– डॉ मनीष शुक्ल, वरिष्ठ पत्रकार श्रीधर अग्निहोत्री और डॉ रश्मि कौशल की पुस्तक का विमोचन
– शिल्पायन बुक्स दिल्ली के उमेश शर्मा ने लिया प्रकाशित
– लखनऊ पुस्तक मेले के आयोजक मनोज चंदेल ने कानपुर समेत अन्य शहरों में मेला आयोजित करने का आह्वान किया
लखनऊ| उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने डिजिटल युग में साहित्य लेखन का भविष्य उज्ज्वल बताया| लखनऊ पुस्तक मेले में जाने माने लेखकों की किताबों का विमोचन करते हुए उन्होने युवाओं के तकनीक और साहित्य के संगम को जरूरी बताया| विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि हिन्दी साहित्य आजार अमर है| आज युवा हाथों में साहित्य कि मशाल है जो समाज को रोशन कर रही है| इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कथाकार, व्यंग्यकार व कवि डॉ. मनीष शुक्ल की पुस्तक प्रोफेसर माँ के लाल के साथ ही वरिष्ठ पत्रकार श्रीधर अग्निहोत्री की किताब भुला न देना का विमोचन किया| लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि श्री महाना ने कहा साहित्य का सागर अनंत है| जो आपके जीवन की धारा को सुगम बनाता है| युवाओं को तकनीक के साथ ही साहित्य में बढ़- चढ़ हिस्सा लेना चाहिए| क्योंकि संस्कृति और साहित्य ही समाज को सही दिशा प्रदान करता है| युवा साहित्य कि माशल से समाज को रोशन कर सकते हैं| उन्होने पत्रकार साहित्यकारों से विधान सभा में आने का न्योता दिया! प्रोफेसर माँ के लाल कहानी के लेखक डॉक्टर मनीष ने कहा कि कहानियाँ आपके आसपास बिखरी हुई हैं। बस उनको शब्दों में पिरोने की जरूरत है| प्रोफेसर माँ के लाल भी जीवन में होने वाली घटनाओं से ली गई कहानियों का संग्रह है| श्रीधर अग्निहोत्री ने अपनी किताब भुला न देना के विषय में बताया कि किताब में उन कलाकारों को जिक्र है जो कभी सिनेमा और टीवी के सुपर स्टार थे लेकिन वक्त के साथ उनकी चमक फीकी पड़ गई और वो भुला दिये गए| ये किताब ऐसे ही कलाकारों को याद करती है| इसके साथ ही रश्मि कौशल की किताब महाशून्य का विमोचन हुआ तथा इस अवसर पर शिल्पायन बुक्स द्वारा डॉ मनीष शुक्ल, श्रीधर अग्निहोत्री एवं डॉ रश्मि कौशल को के. पी. शर्मा स्मृति साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर विशिष्ट अतिथि डॉ करुणा पांडे, सिद्धार्थ कलहंस, अलका प्रमोद, रेखा बोरा, डॉक्टर शिल्पी शुक्ला, सुरेश बहादुर सिंह, नवल कान्त सिन्हा, पंचानन मिश्र, मनोज शुक्ल मनुज, राजीव तिवारी, आर्यवर्ती सरोज, गजल गायक सरभजीत सिंह आदि उपस्थित रहे| समारोह के दूसरे सत्र में चर्चित कवियों ने काव्यपाठ किया| लखनऊ पुस्तक मेले के आयोजक मनोज चंदेल ने आभार जताया|