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लन्दन- अमेरिका तक ‘एशा’ के आयुर्वेद की धूम

एशा वेलनेस के स्थापना दिवस पर डॉ मधुर रे ने हजारों वर्ष पुराणी आरोग्य पद्धति से रू- ब- रू कराया   चार हजार वर्षों से भी अधिक प्राचीन और समृद्ध आरोग्य संपदा को संजोना और वैज्ञानिक मानकों पर खरा उतार कर जन सामान्य के स्वास्थ्य के लिए उपलब्ध कराना भले ही चुनौती भरा कार्य हो…

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अम्बेडकर दर्शन मौजूदा समय में ज्यादा आवश्यक

डॉ आलोक चांटिया अखिल भारतीय अधिकार संगठन आज भारतीय संविधान के शिल्पी डाक्टर अम्बेडकर की जन्म जयंती है| माता- पिता की 14 संतानों में से एक डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल को मनाने का संकल्प राजनीतिक फैसले से कहीं बढ़कर है| जहाँ सिर्फ ये भावना नहीं होनी चाहिए कि अन्य राजनेताओं का…

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इतिहास के सबसे काले दिनों में शुमार जलियावाला बाग़ हत्याकांड

साल 1919, दिन 13 अप्रैल, जगह अमृतसर का जलियावाला बाग़| वैसाखी के दिन यहाँ पर जनसभा के लिए हजारों लोग जुटे थे| तभी ब्रिगेडियर जनरल रेजिनोल्ड दायर ने फायरिंग का आदेश दे दिया| जिसके बाद पूरा पार्क हरे की जगह लाल हो गया| यहाँ स्थित कुआँ लाशों से भर गया| आज भी इतिहास के सबसे…

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हिन्दी सिनेमा के पहले सुपरस्टार- गायक के एल सहगल

लेखक : दिलीप कुमार जब दिल ही टूट गया, हम जी कर क्या करेंगे” ये गीत टूटे हुए आशिकों के म्यूजिक प्ले लिस्ट में या फिर गुनगुनाते हुए सुना जा सकता है. यह गीत 72 साल पहले हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार सहगल साहब ने गया था. आम तौर पर ऐसी महान जिन्दगियों के बारे…

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यूक्रेन ने माना भारत को विश्व गुरु

दुनियां में भारत की बढती साख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रूस और यूक्रेन जैसे दो धुर विरोधी शत्रु देश शांति के लिए भारत पर विश्वास जता रहे हैं| रूस और भारत जहाँ दो मजबूत साझीदार बने हैं| वहीँ यूक्रेन मदद के लिए भारत का साथ मांग रहा है| इस समय…

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यूपी में बजा नगर निकाय चुनाव का बिगुल

उत्तर प्रदेश में आरक्षण को लेकर लम्बे विवाद और इंतजार के बाद आखिरकार नगर निकाय चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया गया है| प्रदेश में दो चरणों में मतदान होगा| प्रथम चरण के लिए चार मई और दूसरे चरण के लिए 11 मई को वोटिंग होगी| 13 मई को परिणाम घोषित कर दिया जाएगा|…

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एकबार फिर सुप्रीम कोर्ट ने बुलंद की देश की आवाज

आर्टिकिल 19 A यानी अभिव्यक्ति की आजादी हमेशा ही बहस का मुद्दा रही है| जहाँ एक ओर कहा गया है दूसरे की नाक शुरू होते ही आपके बोलने की आजादी समाप्त हो जाती है| वहीँ ‘बोल के लब  आजाद हैं तेरे’ जैसे नारों के जरिये क्रांति की नई अलख जगाई जाती है| देश में सुप्रीम…

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रोमांटिक फ़िल्मों के ब्लाक बस्टर फ़िल्मकार… शक्ति सामंत

लेखक : दिलीप कुमार हिन्दी सिनेमा की रोमांटिक फ़िल्मों का सृजनकार जो खुद सिल्वर स्क्रीन पर अपनी अदाकारी का जादू बिखेरना चाहते थे, लेकिन नियति ने उन्हें फ़िल्मकार बना दिया. शक्ति सामंत ने खुद भी नहीं सोचा होगा जो खुद स्टार बनना  चाहते थे, वो खुद स्टार मेकर बन गए.  फ़िल्मों का अपना व्यावसायिक दर्शक…

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“सिनेमा की अनोखी दास्ताँ सुचित्रा सेन”

लेखक : दिलीप कुमार हिन्दी सिनेमा की दुनिया जितनी विचित्र है, सिनेमा की दुनिया के लोग भी थोड़ा अज़ीब ही है. हिन्दी सिनेमा में एक ऐसी ही अदाकारा सुचित्रा सेन हुईं हैं, जो अपनी अनोखी लाइफस्टाइल के लिए याद की जाती हैं. सुचित्रा सेन के बिना हिन्दी सिनेमा की दुनिया कभी पूरी ही नहीं हो…

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75 सालों में बदल गई है बीमारी की परिभाषा

लेखक डॉ आलोक चांटिया अखिल भारतीय अधिकार संगठन 1948 से संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुषांगिक संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन हर वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस मना रहा है और यह आज की वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में जानना अत्यंत आवश्यक है कि आपने 1948 के संविधान में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्य की जो परिभाषा बीमारी और…

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