यता देने की भी घोषणा की।
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