ज़ेन जी को डिजिटल व्यसन से रोकने के लिए 50 अश्लील ओटीटी प्लेटफॉर्म बंद
Govt Reinforces Safe Digital Ecosystem for Children through Stronger Online Safety, Privacy Protection and Cyber Awareness Measures
ज़ेन जी को डिजिटल व्यसन से रोकने के लिए 50 अश्लील ओटीटी प्लेटफॉर्म बंद
- केंद्र ने 6,650 जागरूकता कार्यशालाओं से 11.37 लाख नागरिकों तक पहुंच बनाई
- आईटी अधिनियम की धारा 67 और 67 ए तथा अन्य कानूनी प्रावधानों में एक्शन
नई दिल्ली : अश्लील वेबसाइट हो फिर ऑन लाइन दिखाए जाने वाला अवैध कंटेन्ट, जेन जी को डिजिटल व्यसन से रोकने के लिए सरकार ने सख्त तेवर अख़्तियार किया है| केंद्र सरकार ने बेहतर ऑनलाइन सुरक्षा, गोपनीयता संरक्षण और साइबर जागरूकता उपायों के माध्यम से बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने के एक्शन प्लान पर अमल किया है| बच्चों सहित सभी उपयोगकर्ताओं के लिए एक खुला, सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह इंटरनेट सुनिश्चित करने के लिए बीते दो वर्षों में 50 से ज्यादा ओटीटी प्लेटफॉर्म बंद कर दिए गए हैं|
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी लोकसभा में दी । उन्होने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 ("आईटी अधिनियम") और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 ("आईटी नियम") ने मिलकर डिजिटल कल्याण, उपयोगकर्ता सुरक्षा और जिम्मेदार डिजिटल भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एक ढांचा स्थापित किया है।
केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा में जानकारी दी कि सरकार 'सूचना सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता (आईएसईए )' पर एक प्रोजेक्ट लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन तैयार करना और आम लोगों के बीच साइबर हाइजीन और साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं के बारे में जागरूकता पैदा करना है। अब तक, देश भर में 6,650 जागरूकता कार्यशालाएँ आयोजित की गई हैं, जिनमें 11.37 लाख से ज़्यादा प्रतिभागी शामिल हुए हैं। इनमें स्कूल/कॉलेज के छात्र, शिक्षक, कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ, सरकारी कर्मचारी और आम जनता शामिल है।
इसके अलावा, कई भाषाओं में जागरूकता सामग्री जैसे हैंडबुक, छोटे वीडियो, पोस्टर, ब्रोशर, बच्चों के लिए कार्टून कहानियाँ आदि प्रकाशित और वितरित की गई हैं। इन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के साथ-साथ www.isea.gov.in और https://staysafeonline.in/ पर उपलब्ध कराया गया है।
सीईआरटी-इन भी अपनी आधिकारिक वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल पर नियमित रूप से सुरक्षा से जुड़े टिप्स, जागरूकता पोस्टर, इन्फोग्राफिक्स और वीडियो शेयर करता है। इसका मकसद इंटरनेट यूज़र्स को साइबर सुरक्षा हमलों और धोखाधड़ी के बारे में जागरूक करना है, जिसमें बच्चों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं। शिक्षा मंत्रालय ने जुलाई 2020 में डिजिटल शिक्षा पर 'प्रज्ञता' दिशानिर्देश जारी किए। ये दिशानिर्देश सुरक्षित और प्रभावी ऑनलाइन लर्निंग के लिए एक रूपरेखा प्रदान करते हैं, जिसमें छात्रों की भलाई को बढ़ावा देना और सोशल मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करना शामिल है।
सीबीएसई ने इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए डिजिटल शिष्टाचार पर दिशानिर्देश, शिक्षकों के लिए साइबर-सुरक्षा प्रशिक्षण, 'साइबर सुरक्षा हैंडबुक' का प्रकाशन और साइबर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों को साइबर क्लब स्थापित करने की सलाह जैसे कदम उठाए हैं।
एनसीईआरटी ने अपने पाठ्यक्रम में साइबर सुरक्षा को भी शामिल किया है, जिसमें कक्षा 11 और 12 के लिए "सामाजिक प्रभाव" पर एक अध्याय शामिल है। साथ ही, सीआईईटी - एनसीईआरटी ने साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी और संसाधन सामग्री तैयार कर उनका प्रसार किया है।
मध्यस्थों की जिम्मेदारियां :
आईटी नियमों के तहत मध्यस्थों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने कर्तव्यों का पालन करते समय उचित सावधानी बरतें और कंप्यूटर संसाधनों के उपयोगकर्ताओं को सूचित करें कि वे ऐसी कोई भी जानकारी होस्ट, प्रदर्शित, अपलोड, संशोधित, प्रकाशित, प्रसारित, अपडेट या साझा न करें जो बच्चों के लिए हानिकारक हो या उस समय लागू किसी कानून का उल्लंघन करती हो।
नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आईटी नियमों में हालिया संशोधन :
आईटी नियमों में हालिया संशोधनों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों के लिए यह अनिवार्य है कि वे सक्षम क्षेत्राधिकार वाले न्यायालय के आदेश या उपयुक्त सरकार या उसकी एजेंसी से प्राप्त तर्कसंगत सूचना मिलने के तीन घंटे के भीतर गैर-कानूनी सामग्री को हटा दें।
डेटा संरक्षण :
इसके अलावा, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 ("डीपीडीपी अधिनियम") लागू किया गया है, जो डिजिटल व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) को विनियमित करने के लिए कानूनी ढांचा स्थापित करता है। डीपीडीपी अधिनियम ऑनलाइन बच्चों की गोपनीयता की सुरक्षा के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
यह बच्चों के व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के लिए माता-पिता की सहमति को अनिवार्य बनाता है और उनके कल्याण के लिए हानिकारक प्रथाओं, जैसे कि ट्रैकिंग, व्यवहार संबंधी निगरानी या बच्चों के लिए लक्षित विज्ञापन, पर रोक लगाता है।
ऑनलाइन मनी गेमिंग पर रोक :
ऑनलाइन गेमिंग को बढ़ावा देने और विनियमित करने का अधिनियम, 2025, युवाओं में डिजिटल लत और वित्तीय नुकसान की समस्या से निपटने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
हानिकारक कंटेंट को रोकना :
आईटी अधिनियम , 2000 की धारा 79(3)(b) में इंटरमीडियरीज़ (मध्यस्थों) को गैर-कानूनी कंटेंट हटाने या उसका एक्सेस बंद करने के लिए नोटिफ़िकेशन भेजने का प्रावधान है। शिकायतों के आधार पर, सरकार ऐसे इंटरमीडियरीज़ और ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म के खिलाफ़ नियमित रूप से कार्रवाई करती है। सरकार ने पिछले दो सालों में अश्लील कंटेंट दिखाने और आईटी एक्ट की धारा 67 और 67 ए, बीएनएस की धारा 294 और महिलाओं के अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4 का उल्लंघन करने के कारण भारत में 50 ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म का पब्लिक एक्सेस बंद कर दिया है।
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