भातखण्डे दीक्षांत समारोह : मेडल की रेस में छात्राएँ अव्वल
Women shine at Bhatkhande’s 16th convocation
भातखंडे संस्कृति विवि: दीक्षांत समारोह में 255 विद्यार्थियों को उपाधि तथा 48 पदक
लखनऊ : भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के 16वें दीक्षांत समारोह में छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया| उन्होने 60 फीसदी पदकों पर अपना कब्जा जमाया| पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया|
दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को 255 उपाधियाँ तथा 48 पदक प्रदान किये गये। दीक्षांत समारोह में सभी उपाधियों एवं अंक प्रमाण-पत्रों को राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपॉजिटरी पर अपलोड किया गया। इस अवसर पर जनपद गोण्डा की 300 आंगनबाड़ी केन्द्रों को आंगनबाड़ी किट वितरित की गई तथा 300 बालिकाओं का एच0पी0वी0 टीकाकरण कराया गया।
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की ओर से उनका संबोधन विशेष कार्याधिकारी श्री राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ0 सुधीर महादेव बोबडे द्वारा पढ़कर सुनाया गया। अपने संदेश में राज्यपाल महोदया ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के इस पावन मंदिर के 16वें दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होना हर्ष का विषय है। उन्होंने वितरित की गई कुल ’’255 उपाधियों’’ तथा ’’48 मेधावी विद्यार्थियों’’ को प्रदान किए गए पदकों पर सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
राज्यपाल महोदया ने समारोह के मुख्य अतिथि प्रख्यात तबला वादक ’’पंडित कुमार बोस’’ का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अद्वितीय कला से भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्व मंच पर नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। उन्होंने कहा कि 150 से अधिक रिकॉर्डिंग तथा विश्वभर में अनगिनत प्रस्तुतियाँ उनकी बहुआयामी प्रतिभा का प्रमाण हैं। संगीत के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2007 में ’’संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार’’, वर्ष 2012 में ’’दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार’’ सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है। वे भारतीय संगीत परंपरा के सशक्त संवाहक तथा वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति, संगीत और साधना का ऐसा केंद्र है, जहाँ स्वर केवल सीखे नहीं जाते, बल्कि साधे जाते हैं; जहाँ लय केवल समझी नहीं जाती, बल्कि जीवन का अनुशासन बन जाती है; और जहाँ राग केवल गाए नहीं जाते, बल्कि आत्मा की अनुभूति बनकर युगों तक गूँजते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का यह विशिष्ट विश्वविद्यालय भारतीय सांस्कृतिक चेतना का सशक्त संवाहक है।
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विश्व के अनेक देशों से छात्र-छात्राएँ यहाँ भारतीय संगीत एवं नृत्य की विविध विधाओं का अध्ययन करने आते हैं और यहाँ से शिक्षा प्राप्त कर भारतीय संस्कृति के सांस्कृतिक दूत के रूप में विश्वभर में भारत की गौरवशाली परंपरा का गौरव बढ़ाते हैं।
राज्यपाल महोदया ने विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वर सम्राट नौशाद अली, गजल गायक पद्मभूषण तलत महमूद, पद्मश्री अनूप जलोटा तथा पद्मश्री मालिनी अवस्थी जैसी विभूतियों ने इसी विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संगीत और लोक परंपरा का गौरव बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि भारत हजारों वर्षों से प्रवाहित होती ऐसी सनातन सभ्यता है, जिसने समय के प्रत्येक उतार-चढ़ाव को आत्मसात करते हुए स्वयं को निरंतर नवजीवन प्रदान किया है। भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी सीखने, स्वीकार करने और स्वयं को निरंतर परिष्कृत करने की क्षमता रही है। भारत बदलता है, पर अपनी आत्मा को नहीं बदलता तथा आगे बढ़ते हुए भी अपनी जड़ों से कभी अलग नहीं होता।
राज्यपाल महोदया ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई चेतना, नई ऊर्जा और नई दिशा प्राप्त हो रही है। ’’विरासत भी, विकास भी’’ का मंत्र राष्ट्र निर्माण का सशक्त संकल्प बनकर उभरा है। एक ओर विश्व के विभिन्न देशों से भारत की अमूल्य सांस्कृतिक एवं पुरातात्त्विक धरोहरों की सम्मानपूर्वक वापसी हो रही है, वहीं दूसरी ओर मंदिरों, तीर्थस्थलों एवं आध्यात्मिक केंद्रों के समग्र विकास के माध्यम से भारत की सनातन चेतना को नई शक्ति प्राप्त हो रही है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान तभी पूर्ण होता है, जब उसमें संस्कृति का स्पंदन हो। शिक्षा जहाँ मस्तिष्क को प्रकाशित करती है, वहीं संस्कृति हृदय को आलोकित करती है। जिस समाज की संस्कृति जीवित रहती है, उसका भविष्य भी सदैव उज्ज्वल रहता है।
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