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व्यंग्य यात्री 2022 व कविता संग्रह ‘जि़ंदगी इतनी आसान नहीं का लोकार्पण

लखनऊ पुस्तक मेले में लोकार्पण समारोह लखनऊ पुस्‍तक मेले में सोमवार को वरिष्‍ठ पत्रकार एवं कथाकार मनीष शुक्‍ल के संपादन में प्रकाशित व्‍यंग्‍य संग्रह ‘व्‍यंग्‍य यात्री 2022’ एवं डॉ.शिल्‍पी बख्‍शी शुक्‍ला के काव्‍य संग्रह ‘जि़ंदगी इतनी  आसान नहीं’ का लोकार्पण किया गया। लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि डॉ. सूर्य कुमार पाण्‍डेय, अति विशिष्‍ट अतिथि महेन्‍द्र…

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लोकतंत्र  का ‘महापर्व’ और ‘सलीब’ पर टंगा लोक

योगेश भट्ट वरिष्ठ पत्रकार आम चुनाव, कहने को लोकतंत्र का महापर्व । न जाने कैसा महापर्व है यह ? जिसमें तंत्र तो उत्सव में लीन होता है, मगर लोक ‘सलीब’ पर टंगा होता है। आम लोक की तो छोड़िये इस महापर्व में अब तो सियासी दलों का झंडा डंडा उठाने वाले आम राजनैतिक कार्यकर्ता की…

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वैश्विक क्षितिज पर हिंदी का परचम

अरविंद जयतिलक आज विश्व हिंदी दिवस है। आज ही के दिन 1975 में नागपुर में प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन हुआ। विश्व हिंदी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने की मांग के अलावा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार और मजबूत बनाना है। हिंदी के प्रचार-प्रसार…

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मेरठ में लगा दुनियाँ भर के साहित्यकारों का मेला, बही गंगा- जमुनी रस धारा

क्रान्तिधरा साहित्य अकादमी का पांचवा अंतरराष्ट्रीय लिटरेचर फेस्टिवल आनलाइन आयोजित साहित्य, कला व संस्कृति को समर्पित ‘क्रान्तिधरा साहित्य अकादमी’  – मेरठ द्धारा आयोजित तीन दिवसीय पंचम मेरठ  लिटरेचर फेस्टिवल में समस्त  भारत, नेपाल , भूटान , बांग्लादेश , कनाडा , रूस , अमरीका, ईथोपिया, तंजानिया, आबूधाबी, ओमान, बैंकॉक, आस्ट्रेलिया व बेल्जियम के साहित्यकारो ने अन्य…

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मां मेरी यह कहती है…

— डॉ शिल्पी बक्शी शुक्ला मां मेरी यह कहती है, जिन पेड़ों पर फल लगता है, उनकी शाखें झुक जातीं हैं, करने प्रणाम अस्‍ताचल सूर्य को, बहती नदियां रूक जातीं हैं, गिरती हैं लहू की बूंदे तो, बंजर धरती भी सोना हो जाती है, सहती है बोझ ये धरती, तभी ये सृष्टि चल पाती है,…

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जनता की जय-जयकार, वोट की दरकार

मनीष शुक्ल वरिष्ठ पत्रकार जनता एकबार फिर जनार्दन है। चारों ओर उसकी जय जयकार हो रही है। चाहे कोई राजनीतिक दल हो या फिर नेता आजकल सपने में भी सारे मिलकर जनता का गुणगान गा रहे हैं। दिन हो रात, हर पल नेता जी जनता की सेवा में खुद को बिजी बता रहे हैं। मरहम…

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नवांकुर साहित्य सभा : ‘काव्यान्कुर 8’ और ‘ज़िन्दगी मुस्कुराएगी’ का लोकार्पण

नई दिल्ली : देश के नव-कलमकारों को काव्य के क्षेत्र में प्रोत्साहन हेतु समर्पित संस्था नवान्कुर साहित्य सभा ने नवान्कुर काव्य पाठ और पुस्तक लोकार्पण समारोह आयोजित किया। समारोह में बहुप्रतीक्षित नवान्कुरों के लिए प्रकाशित श्रंखला में आठवीं पुस्तक ‘काव्यान्कुर 8’ तथा संस्था के संस्थापक अध्यक्ष श्री अशोक कश्यप की दूसरी पुस्तक ‘ज़िन्दगी मुस्कुराएगी’ का…

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आगमन संगोष्ठी : ‘हमारी आँख का पानी कहीं पत्थर न हो‌ जाये…’

लखनऊ एक्सपो 2021 में रेखा रावत बोरा के संयोजन में आगमन की संगोष्ठी लखनऊ एक्सपो 2021 में मुनाल उत्तरांचल पूर्वांचल कला उत्सव के तहत आयोजित गोष्ठी में कवियों ने शब्दों के रंग बिखेरे। आगमन संस्था की  राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा रावत बोरा के संयोजन में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि रूहेलखंड व आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति…

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कहानी : वैशाली ने बदल दी तकदीर

लेखक : मनीष शुक्ल रात भर वो इधर से उधर करवट बदलती रही। आने वाली सुबह उसके संघर्ष से भरे जीवन का अंत कर सकती थी। उसके जीवन में खुशियाँ भर सकती थीं। एक ओर संघर्ष से घिरी अंधेरी ज़िंदगी दूसरी ओर रोशनी से भरा भविष्य, लेकिन फैसला लेना आसान नहीं था… बस एक फासले…

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मां मेरी यह कहती है…

—- डॉ शिल्पी बक्शी शुक्ला मां मेरी यह कहती है, जिन पेड़ों पर फल लगता है, उनकी शाखें झुक जातीं हैं, करने प्रणाम अस्‍ताचल सूर्य को, बहती नदियां रूक जातीं हैं, गिरती हैं लहू की बूंदे तो, बंजर धरती भी सोना हो जाती है, सहती है बोझ ये धरती, तभी ये सृष्टि चल पाती है,…

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