राज्यसभा का चुनावी गणित

Droop Quota Formula

Oct 1, 2026 - 16:15
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राज्यसभा का चुनावी गणित

राज्यसभा का चुनावी गणित (Droop Quota Formula) आनुपातिक प्रतिनिधित्व (Proportional Representation) और एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote - STV) पर आधारित होता है। इसमें देश की आम जनता सीधे वोट नहीं देती, बल्कि जनता द्वारा चुने गए राज्यों के विधायक (MLAs) मतदान करते हैं।

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चुनाव जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को एक निश्चित संख्या में वोटों (विधायकों के प्राथमिक वोटों) की आवश्यकता होती है, जिसे 'कोटा' कहा जाता है।

1. वोटिंग और कोटा निकालने का सूत्र (Formula)

राज्यसभा चुनाव में जीत का कोटा तय करने के लिए एक विशेष गणितीय फॉर्मूले का उपयोग किया जाता है:

नोट: गणना को अधिक सटीक बनाने के लिए प्रत्येक विधायक के वोट का मूल्य 100 माना जाता है। इस स्थिति में फॉर्मूला इस प्रकार होता है:

2. एक उदाहरण से समझें

मान लीजिए किसी राज्य में कुल विधायक (MLAs) 100 हैं और वहां राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव होना है।

इस स्थिति में जीत का गणित कुछ ऐसा होगा:

यानी, उस राज्य में एक उम्मीदवार को राज्यसभा सांसद बनने के लिए कम से कम 26 विधायकों के प्रथम वरीयता (First Preference) के वोटों की आवश्यकता होगी।

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3. वोटों की गिनती कैसे होती है? (STV प्रक्रिया)

वरीयता क्रम (Preference Voting): विधायक बैलेट पेपर पर उम्मीदवारों के नाम के आगे अपनी पसंद (1, 2, 3...) लिखते हैं।

प्रथम वरीयता के वोट: सबसे पहले उम्मीदवारों के 'पहली पसंद' (First Preference) वाले वोटों को गिना जाता है। अगर किसी उम्मीदवार को तय कोटे के बराबर या उससे ज्यादा वोट मिल जाते हैं, तो उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है।

वोटों का ट्रांसफर (Transfer of Votes): यदि किसी उम्मीदवार को कोटे से अधिक वोट मिलते हैं, तो उसके अतिरिक्त (Surplus) वोट बैलेट पेपर पर दर्ज 'दूसरी पसंद' के आधार पर अन्य उम्मीदवारों को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।

कम वोट वाले उम्मीदवार का बाहर होना: यदि पहली पसंद के आधार पर सीटें नहीं भर पाती हैं, तो सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को रेस से बाहर कर दिया जाता है और उसके विधायकों के दूसरी पसंद के वोट अन्य उम्मीदवारों के खाते में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कि सभी सीटें भर नहीं जातीं।

इसी पेचीदा गणित के कारण कई बार पार्टियां अपने विधायकों की संख्या बल से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतार देती हैं, जिससे चुनाव में क्रॉस-वोटिंग (सेंधमारी) और रोमांच बढ़ जाता है।

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