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मेरा युवा भारत पोर्टल पर  तीन महीने में 1.45 करोड़ युवा पंजीकृत

मेरा युवा भारत (माय भारत) पोर्टल ने 31 जनवरी 2024 तक 1.45 करोड़ से अधिक पंजीकरणों के साथ महत्‍वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ऐसा इस पोर्टल के उपयोगकर्ता के अनुकूल इंटरफेस के कारण संभव हो सका है जो कुछ ही मिनटों में पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्ण कर देता है। यह पोर्टल पहले से ही देश…

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विकसित भारत बजट विकसित भारत की नींव मजबूत करने की गारंटी देता है : प्रधानमंत्री

बजट सिर्फ अंतरिम बजट नहीं बल्कि एक समावेशी और प्रगतिशील बजट प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बजट की सराहना करते हुए इसे ”केवल एक अंतरिम बजट नहीं बल्कि एक समावेशी और प्रगतिशील बजट बताया।” प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, ”यह बजट निरंतरता का विश्वास लिए हुए है।” प्रधानमंत्री ने कहा, ”यह बजट विकसित भारत के…

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श्री राम जन्मभूमि मंदिर का विश्व को संदेश

साध्वी प्रज्ञा भारती 22 जनवरी 2024 आधुनिक भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण तिथि बन गई है| उस दिन अयोध्या धाम में राम जन्म भूमि मंदिर में रामलला विराजमान होने से विश्वभर का ध्यान भारत के गौरवशाली अतीत की ओर चला गया था| पूरा देश राम माय हो गया था| क्योंकि राम भारतीय संस्कृति के…

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साहित्य वीथिका ने बहाई रचनाओं की सुमधुर गंगा

साहित्यिक गतिविधियों के प्रति समर्पित संस्था” साहित्य वीथिका साहित्यिक सामाजिक संस्था” के तत्वावधान में ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया | गोष्ठी की अध्यक्षता व मंच संचालन  संस्था  की अध्यक्ष मंजूषा श्रीवास्तव मृदुल जी द्वारा  किया गया |  गोष्ठी की मुख्य अतिथि श्रीमती नमिता सचान सुंदर जी  एवं आदरणीय रश्मि लहर जी थी  जिनकी उपस्थिति ने गोष्ठी में चार चांद लगा दिए | मां शारदे की आराधना और दीप प्रज्वलन से गोष्ठी का प्रारंभ हुआ  |  अतिथियों के स्वागत के पश्चात मां शारदे की वंदना हमारे अतिथि महोदया आदरणीय नमिता सुंदर जी के मुखारविंद से हुई | इसके बाद प्रबुद्ध  कवयित्रियों की रचनाओं की सुमधुर पावनी गंगा में सभी ने स्नान किया | काव्य गोष्ठी में नीरजा नीरू, पूनम सिंह चौहान, शशि तिवारी, शिल्पी बक्शी,रुबीना हमीद, मनोरमा श्रीवास्तव,गरिमा पंत, अंजली सारश्वत,मीनाक्षी पीयूष,रश्मि लहर, नमिता सुंदर एवं मंजूषा श्रीवास्तव  आदि ने  काव्य पाठ किया |  मुख्य अतिथि नमिता सचान “सुंदर” जी एवं रश्मि लहर जी ने कार्यक्रम की बहुत सराहना की और  आशीर्वचन दिए |  कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहा |  अध्यक्ष मंजूषा श्रीवास्तव मृदुल जी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ गोष्ठी का समापन हुआ | 

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पुरबी बयार भोजपुरी साहित्यिक संस्था की काव्य गोष्ठी 

लखनऊ : “पुरबी बयार” भोजपुरी साहित्यिक संस्था द्वारा आयोजित प्रथम काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपने पाठ से लोगों का मन मोह लिया| समारोह की अध्यक्षता नरेन्द्र भूषण ने की| सभी ने भोजपुरी में पाठ कर माहौल में समां बाँध दिया| मुख्य अतिथि आदरणीया मनोरमा लाल जी पुरबी बयार साहित्यिक संस्था के आपन आशीर्वाद देके सब भोजपुरिया भाषी लोगन से कहनी ह की सबलोग आपस में मिलले पर भोजपुरिए में  बोली बतियाई।हिंदी में अगर दस गीत लिखल जाता त भोजपुरी में एक रचना जरूर लिखी सभे। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ0 सुभाष चंद रसिया जी  सभे उपस्थित भोजपुरी साहित्यकार लोगन के स्वागत आ अतिथि लोगन के माल्यार्पण कइके स्वागत कइनी ह। संस्था के सांस्कृतिक अध्यक्ष आर्यावर्ती सरोज “आर्या” अउरी कोषाध्यक्ष शीला वर्मा मीरा रहली। “बरगद पीपल नीम के,कितना मीठा छाँव। याद बहुत आवे हमे,आपन प्यारा गाँव।।” डॉ0 सुभाष चंद रसिया कार्यक्रम में अध्यक्ष श्री नरेन्द्र भूषण जी ने अपने विचार ब्यक्त करते हुए “भोजपुरी को मिठास से पूर्ण भाव रस अभिब्यक्ति का साधन बताया।इन्होंने कहा कि सभी लोग अन्य के साथ भोजपुरी में भी रचना करते रहिए।नियमित कार्यक्रम करते रहें।पुरबी बयार के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए नव वर्ष की भी शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में निम्न कवियों के  काव्यपाठ किया। महेश चंद गुप्ता जी के संयोजन में आयोजित भइल काव्य समारोह में आर्यावर्ती सरोज जी,लोकेश त्रिपाठी,संध्या त्रिपाठी, श्यामल मजुमदार, प्रतिभा सिंह,डॉ0 विभा प्रकाश,प्रशांत त्रिपाठी, अलका अस्थाना,रमाशंकर सिंह,शीला वर्मा मीरा,कृष्णानन्द राय, रमेश चंद गुप्त,राजेश सिंह श्रेयस,अगम दयाल जी ने अपनी अपनी रचना के पाठ कइले। अंत  में संस्था की सांस्कृतिक सचिव आर्यावर्ती सरोज “आर्या ” ने आभार ज्ञापन किया। और साथ ही अगली गोष्ठी तक के लिए कार्यक्रम स्थगित किया गया। 

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सिनेप्रेमी युवाओं का ढंग हमेशा ही विपरीत रहा है

लेखक : दिलीप कुमार आजकल एनिमल फ़िल्म चर्चा का विषय बनी हुई है. बनना भी चाहिए, क्योंकि हिन्दी सिनेमा की दूसरी सबसे कामयाब फ़िल्म बन गई है. मैं रणबीर का बहुत बड़ा प्रसंशक हूं, फिर भी एनिमल फ़िल्म मैं झेल नहीं पाया, और फ़िल्म आधी छोड़कर ही चला आया. मुझे तो विचित्र नहीं लगा, और भारी मन से इस बात को स्वीकार करता हूँ, क्योंकि मैं फ़िल्म देखने से पहले कहानी, निर्देशक, ऐक्टर सबकुछ समझने के बाद अपने तीन घण्टे खर्च करता हूँ…. मैं जानता हूं एक फिल्म बनने में कई परिवारों के लोगों की मेहनत शामिल होती है, इसलिए फिल्म न देखने का आव्हान मैं कभी नहीं कर पाता, अतः लिख देता हूं फिल्म मुझे पसंद नहीं आई, हालांकि मेरी पसंद सार्वभौमिक सत्य नहीं है, हो सकता है आपको पसंद आए. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, हर कोई अपने विचार रख सकता है. हमारे विचार ज्यादा लोगों तक नहीं पहुंचते, लेकिन जावेद अख्तर साहब जैसे नामचीन हस्तियों का बोलना मतलब पूरे समाज़ में उनका भाषण असर करता है. जावेद अख्तर साहब ने कहा – “एनिमल फिल्म में नायक – नायिका को मारता है, और कहता है मेरे जूते चाटो’ ग़र ऐसी फ़िल्में ब्लॉकबस्टर हो रहीं हैं तो यह समाज के लिए बहुत ख़तरनाक बात है”. यह सुनकर एनिमल फिल्म के रायटर संदीप रेड्डी वांगा ने जावेद अख्तर साहब की रायटिंग स्किल पर ही सवाल उठा दिया, जो न काबिले बरदाश्त है. आप अपनी बात रख सकते थे, कोई प्रश्न कर सकते थे, जावेद अख्तर साहब सम्मानित इंसान हैं, वो खुद बड़ी विनम्रता पूर्वक जवाब देते, मुझे संदीप का जवाब अभद्र लगा हमें अपने से बड़ों के प्रति ऐसे कटुता के शब्द नहीं बोलने चाहिए. मैं जावेद अख्तर साहब से पूर्णतः सहमत हूँ, ऐसी फ़िल्में समाज के लिए हानिकारक हैं, लेकिन मेरा एक छोटा सवाल यह भी है ‘जैसा कि मैंने पहले बोला कि मेरी पसंद सार्वभौमिक सत्य नहीं है, और न ही जावेद अख्तर साहब की फ़िर भी वो कौन से लोग हैं जिन्होंने एनिमल फिल्म को’ ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर’ बना दिया? सवाल तो करना पड़ेगा. मैं जवाब देना चाहता हूं, वो इसलिए कि’ सिनेप्रेमी युवाओं का ढंग हमेशा ही विपरीत रहा है’. जी हां यह बात मैं बड़ी जिम्मेदारी से कह रहा हूं. जब हिन्दी सिनेमा में अमर प्रेम, आराधना, गोलमाल, चुपके – चुपके जैसी शुद्ध पारिवारिक फ़िल्में बन रहीं थीं, दूसरी ओर पार, बाज़ार, चश्मे बद्दूर, अर्धसत्य, सद्गति,…

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राममय राष्ट्र: २२ तक स्वच्छता अभियान

लखनऊ । माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आवाह्न पर 14 जनवरी से 22 जनवरी तक वृहद स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें प्रदेश सरकार के मंत्री, प्रदेश पदाधिकारी जिलों में पहुंचकर पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता व स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर पूरे प्रदेश में मंदिरों और मठों पर श्रमदान कर वृहद स्वच्छता अभियान चलाकर श्रमदान कर रहे है। प्रदेश उपाध्यक्ष श्री त्रयंबक त्रिपाठी ने बताया कि सोमवार 15 जनवरी को प्रदेश सरकार के मंत्री श्री दयाशंकर सिंह बलिया, श्री कपिलदेव अग्रवाल बिजनौर, श्री अरूण कुमार सक्सेना बरेली, श्री संदीप सिंह कासगंज, श्री असीम अरूण कन्नौज, श्री जसवन्त सैनी व श्री ब्रजेश सिंह सहारनपुर, श्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु‘ वाराणसी, श्रीमती रजनी तिवारी हरदोई, श्री मनोहर लाल ‘मन्नू कोरी‘ ललितपुर, श्री सतीश शर्मा बाराबंकी, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री पंकज सिंह अयोध्या, श्री सलिल विश्नोई लखनऊ, श्री संतोष सिंह आगरा, श्रीमती कान्ताकर्दम हापुड़, श्री दिनेश कुमार शर्मा हाथरस, श्रीमती नीलम सोनकर बलिया, प्रदेश महामंत्री श्री गोविन्द नारायण शुक्ला अमेठी, श्री संजय राय लखनऊ, श्रीमती प्रियंका सिंह रावत बाराबंकी, प्रदेश मंत्री बसंत त्यागी मुरादाबाद, श्री शिव भूषण सिंह बहराइच, श्री अभिजात मिश्रा मीरजापुर, श्री शंकर लोधी लखनऊ जिला, श्री डीपी भारती हाथरस, श्रीमती पूनम बजाज हाथरस, श्री सुरेश पासी अमेठी, किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्री कामेश्वर सिंह गोरखपुर, अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय गोण्ड लखनऊ, एमएलसी श्री श्रीचन्द्र शर्मा गौतमबुद्धनगर में स्वच्छता अभियान में सम्मिलित रहेंगे।

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आगमन का 11 वां स्थापना दिवस : निशांत ने संभाली पवन जी जैन की साहित्यिक विरासत

साहित्यिक संस्था ‘आगमन’ का 11 वाँ स्थापना दिवस बुद्ध रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया|  संस्था के जनक स्वर्गीय पवन जैन के निधन के बाद पहली बार हो रहे समारोह में पिता की साहित्यिक विरासत पुत्र ने संभाली| कार्यक्रम में देश-विदेश में बसे, आगमन मंच के 170 आजीवन सदस्यों की काव्य-रचनाओं के साझा-संकलन ‘अनन्या’ का विमोचन किया गया। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष निशांत पी जैन कार्यक्रम कि सफलता का श्रेय अपनी टीम को दिया|  साहित्यिक संस्था के देश में ही नहीं, विदेश में भी बहुत से आजीवन सदस्य हैं। हर वर्ष आगमन सितम्बर में स्थापना दिवस बड़े ही धूमधाम से मानती है मगर इस वर्ष जून के माह में आगमन  के संस्थापक पवन जैन कालकावलित हो गए जिसके कारण सितम्बर के स्थापना दिवस को स्थगित कर दिया गया था। 24 दिसंबर 2023 को लखनऊ के बुद्ध रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑडिटोरियम, गोमती नगर में,…

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वतन को जानने के लिए राष्ट्रपति से मिले जम्मू-कश्मीर के युवा 

 ‘वतन को जानो’ कार्यक्रम में भाग लेने वाले जम्मू-कश्मीर के एक युवा प्रतिनिधिमंडल ने आज (25 दिसंबर, 2023) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ‘वतन को जानो’ कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें देश की कला, संस्कृति, सभ्यता और देश में हो रहे विकास कार्यों से अवगत कराना है। अपनी यात्रा के दौरान उन्हें एहसास हुआ होगा कि हम अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं, अलग-अलग कपड़े पहनते हैं, अलग-अलग जीवनशैली अपनाते हैं, लेकिन, हम एक हैं। यही एकता हमारी असली ताकत है। हमें इसे और मजबूत करना है।’ राष्ट्रपति ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के विकास में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन लोगों की प्रगति के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। आम लोगों के लाभ के लिए शासन-प्रशासन में प्रौद्योगिकी का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। डिजिटल जम्मू-कश्मीर की ओर बढ़ते हुए, प्रशासन ने शासन को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने कहा कि प्रभावी वितरण और पारदर्शिता सुशासन का आधार है। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि इसी सोच के साथ 1100 से अधिक सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन किया गया है जो आम जनता के हित में है। राष्ट्रपति ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के युवा भारत की मुख्यधारा का हिस्सा बनकर अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। लेकिन आज भी कुछ तत्व निहित स्वार्थों के कारण नहीं चाहते कि कश्मीर आगे बढ़े। हालाँकि, जिस तरह से सरकार जम्मू-कश्मीर की प्रगति के लिए बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और शिक्षा में निवेश कर रही है, वह दिन दूर नहीं जब जम्मू-कश्मीर भारत में प्रगति का आदर्श प्रस्तुत करेगा। राष्ट्रपति ने युवा प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से सरकार द्वारा किए जा रहे विकासात्मक प्रयासों का लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से उनके जीवन में तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने उन्हें अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए नशीली दवाओं, असामाजिक तत्वों और नकारात्मक प्रचार से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सभी को उचित अवसर प्रदान करता है, बस उन्हें इस पर विश्वास करना होगा और समर्पण और कड़ी मेहनत के साथ आगे बढ़ना होगा।

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फिल्म निर्माताओं के लिए फायदे का सौदा डिजिटल संरक्षण

आज फिल्म निर्माताओं को अपनी फिल्म या फाइल आधारित प्रस्तुतियों को डिजिटल माध्यम में सुरक्षित रूप से संग्रहीत करने की लगातार सामने आ रही आवश्यकता का सामना करना पड़ रहा है। इस विषय पर विचार-विमर्श करने के लिए आज 54वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, गोवा में ‘डिजिटल मोशन पिक्चर प्रिजर्वेशन’ पर एक मास्टरक्लास सत्र आयोजित किया गया। अनुभवी फिल्म रेस्टॉरेशन (पुनर्स्थापन) विशेषज्ञ और फिल्म इतिहासकार थियोडोर ई ग्लक के नेतृत्व में हुई मास्टरक्लास का उद्देश्य मोशन पिक्चर को डिजिटल प्रारूप में संरक्षित करने में ‘अकादमी डिजिटल प्रिजर्वेशन फोरम’ के प्रयासों पर जोर देना था। यह ‘अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज’ के तहत आने वाली विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद की एक पहल है। अपने संबोधन में थियोडोर ई ग्लक ने मूल रचना के सौंदर्यशास्त्र को नुकसान न पहुंचाने के लिए पुनर्स्थापन पेशेवरों द्वारा अपनाए जाने वाले उत्कृष्ट संतुलन को रखांकित किया। उन्होंने कहा, “मूल काम की कलात्मक प्रामाणिकता और प्रयोजन को संरक्षित करते हुए डिजिटल संरक्षण की मांग को पूरा करना एक बड़ी चुनौती है। प्राथमिक लक्ष्य फिल्म को बदलने के बजाय उसमें सुधार करना होना चाहिए।” उन्होंने किसी भी पुनर्स्थापना परियोजना में फिल्म निर्माताओं के मूल कलात्मक प्रयोजन का सम्मान करने के महत्व को भी रेखांकित किया। मास्टर क्लास की मुख्य बातों में से एक पुनर्स्थापना और संरक्षण में आने वाली भारी लागत थी। उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा, “खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आप पुनर्स्थापना परियोजना के माध्यम से क्या हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।” थिओडोर ने मानवीय हस्तक्षेप के व्यापक महत्व को रेखांकित करते हुए फिल्म संरक्षण के भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उभरती भूमिका को भी स्वीकार किया।

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