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भारत-यूरोपीय संघ मिलकर विकसित करेंगे सुगम नवाचार इकोसिस्टम

  • व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्रौद्योगिकियों पर दूसरी कार्यशाला
  •  मानकीकरण, स्मार्ट और द्विदिशात्मक चार्जिंग, मेगावॉट चार्जिंग प्रणाली और वायरलेस चार्जिंग पर उन्नत सहयोग

नई दिल्ली : भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) के हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी कार्य समूह-2 के तत्वावधान में, भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) के अंतर्गत 15 से 17 मार्च 2026 तक इटली के इस्त्रा में संयुक्त अनुसंधान केंद्र (जेआरसी) में विद्युत वाहन (ईवी) चार्जिंग प्रौद्योगिकियों पर दूसरी भारत-यूरोपीय संघ कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (ओपीएसए) और यूरोपीय आयोग के अनुसंधान एवं नवाचार महानिदेशालय (डीजी आरटीडी) द्वारा संयुक्त रूप से यूरोपीय आयोग के संयुक्त अनुसंधान केंद्र (जेआरसी), ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) और भारत में यूरोपीय संघ प्रतिनिधिमंडल के सहयोग से किया गया।

भारत और यूरोपीय संघ भारत-यूरोपीय संघ टीटीसी के अंतर्गत अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर रहे हैं, जिसमें हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में बढ़ता सहयोग सतत गतिशीलता, सुगम नवाचार इकोसिस्टम और भविष्य के लिए तैयार औद्योगिक साझेदारियों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

इस कार्यशाला में भारत और यूरोपीय संघ के नीति निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ, मानक निकाय, परीक्षण और अनुसंधान संस्थान तथा उद्योग प्रतिनिधि एक साथ एकत्र हुए और सामंजस्यपूर्ण, अंतरसंचालन तथा भविष्य के लिए तैयार इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इकोसिस्टम विकसित करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में नीति और मानकों पर नवीनतम जानकारी, उद्योग के रणनीतिक दृष्टिकोण, मेगावॉट चार्जिंग प्रणाली, वाहन-से-ग्रिड एकीकरण और द्विदिशीय चार्जिंग तथा वायरलेस विद्युत स्थानांतरण पर तकनीकी सत्र, साथ ही जेआरसी की इलेक्ट्रिक वाहन और स्मार्ट ग्रिड परीक्षण सुविधाओं का अवलोकन शामिल था।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय में सलाहकार/वैज्ञानिक-‘जी’ डॉ. राकेश कौर ने अपने आरंभिक संबोधन में, स्वच्छ गतिशीलता परिवर्तन के लिए विश्वसनीय, अंतरसंचालन और भविष्य के लिए तैयार चार्जिंग इकोसिस्टम बनाने में भारत-यूरोपीय संघ के सहयोग के महत्व पर बल दिया। डीजी आरटीडी ईसी की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग इकाई की प्रमुख सुश्री निएनके बुइसमैन और जेआरसी के वरिष्ठ इकाई प्रमुख डॉ. क्रिश्चियन थील ने भी सतत और संयोजी गतिशीलता प्रणालियों की ओर परिवर्तन का समर्थन करने के लिए अनुसंधान, नवाचार, मानकों और परीक्षण में भारत-यूरोपीय संघ के गहन सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला में रणनीतिक और तकनीकी विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला पर चर्चा की गई। इनमें भारत और यूरोप में अनुसंधान, मानकों और विधायी ढाँचों में हुए विकास; चार्जिंग अवसंरचना की उभरती आवश्यकताएँ; ओपन चार्ज प्वाइंट प्रोटोकॉल (ओसीपीपी) सहित संचार और अंतरसंचालन प्रोटोकॉल; सामंजस्यपूर्ण चार्जिंग समाधानों पर उद्योग के दृष्टिकोण; भारी वाहनों के लिए मेगावॉट चार्जिंग प्रणाली (एमसीएस) के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानकों की स्थिति और कार्यान्वयन मार्ग; वाहन-से-ग्रिड (वी2जी) एकीकरण और बहु-ब्रांड अंतरसंचालनीयता; वाहन-से-ग्रिड संचार के लिए हाल ही में प्रकाशित आईएसओ 15118-21 अनुरूपता परीक्षण योजना; और वायरलेस विद्युत हस्तांतरण (डब्ल्यूपीटी) चार्जिंग प्रणाली पर चल रहे पूर्व-मानक अनुसंधान शामिल थे।

प्रतिभागियों ने जेआरसी इस्प्रा में स्थित यूरोपीय ईवी और स्मार्ट ग्रिड अंतरसंचालनीयता केंद्र का भी अवलोकन किया, जिसमें अंतरसंचालन परीक्षण प्रयोगशाला, ईएमसी परीक्षण प्रयोगशाला वीईएलए-9, कोल्ड/वार्म ई-मोबिलिटी परीक्षण प्रयोगशाला वीईएलए-8, स्मार्ट ग्रिड परीक्षण प्रयोगशाला और जेआरसी का अर्ध-सार्वजनिक चार्जिंग क्षेत्र शामिल था। इस दौरे से डेटा-आधारित, पूर्व-मानक अनुसंधान और ईवी चार्जिंग तथा स्मार्ट ग्रिड एकीकरण के लिए विश्वसनीय परीक्षण में सहायक उन्नत सुविधाओं का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।

कार्यशाला का समापन डॉ. कौर और सुश्री बुइसमैन के नेतृत्व में एक समापन सत्र के साथ हुआ; इसमें एआरएआई के निदेशक डॉ. रेजी मथाई; जेआरसी की उप प्रमुख डॉ. लिलियाना पासेनिक और परियोजना प्रमुख डॉ. हेराल्ड स्कोल्ज़ ने भाग लिया। इस सत्र में भारत और यूरोपीय संघ के बीच तकनीकी सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और हितधारकों की सहभागिता को मज़बूत करने के साझा विचार की पुष्टि की गई, ताकि ईवी चार्जिंग मानकों को सामंजस्यपूर्ण बनाया जा सके और सतत गतिशीलता समाधानों को बढ़ावा दिया जा सके। कार्यशाला में वैश्विक स्तर पर अंतरसंचालन, सुरक्षित और सुगम स्वच्छ गतिशीलता इकोसिस्टम को सक्षम बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाया गया। कार्यशाला में योगदान देने वाले अन्य अधिकारियों और विशेषज्ञों में डॉ. हफ़्सा अहमद, वैज्ञानिक-‘डी’, ओपीएसए; श्री अभिजीत मुलाय, उप निदेशक, एआरएआई; श्री नीतीश कुमार जैन, भारतीय मानक ब्यूरो; सुश्री एलेक्जेंड्रा क्लेन्के और सुश्री मरीना कौसौलिडौ (डीजी मूव); और श्री एंटोनियो मार्केज़ कैमाचो, डीजी आरटीडी शामिल थे। कार्यशाला में टाटा मोटर्स, फ्राउनहोफर सोसाइटी, ओपन चार्ज एलायंस, भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माता समिति, स्कैनिया/ट्रैटन, इंडस्ट्रियल व्हीकल्स कॉर्पोरेशन (आईवीईको)/टाटा, एसेआ ब्राउन बोवेरी (एबीबी), एल्पिट्रोनिक, आर्गोन नेशनल लेबोरेटरीज, मुंबई विश्वविद्यालय, एनेडिस, एनईएल एक्स, एली, चारिन, आईआईटी मद्रास, डेल्टा और ब्रुसा सहित उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

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