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आदिपुरूष जैसा सिनेमा आने वाली पीढ़ी के लिए घातक

चंद्रभूषण सिंह

लेखक फिल्म अभिनेता, निर्देशक व चर्चित नाटककार हैं

जब तक आप अपनी संस्कृति का संरक्षण नहीं करेंगे । तब तक आप के साहित्य को, संस्कृति को तोड़ा जाएगा, मोड़ा जाएगा और उस को वहाँ तक ख़त्म करने और परिवर्तन करने की कोशिश की जाएगी , जहां तक आप की सहिष्णुता ख़त्म न हो जाए । फिलहाल कुछ ऐसी ही साजिश हो रही है फिर चाहे इतिहास में औरंगजेब और टीपू सुलतान का महिमामंडान हो या फिर आदि पुरूष जैसी फिल्म के जरिये हिन्दू आस्था पर चोट की जाए|

हमें समझना होगा कि ये महज एक फिल्म या इतिहास का चरित्र चित्रण भर नहीं है| ये टन तक होगा, जब तक आपकी संस्कृति कि ऐसीकी तैसी न हो जाये । आने वाली पीढ़ी को कैसे बदला जाये ।ऐसे प्रयास किए जा रहे है । काल्पनिक को अकल्पनिक कैसे बनाया जाये ।

लेकिन साजिशकर्ताओं को पता नहीं है हिंदू सनातन संस्कृति का जन्म अहिंसा और सत्य पर आधारित है । यहाँ पर जो विलन भी है वो भी पूजा जाता है । उस का सम्मान होता है । हिंदू सनातन एक सभ्य व भव्य संस्कृति है जो अपने चिरकाल की सभ्यता पर आधारित है । जो सभ्यता विज्ञान से भी परे है । इसलिए यदि आप अपनी संस्कृति व साहित्य को किसी भी अज्ञानी के हाँथ में देंगे तो वो आपके समाज को ही ख़त्म करने की चेष्टा करेगा । सृजन और कलात्मकता का यदि सत्य और सही प्रयोग करना है तो किसी भी साहित्य के मूल को पकड़ कर करना चाहिए । हिंदू सनातन संस्कृति करोडो वर्षों के वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित है । त्याग और तपस्या पर आधारित है । आदिपुरुष जैसे सिनेमा यदि आपके आने वाली पीढ़ी के लिए घातक है । ये आप के स्थापित समाज और आदर्शों का ख़त्म करने का विदेशी कुकृत्य कर रहे है । श्रीराम जी हमारे आदर्श है । रामायण व महाभारत महाग्रंथ हमारा समाज है । यदि आपके समाज की कोमलता व सभ्यता पर कोई अक्रान्त आक्रमण कर रहा है । तो आपको और जागरूक और जागृत होने की ज़रूरत है । और आपको ऐसे कंटेंट का विरोध करने की ज़रूरत है । ये आपके मूल को खंडित करने की कोशिश की जा रही है । इसलिए आप सजग रहे ।

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