आईआईटी ने प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जोड़ा : लोक सभा अध्यक्ष
- आईआईटी दिल्ली में पैन-आईआईटी बुक क्लब की पहली पुस्तक ‘IIT – The Story of India’s Most Prestigious Educational Ecosystem’ का विमोचन
नई दिल्ली : लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज कहा कि तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसी भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आईआईटी संस्थानों ने आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ाया है। पुस्तक ‘IIT – The Story of India’s Most Prestigious Educational Ecosystem’ के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि यह पुस्तक आधुनिक भारत के आत्मविश्वास, ज्ञान और राष्ट्र-निर्माण की कहानी है। उन्होंने कहा कि आईआईटी खड़गपुर से शुरू हुई यह यात्रा आज 23 आईआईटी तक विस्तृत हो चुकी है और इनके पूर्व छात्र विश्वभर में नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक का विमोचन भी किया।
श्री बिरला ने कहा कि हिजली निरोध शिविर का आईआईटी खड़गपुर में रूपांतरण संघर्ष से सृजन और पराधीनता से आत्मनिर्भर भारत तक की प्रेरणादायक यात्रा का प्रतीक है। विभिन्न क्षेत्रों और विषयों में आईआईटीयन की प्रेरक उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सफलताएँ भारत की विकास गाथा को प्रतिबिंबित करती हैं।
उन्होंने कहा कि आईआईटी ने भारत में उत्कृष्टता, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व की संस्कृति को विकसित किया है तथा इनके शिक्षकों और पूर्व छात्रों ने उद्योग, अंतरिक्ष अन्वेषण, सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पुस्तक में वर्णित भाखड़ा परियोजना से जुड़े युवा इंजीनियरों का उदाहरण देते हुए श्री बिरला ने कहा कि यह राष्ट्रीय हित, समर्पण और सेवा की प्रेरणा प्रदान करता है।
भारत के ‘ब्रेन ड्रेन’ से ‘ब्रेन गेन’ की ओर बढ़ने का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि यह देश के बढ़ते आत्मविश्वास और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तथा हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व के विस्तृत अवसरों का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार अनुसंधान, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
श्री बिरला ने कहा कि युवा प्रतिभाओं को व्यक्तिगत सफलता की खोज के साथ-साथ राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि इतिहास वही लोग रचते हैं जो जीवन में सुविधा के बजाय चुनौतियों को अपनाते हैं।
श्री बिरला ने विकसित भारत के निर्माण के लिए शैक्षणिक संस्थानों, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत, उद्यमियों और युवाओं की समान भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आईआईटीयन की नई पीढ़ी विज्ञान को सेवा से, नवाचार को राष्ट्रीय हित से और सफलता को सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ते हुए भारत का वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करेगी।

