रिज़ीम चेंज की साजिश में दिल्ली का पॉलिटिकल ड्रामा !
political drama
आचार्य संजय तिवारी
दिल्ली, कैपिटल ऑफ इंडिया है। भारत राष्ट्र यहां नहीं है। यह भारत वर्ष को न जानती है, न ही जानना चाहती है। वर्ष 2014 के बाद 12 वर्ष बीत गए, दिल्ली भारत की बजाय इंडिया की राजधानी बनी हुई है। अद्भुत दृश्य है। जंतर मंतर से संसद तक। 20 जुलाई से आज तक। अभी तक बहुत कुछ अपनी आँखों से देखने को मिला। अपने कानों से सुनने को मिला। कोई हाजी है। कोई काजी है। कोई आप का पूर्व योजनाकार है। कोई भीम आर्मी का है। कोई वामी है। कोई SFI का है। कोई मैकेनिक है। कोई कथित इंजीनियर है, डॉक्टर है। कोई तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार गा रहा। कोई राज रहेगा आला का गा रहा। कोई कपड़े उतार कर रील बना रही। कोई मोदी को मौत की मांग कर रहा। कोई संसद को उखाड़ फेंकने के नारे लगा रहा। कोई ब्राह्मणों को इंडिया से बाहर निकालने की मांग कर रहा। कोई मोदी और अमित शाह के मरने की बात कर रहा। कोई हिंदुत्व को जहर बता रहा। कोई महान संत प्रेमानंद जी को भी गलियाँ दे रहा। अभी तक विदेशी मंचों पर सजा हुआ डिसमेटलिज्म ऑफ हिंदुइज्म यहां प्रयोग स्वरूप दिख रहा, जंतर मंतर से संसद तक। विचारे ठगे हुए चंद्रशेखर रावण का अनशन ऐसा किनारे लग गया कि भीम आर्मी की सारी मेहनत पर विपक्ष के सियासी दलों ने कब्जा कर लिया है।
अद्भुत आंदोलन है। यूट्यूबरों की भरमार है। देसी कम विदेशी ज्यादा। देश की मेनस्ट्रीम मीडिया गोदी है। मार खा रही है। यूट्यूबर असली हैं जो एक खास मकसद पर फोकस कर रहे। पंजाब में पेपर लीक पर कोई बात नहीं। नीट के पेपर लीक का बहाना किनारे है। उत्तर प्रदेश में एक शिक्षा मंत्री ने एक बार केवल नकल रोक दी थी। सरकार चली गई। नकल में छूट के आधार पर मुलायम सिंह को सत्ता मिल गई।
यहां बहुत कुछ देखने को मिल रहा। सच में नेपाल और बंगला देश बनाने की पूरी तैयारी दिख रही। अमेरिका से 17 जुलाई को ही फरमान जारी हुआ। बांग्लादेश की इस्लामी पार्टी ने भी पत्र लिख कर आगे आने का आवाहन किया है। 20 जुलाई को सच में संसद जलते जलते बची। 157 सुरक्षाकर्मी बुरी तरह घायल हैं। अभी तक केवल भाषणों में दिखने वाले अर्बन नक्सल आज दिल्ली की सड़कों से संसद तक में दिख रहे।
होड़ मची है क्रेडिट पाने की । लालटोपी वाले आगे चल रहे। रावण की भीड़ और लाभ ले गए केजरीवाल। राहुल ने कल शाम बाजी पलट दी। प्रधानमंत्री आवास पर पहली बार किसी पार्टी और भारत के विपक्ष के नेता ने असली खेल दिखाया। आम आदमी पार्टी बौखला गई। बयान आया कि सब मोदी और राहुल की मिली भगत है। सपा ने तो टीवी स्क्रीन पर कब्जा कर लिए। भाभी जी ने बच्चों के सिर पर हाथ भी फेरा।
लेकिन पुलिस द्वारा पकड़े गए किसी आंदोलनकारी में से एक भी कोई छात्र नहीं निकला। सभी कुछ और ही निकले हैं। यह एक व्यापक तमाशा है जिसे दुनिया में खूब चटखारे लेकर दिखाया जा रहा है। सच यह है कि देश राष्ट्रवाद और अराष्ट्रवाद के धड़ों में ठीक से पहली बार बांटा गया है। विदेशी प्रयास रेजीम चेंज का है। सब कुछ साफ है। रिज़ीम चेंज की साजिश में दिल्ली में चल रहा पॉलिटिकल ड्रामा गंभीर है। सोचिये। देखते जाइए और प्रतीक्षा कीजिए।
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