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पूर्ण साक्षरता- विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य में डिजिटल शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका

शिक्षा मंत्रालय अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (आईएलडी) 2025 मना रहा है

  • धर्मेंद्र प्रधान ने साक्षरता को सशक्तिकरण के रूप में रेखांकित किया
  • नागरिक जागरूकता, डिजिटल पहुंच और वित्तीय जागरूकता मुख्य बिंदु हैं: जयंत चौधरी

नई दिल्ली : पूर्ण साक्षर भारत के स्वप्न को साकार करने और विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य को हासिल करने के लिए डिजिटल शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है| केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने आज नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (आईएलडी) 2025 समारोह को संबोधित किया।

समारोह “डिजिटल युग में साक्षरता को बढ़ावा देना”, जिसमें देश भर में पढ़ने, लिखने, अंकगणित और आजीवन शिक्षण कौशल को सक्षम करने में डिजिटल प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया। हिमाचल प्रदेश पूर्ण कार्यशील साक्षरता हासिल करने वाला चौथा राज्य बन गया है, और इस महत्वपूर्ण उपलब्धि में त्रिपुरा, मिज़ोरम और गोवा के साथ शामिल हो गया है। 24 जून, 2024 को लद्दाख को पूर्ण साक्षर होने वाला पहला केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक वर्चुअल संबोधन दिया जिसमें भारत की प्रगति और सार्वभौमिक साक्षरता के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला गया। श्री प्रधान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है। यह सम्मान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का साधन है। उन्होंने कहा कि भारत की साक्षरता दर 2011 के 74 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 80.9 प्रतिशत हो गई है, लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सच्ची प्रगति तभी होगी जब साक्षरता प्रत्येक नागरिक के लिए एक जीवंत वास्तविकता बन जाएगी। उन्होंने उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम की रूपांतरकारी भूमिका की चर्चा की, जिसमें 3 करोड़ से ज़्यादा शिक्षार्थी और 42 लाख स्वयंसेवक नामांकित हैं। लगभग 1.83 करोड़ शिक्षार्थी पहले ही बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता मूल्यांकन प्राप्त कर चुके हैं, जिसमें 90 प्रतिशत सफलता मिली है। यह कार्यक्रम अब 26 भारतीय भाषाओं में शिक्षण सामग्री प्रदान करता है, जिससे साक्षरता वास्तव में समावेशी बनती है। लद्दाख, मिज़ोरम, गोवा, त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश को पूर्ण साक्षरता प्राप्त करने पर बधाई देते हुए, श्री प्रधान ने कहा कि ये उपलब्धियां सरकार, समाज और स्वयंसेवकों के सामूहिक प्रयास की शक्ति की पुष्टि करती हैं। उन्होंने युवाओं और छात्रों से साक्षरता मिशन में योगदान देने का आग्रह किया और सुझाव दिया कि ऐसे प्रयासों को अकादमिक क्रेडिट के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए। श्री प्रधान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के शिक्षा को सभ्यता की नींव मानने के विजन को दोहराया और एक साक्षर, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के लिए नए सिरे से प्रतिबद्धता की अपील की।

इस अवसर पर, श्री जयंत चौधरी ने प्रसन्नता व्यक्त की कि हिमाचल प्रदेश ने मिज़ोरम, गोवा, त्रिपुरा और लद्दाख के साथ मिलकर खुद को पूर्ण साक्षर घोषित कर लिया है। उन्होंने कहा कि यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि दुर्गम भूभाग वाले राज्य इस उपलब्धि को प्राप्त करने वाले पहले राज्यों में शामिल हैं। स्कूलों, शिक्षकों और संसाधनों तक सीमित पहुंच की चुनौतियों के बावजूद, समुदायों ने स्वयं को संगठित किया, स्वयंसेवकों ने आगे आकर सहयोग दिया और सरकारों ने भी सहयोग दिया। श्री चौधरी ने कहा कि यह सामूहिक उपलब्धि दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प से भौगोलिक सीमाओं को कैसे पार किया जा सकता है और यह सम्मान तथा प्रशंसा का पात्र है।

उन्होंने कहा कि भारत में साक्षरता की अवधारणा का विस्तार डिजिटल साक्षरता को शामिल करने तक हो गया है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत ने मज़बूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का निर्माण करके, जिससे शिक्षा और समावेशन में तेज़ी आई है, दुनिया, विशेष रूप से विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) के लिए एक मिसाल कायम की है। जिन उपलब्धियों को हासिल करने में शायद पचास साल लगते, वे भारत के डिजिटल नवोन्मेषों के ज़रिए सिर्फ़ एक दशक में अर्जित हो गई हैं।

डॉ. बी.आर. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, उन्होंने स्मरण किया कि कैसे अंबेडकर अपनी पृष्ठभूमि की चुनौतियों से ऊपर उठकर शिक्षा के सबसे प्रबल समर्थकों में से एक बने। उन्होंने अंबेडकर के इस विश्वास को दोहराया कि अज्ञानता के चक्र को साक्षरता के माध्यम से तोड़ा जाना चाहिए और शिक्षा तक निःशुल्क तथा समान पहुंच आवश्यक है।

उन्होंने भविष्य के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताओं को रेखांकित किया:

स्वयंसेवा की भावना को बनाए रखना, क्योंकि साक्षरता सबसे तेजी से तब फैलती है जब नागरिक एक-दूसरे की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते हैं| साक्षरता को कौशल और आजीविका के साथ एकीकृत करना, यह सुनिश्चित करना कि व्यक्तियों को तत्काल और ठोस लाभ मिले।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव श्री संजय कुमार ने भारत में साक्षरता दर में आज़ादी के बाद के 12 प्रतिशत से बढ़कर आज 80 प्रतिशत से अधिक हो जाने का उल्लेख करते हुए, अगली जनगणना तक उल्लास के माध्यम से और सुधार लाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सभी साक्षर नागरिकों को निरक्षर व्यक्तियों को पढ़ाना चाहिए और उल्लास के तहत पंजीकृत बड़ी संख्या में शिक्षार्थियों और स्वयंसेवी शिक्षकों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने ऑफ़लाइन और ऑनलाइन शिक्षा के संयोजन वाली उल्लास की मिश्रित पद्धति के महत्व पर भी बात की और छात्रों से इस जन आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया कि पांच वर्षों के भीतर, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु का प्रत्येक निरक्षर व्यक्ति डिजिटल, कानूनी और वित्तीय साक्षरता सहित नए मानकों के अनुसार साक्षर हो जाए।

इस अवसर पर, उल्लास संग्रह का विमोचन किया गया, जिसमें शिक्षण और अध्यय़न सामग्री का एक विविध संग्रह प्रदर्शित किया गया जो भारत की समृद्ध भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत का प्रतीक है। लद्दाख और गोवा के प्रतिनिधियों ने पूर्ण साक्षरता प्राप्त करने के अपने अनुभव और सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा किया और अनुभव-साझाकरण सत्र के दौरान बहुमूल्य अंतर्दृष्टि और कार्य नीतियां प्रदान कीं।

इस अवसर पर, भारत सरकार ने 1 से 8 सितंबर 2025 तक उल्लास साक्षरता सप्ताह 2025 का आयोजन किया, जिसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निरक्षरों, स्वयंसेवकों और नव-शिक्षार्थियों को पंजीकृत करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी साक्षरता अभियान चलाया गया।

इस कार्यक्रम में त्रिपुरा के शिक्षा मंत्री श्री किशोर बर्मन, मिज़ोरम के शिक्षा मंत्री डॉ. वनलालथलाना और डीओएसईएल के सचिव श्री संजय कुमार के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय, एनसीईआरटी, सीबीएसई, केवीएस, एनवीएस, एनसीटीई, एनआईओएस, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, स्वयंसेवी शिक्षक, शिक्षार्थी, नव-साक्षर और अन्य हितधारक भी शामिल हुए।

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