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आगमन संगोष्ठी : ‘हमारी आँख का पानी कहीं पत्थर न हो‌ जाये…’

लखनऊ एक्सपो 2021 में रेखा रावत बोरा के संयोजन में आगमन की संगोष्ठी

लखनऊ एक्सपो 2021 में मुनाल उत्तरांचल पूर्वांचल कला उत्सव के तहत आयोजित गोष्ठी में कवियों ने शब्दों के रंग बिखेरे। आगमन संस्था की  राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा रावत बोरा के संयोजन में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि रूहेलखंड व आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो मोहम्मद मुज़म्मिल ने कविताओं को जीवन में उम्मीद का संचार करने वाला बताया। विशिष्ट अतिथि मुनालश्री विक्रम बिष्ट की उपस्थिति में जाने- माने कवियों ने पाठ किया गया। कार्यक्रम का आग़ाज़ डॉ अर्चना श्रीवास्तव जी के उद्बोधन व वाणी वन्दना  “हंसारूढ शारदे मां तम में प्रकाश भर से किया गया। आगमन ने लखनऊ चैपटर के अध्यक्ष मनोज शुक्ल’मनुज’ -ज़ीवन जीने का मंत्र राम सुनाकर सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा बोरा ने आज क्यों प्रिय मुझसे यह अनुबंध पर जमकर तालियाँ बटोरी।

कवियत्री मंजूषा श्रीवास्तव- इश्क कीजे तो छुपाने की जरूरत क्या है व चर्चित कवि विक्रम मिश्र ‘अनगढ़’- ख़ाक में मिल जाने पर तू दुनिया से क्या चाहे समेत नीरजा नीरू- छोटू बनता बड़ा तभी जब ज़िम्मेदारी पड़ती है पंक्तियाँ सुनाईं। डॉ शिल्पी बक्शी- चलो कहीं दूर चलते हैं, रुबीना हमीद – मौत जब तुझको पुकारेगी तुम्हें जाना पड़ेगा, वर्षा श्रीवास्तव- हमारी आँख का पानी कहीं पत्थर न हो‌ जाये, डॉ रूबी राज सिन्हा-नारी तू शक्ति है, भावना मौर्य- सिवा दर्द के है तो कुछ भी नहीं यह, रश्मि लहर- डुबो दो ख़ुशी में लिखो न उदासी, उपमा आर्य- दुनिया में कोई जात बराबर न आपके, कनक वर्मा- दो दो घरों को स्वर्ग बनाती हैं बेंटियाँ, अंजलि सारस्वत शर्मा- मेरी ज़िन्दगी  वजूद है, इं श्रीकांत तैलंग- जीवन है संघर्ष सभी का जीवन रहा नहीं संयोग। कार्यक्रम का समापन प्रो मोहम्मद मुज़म्मिल, मुनालश्री विक्रम बिष्ट, मनोज शुक्ल व रेखा बोरा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन मंजूषा श्रीवास्तव ने किया।

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