कोलंबो में वरीय साहित्यकार संजय पवार की किताबों का लोकार्पण
पुणे : हिंदी मराठी के वरीय साहित्यकार संजय पवार की गद्य क्षणिका रत्नाकर और त्रिवेणी संसार इन दो किताबों का लोकार्पण विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में किया गया। संजय पवार की गद्य क्षणिका रत्नाकर साहित्य की नई विधा है और यह विश्व की तीसरी तथा भारत की दूसरी पुस्तक है।

मॉरिशस के विश्व साहित्यकार डॉ.रामदेव धुरंधर इस विधा के जनक माने जाते है। डॉ. रामदेव धुरंधर की प्रस्तावना गद्य क्षणिका रत्नाकर को प्राप्त हुई है। संजय पवार की दूसरी पुस्तक त्रिवेणी संसार है। त्रिवेणी साहित्य विधा के जनक गुलजार साहब माने जाते है। त्रिवेणी संसार की भूमिका देश के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मनीष शुक्ल ने लिखी है। इस पद्य विधा में संजय पवार की यह किताब शामिल हुई है। लोकार्पण के समय संजय पवार की तरह इन दोनों विधाओं में साहित्यकारों ने काम करना चाहिए यह सलाह मंचासिन अधिकारियों ने दी। साहित्य की अनेक विधाओं में आज भी पर्याप्त लेखन की आवश्यकता है जिससे हिंदी के विकास में लाभ हो सकता है यह भावना डॉ. मनीष शुक्ल ने व्यक्त की।

संजय पवार हिंदी और मराठी दोनों भाषाओं में गद्य पद्य लेखन तथा अनुवाद करते है। गद्य पद्य साहित्य में कविता, गज़ल, गीत, दीर्घ कविताएँ, गद्य क्षणिका, त्रिवेणी, यात्रा वर्णन, संस्मरण, आलेख, के साथ देश विदेश की पत्रिकाओं तथा समसामयिक विषयों पर अखबारों में लेखन किया है। भारतीय उच्चायोग कोलंबो, केलनीय विश्वविद्यालय कोलंबो, पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी शिलोंग मेघालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्वितीय विश्व हिंदी दिवस समारोह में उनकी हिंदी के प्रचार प्रसार तथा साहित्यिक सेवाओं के लिए भारत श्रीलंका हिंदी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। इस समय देश विदेश के हिंदी साहित्यकार, हिंदी सेवी, प्रोफेसर, छात्र तथा प्रसार माध्यमों के प्रतिनिधि आदि बड़ी संख्या में उपस्थित थे। भारत के भिन्न भिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों में डॉ. अशोक भाटिया, डॉ. रणजोध सिंह, डॉ. मनीष शुक्ल, डॉ. प्रताप मोहन भारतीय, डॉ. राकेश सक्सेना, डॉ. रामावतार मेघवाल, डॉ. अभयकुमार, डॉ. जसपालसिंह वलवी, डॉ. ज्ञानेश्वर सोनार, डॉ. बलीराम धापसे, प्रोफेसर मोहम्मद शब्बीर आदि मान्यवर व्यक्तियों ने संजय पवार का अभिनंदन किया।

