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महावीर जयंती और वर्तमान में प्रासंगिकता

लेखक : डॉ आलोक चांटिया अखिल भारतीय अधिकार संगठन जिन लोगों ने अपनी इंद्रियों पर वश कर लिया वही जिन से जैन के रूप में प्रतिष्ठित हो गए और ऐसे 23 तीर्थंकर पृथ्वी पर अवतरित हुए जिनमें सबसे पहले ऋषभदेव थे लेकिन 24वें तीर्थंकर वर्धमान नाम से इस दुनिया में आए और कालांतर में वही…

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एक मुस्कराहट कर देती है मौन को निलंबित : डॉ सिधांशु

साहित्यकार मनीष शुक्ल के कविता संग्रह निलंबित मौन के स्वर के स्वर का लोकार्पण और संवाद   मौन को आपकी एक मुस्कराहट निलंबित कर देती है| फिर जो स्वर निकलते हैं| वो दिल की आवाज होती है| कानपुर मेट्रो और बुक लैंड बुक फेयर की ओर आयोजित साहित्यकार मनीष शुक्ल के कविता संग्रह निलंबित मौन…

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घुटन से आजादी का प्रतीक… इंटरनेशनल ट्रांसजेंडर डे आफ विजिबिलिटी

लेखक : डॉ आलोक चांटिया अखिल भारतीय अधिकार संगठन ट्रांसजेंडर यानी लिंग के परे और यहीं पर यह समझने की आवश्यकता है कि जैविक शब्द सेक्स का सांस्कृतिक रूपांतरण ही जेंडर है जिसके आधार पर मानव संस्कृति ने अपने उद्भव के समय से लेकर आज तक सिर्फ स्त्री और पुरुष को ही सामान्य मानते हुए…

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रामनवमी : राम को किसने कितना जाना

लेखक : डॉ आलोक चांटिया इक्ष्वाकु वंश के प्रथम राजा इक्ष्वाकु और कुल मिलाकर 18 राजा हुए जिसमें रामचंद्र जी भी प्राचीन भारत के सोलह महाजनपदों में एक कौशल नरेश दशरथ के पुत्र थे इसी क्रम में यदि हिंदू धर्म के दसों अवतार की बात करें तो सातवां अवतार भगवान श्री राम कथा जो चैत्र…

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उत्पल दत्त : रंगमंच का विद्रोही अदाकार

लेखक : दिलीप कुमार आज अधिकांश सिनेमाई प्रशंसको को उत्पल दत्त याद  नहीं होंगे. अधिकांश लोग तो उन्हें कॉमिक टाइमिंग के लिए ही जानते हैं. उत्पल केवल एक अदाकार नहीं थे, वो एक क्रांतिक रंगकर्मी भी थे. उत्पल विविधतापूर्ण अभिनय के लिए याद आते हैं. ऋषिकेश मुखर्जी की कॉमिक कालजयी फिल्म गोलमाल में उनकी हास्य…

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कोरोना वायरस जैसी महामारी की दस्तक फिर से

लेखक : डॉ आलोक चांटिया आज भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व के 186 देश करोना जैसे वायरस से पीड़ित होकर अपने देश में रहने वाले लोगों को जिंदा रखने के लिए हर प्रयास कर रहे हैं यह स्थिति नाजुक इसलिए बन गई है क्योंकि अभी तक इस वायरस के विरुद्ध कोई भी एंटी टोड नहीं…

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सावरकर पर अपनी ही पार्टी लाइन के खिलाफ क्यों हैं राहुल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी भाजपा और खासकर प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ किसी भी सीमा पर जाकर विरोश करते नजर आ रहे हैं| फिर चाहें अपनी ही दादी और परदादा के फैसले हों या फिर गठबंधन के दोस्त, राहुल गांधी को किसी की भी परवाह नहीं है| इसीलिए वीर सावरकर को लेकर कांग्रेस की…

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विश्व रंगमंच दिवस : ईसा पूर्व से हो रहा है मंचन

लेखक : डॉ आलोक चांटिया वर्ष 1961 में फ्रांस के जीन काक ट्यू द्वारा 27 मार्च को पहला विश्व रंगमंच दिवस मनाने का संकल्प आरंभ किया गया था जिसका उद्देश्य था कि रंगमंच और शांति की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए और बस तभी से इसी थीम पर हर वर्ष विश्व रंगमंच दिवस मनाया जाता…

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फारुख शेख : भरोसेमंद सदाबहार कलाकार

लेखक : दिलीप कुमार हिन्दी सिनेमा की भी अज़ीब सी दुनिया है, यहां कला फ़िल्मों को बोरिंग कहकर खारिज कर दिया जाता है, वहीँ समानान्तर सिनेमा के कलाकारों को एक रस का कलाकार कहकर सीमाओं में बाँध दिया जाता है, लेकिन कई बार सिद्ध हो चुका है, कि समानान्तर सिनेमा ही प्रमुख सिनेमा है. समानान्तर…

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बेतरतीब विकास : दरकते पहाड़, सिसकती धरती

मनीष शुक्ल कहानी दशकों पुरानी है| बदस्तूर जारी है| समय के साथ दर्द, पीड़ा और पलायन बढ़ता जा रहा है| रिपोर्ट पर रिपोर्ट जारी हो रही हैं लेकिन कहानी है जो ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है| ये कहानी है हमारे पहाड़ी राज्यों के बेतरतीब विकास की| जिसकी वजह से पहाड़ दरक…

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