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नए भारत का दस्तावेज़ मैं स्वयंसेवक

–           डॉ मनीष शुक्ल की किताब मैं स्वयंसेवक का विमोचन  

नई दिल्ली : विश्व पुस्तक मेले में वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार डॉ मनीष शुक्ल की किताब मैं स्व्यसेवक का विमोचन किया गया| लेखक मंच पर आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि आईआईएमसी के पूर्व महनिदेशक और पूर्व कुलपति प्रो (डॉ) के जी सुरेश ने कहा मैं स्वयंसेवक पुस्तक देश को सामाजिक, सांस्कृतिक एकता के सूत्र में पिरोती है| यह राष्ट्रीय एकता की कहानी है| समारोह की अध्यक्षता करते हुए आध्यात्मिक गुरू साध्वी प्रज्ञा भारती ने कहा कि नए भारत का दस्तावेज़ है मैं स्वयंसेवक! डॉ शुक्ल ने कहा स्वयंसेवक एक व्यक्ति की राष्ट्रप्रेम की कहानी है| जिसके लिए हजारों लाखों स्वयंसेवक अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर रहे हैं|  पुस्तक विमोचन के अवसर पर आध्यात्मिक गुरु साध्वी प्रज्ञा भारतीय ने कहा कि मैं स्वयं सेवक एक ऐसी पुस्तक है जो समाज के प्रत्येक वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है| यह जाति- धर्म के बंधनों को तोड़कर मानवता का पाठ पढ़ाती है| जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कि एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अर्चना कुमारी ने कहा कि यदि आप कल्पना के साथ यथार्थ के रंगभर कर राष्ट्रप्रेम का खांचा खींचते हैं तो विरासत और विकास साथ- साथ होते हैं| इस किताब में यही बताया गया है|

वरिष्ठ पत्रकार तस्लीम अहमद ने कहा कि इस कहानी के नायक सूर्य प्रकाश और रहीस हमारी सांझी सांस्कृतिक विरासत को सँजोते हैं| समाज को जाति- धर्म में बांटने वाली ताकतों को लड़कर हराते हैं| वरिष्ठ पत्रकार सबला माथुर ने कहा कि एक स्वयंसेवक के संघर्ष से लेकर राष्ट्र के नेतृत्वकर्ता बनने की कहानी है| शिल्पायन प्रकाशन के उमेश शर्मा ने आभार जताया| इस अवसर पर पूर्व आईईइस अधिकारी पी सी बोध की काव्य संग्रह उल्टी गंगा बहाना छोड़ो का भी विमोचन हुआ। संचालन अंकित कुमार ने किया| इस अवसर पर कमला सिंह जीनत, प्रतिभा, पीयूष दीक्षित आदि उपस्थित रहे|

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