कैंसर, मधुमेह और मोटापे के खिलाफ जन आंदोलन का आह्वान

Calls for Mass Public Movement Against Cancer, Diabetes and Obesity

Jul 20, 2026 - 11:32
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कैंसर, मधुमेह और मोटापे के खिलाफ जन आंदोलन का आह्वान

-          केंद्रीय मंत्री का शीघ्र निदान, सही चिकित्सा सलाह और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य का आग्रह  

-          डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में गलत सूचनाओं की जगह साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य जागरूकता को प्राथमिकता देनी चाहिए

नई दिल्ली : सामाजिक और राजनैतिक आंदोलन की तरह अब स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर आंदोलन चलाने का समय आ गया है| रोज़मर्रा की आपाधापी और तनाव भरी ज़िंदगी में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से आम आदमी को जकड़ रही हैं| ऐसे में कैंसर, मधुमेह, मोटापा और अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन की जरूरत है|

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कैंसर, मधुमेह, मोटापा और अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का आह्वान करते हुए कहा कि कैंसर, मधुमेह, मोटापा और अन्य गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए भारत की प्रतिक्रिया अस्पतालों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह शीघ्र निदान, सही चिकित्सा सलाह और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा पर केंद्रित एक जन आंदोलन बनना चाहिए।

मंत्री ने कहा कि आज देश को न केवल जागरूकता की कमी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि व्यापक स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है, जिससे विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए वैज्ञानिक संचार और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य संचार पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह, कैंसर से उबर चुके, प्रख्यात वैज्ञानिक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अखिलेश गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘अनब्रोकन: माय बैटल विद कैंसर एंड द विल टू लीड’’ के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में प्रख्यात चिकित्सा पेशेवर, शिक्षाविद और वैज्ञानिक समुदाय के सदस्य, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, शोधकर्ता और वैज्ञानिक समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे, जो कैंसर पर विजय प्राप्त करने के बाद डॉ. गुप्ता की असाधारण दृढ़ता और संघर्ष की सराहना करने के लिए एकजुट हुए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पुस्तक को महज एक व्यक्तिगत संस्मरण से कहीं अधिक बताते हुए कहा कि यह साहस, दृढ़ता, ईमानदारी और विज्ञान में अटूट विश्वास की एक असाधारण यात्रा का वर्णन करती है। उन्होंने पुस्तक को पूर्ण रूप से पढ़ने के बाद कहा कि यह न केवल गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रोगियों के लिए बल्कि डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, प्रशासकों और युवा पेशेवरों के लिए भी महत्वपूर्ण जागरूकता प्रदान करती है, यह दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प और सही चिकित्सा मार्गदर्शन किस प्रकार विपरीत परिस्थितियों को प्रेरणा में बदल सकते हैं।

मोटापे और अस्वस्थ जीवनशैली के बढ़ते प्रचलन पर चिंता व्यक्त करते हुए मंत्री ने कहा कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल को व्यक्तिगत पसंद के बजाय राष्ट्रीय आदत बनाना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि भारत को जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम करना है, तो संतुलित पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच दैनिक जीवन का अभिन्न अंग होना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि आज देश को न केवल स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के व्यापक प्रसार की आवश्यकता है, बल्कि पोषण, आहार और रोग प्रबंधन से संबंधित गलत सूचनाओं के प्रसार पर रोक लगाने की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अप्रमाणित सलाह और मिथक वैज्ञानिक दावे अक्सर उचित उपचार में देरी करते हैं और रोगियों को समय पर योग्य स्वास्थ्य पेशेवरों से संपर्क करने से हतोत्साहित करते हैं। उन्होंने वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया ताकि नागरिक अपने स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेते समय साक्ष्य-आधारित चिकित्सा सलाह पर भरोसा कर सकें।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने संबोधन के समापन में कहा कि स्वस्थ जनसंख्या के बिना 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, नियमित स्वास्थ्य जांच को प्रोत्साहित करने, वैज्ञानिक जागरूकता को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं को दूर करने में मदद करने के द्वारा कैंसर, मधुमेह, मोटापा और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बीमारियों की रोकथाम केवल सरकारों या डॉक्टरों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक साझा राष्ट्रीय जिम्मेदारी है जिसके लिए समाज के हर वर्ग की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।

 

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