Latest news :

भाषाओं की डिजिटल खाई पाटने में ‘भाषिनी’ का अहम योगदान

  • ल्पसंख्यक भाषा एआई परिवेश को आगे बढ़ाने के लिए कार्यशाला

नई दिल्ली : एआई आधारित नवाचार के माध्यम से अल्पसंख्यक भाषाओं के संरक्षण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया|  ‘गुरुमुखी भाषा संरक्षण और डिजिटल एआई मॉडल विकास’ पर ‘भाषिनी’ संचालन/सेवा कार्यशाला दिल्ली विश्वविद्यालय के एसजीटीबी खालसा कॉलेज में आयोजित की गई। इस कार्यशाला का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग द्वारा एसजीटीबी खालसा कॉलेज के सहयोग से किया गया था। कार्यशाला में गुरुमुखी लिपि पर विशेष बल दिया गया।  गुरुमुखी पंजाबी भाषा और साहित्य का अभिन्न अंग है और विशेष रूप से सिख परंपराओं और शास्त्रों में गहरा सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखती है। एआई इकोसिस्टम में एक भाषा संसाधन के रूप में, गुरुमुखी को डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाओं में प्रभावी ढंग से एकीकृत करने के लिए डिजिटलीकरण, डेटासेट निर्माण और भाषाई सत्यापन  में व्यवस्थित प्रयासों की आवश्यकता है। यह पहल अल्पसंख्यक और परंपरागत भाषाओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में सहायता करने के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।

कार्यशाला में एसजीटीबी खालसा कॉलेज के प्रिंसिपल, प्रो. गुरमोहिंदर सिंह ने कार्यक्रम में इस बात पर जोर देते हुए कहा, “भारतीय भाषाओं में डिजिटल खाई को पाटने में ‘भाषिनी’ अत्यधिक योगदान देगी। हम, एसजीटीबी खालसा कॉलेज में, गुरुमुखी अनुप्रयोगों में योगदान देने के लिए इस टीम के साथ दीर्घकालिक सहयोग करेंगे।”

एसजीटीबी खालसा कॉलेज ने एक प्रमुख शैक्षणिक और ज्ञान साझीदार के रूप में अपना योगदान दिया। कॉलेज ने भाषा के एआई के क्षेत्र में की जा रही पहलकदमियों में भाषाई सटीकता और सांस्कृतिक संदर्भ सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता और संस्थागत सहायता प्रदान की। यह सहयोग अल्प-संसाधन और विरासत भाषाओं के लिए अनुसंधान, ज्ञान विकास और इकोसिस्टम-निर्माण को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

कार्यशाला के दौरान, डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग के वरिष्ठ महाप्रबंधक, श्री शैलेंद्र पाल सिंह ने भारतीय भाषाओं के माध्यम से ज्ञान प्रणालियों और डिजिटल सेवाओं तक समावेशी पहुंच को सक्षम करने के लिए एआई का लाभ उठाने के महत्व पर जोर दिया और गुरुमुखी के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट और मजबूत भाषा मॉडल बनाने में शैक्षणिक संस्थानों और भाषा समुदायों की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला में लक्षित डेटा संग्रह, सत्यापन ढांचे और समुदाय संचालित भागीदारी के माध्यम से गुरुमुखी भाषा के लिए एआई मॉडल के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया। कार्यक्रम में गुरुमुखी की भाषाई और सांस्कृतिक प्रासंगिकता पर सत्र आयोजित किये गए थे। साथ ही संरचित डेटा गुणवत्ता फ्रेमवर्क द्वारा समर्थित टेक्स्ट कॉर्पोरा, ऑडियो रिकॉर्डिंग और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण जैसे डेटासेट आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा हुई। कुशल वक्ताओं द्वारा संरचित डेटा योगदान और समुदाय के नेतृत्व वाले सत्यापन को सक्षम करने के लिए ‘भाषादान’  प्लेटफॉर्म का एक व्यापक विवरण भी प्रस्तुत किया गया।

कार्यशाला के हिस्से के रूप में, ‘भाषिनी’  टीम ने अपनी प्रमुख भाषा एआई प्रौद्योगिकियों और अनुप्रयोगों का लाइव प्रदर्शन किया, जिसमें टेक्स्ट, स्पीच और दस्तावेज़ के क्षेत्र में बहुभाषी क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। इन प्रदर्शनों में पाठ-से-पाठ का अनुवाद, स्पीच रिकग्निशन (आवाज़ की पहचान), ऑप्टिकल कैरेक्टर पहचान  और बहुभाषी टूल शामिल थे। साथ ही शासन, शिक्षा और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में इनके उपयोग के उदाहरण भी प्रस्तुत किए गए।

इन प्रदर्शनों और चर्चाओं में रीयल-टाइम इन्फरेंसिंग, स्केलेबल परिनियोजन और एपीआई-आधारित एकीकरण क्षमताओं पर प्रकाश डाला गया। इसने बहुभाषी पहुँच, समावेशन और डिजिटल सशक्तिकरण को सक्षम करने वाले एक राष्ट्रीय मंच के रूप में ‘भाषिनी’  की भूमिका को और सुदृढ़ किया है।  साथ ही, यह शैक्षणिक संस्थानों और भाषा समुदायों के साथ सहयोगात्मक इकोसिस्टम को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों को भी दर्शाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *