फिल्मों को पाठकों से जोड़ती है “अफसाना लिख रहा हूँ…!”
– डॉ मनीष शुक्ल- डॉ राखी बक्शी के सम्पादन में पुस्तक का विमोचन
नई दिल्ली : लखनऊ पुस्तक मेले में वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार डॉ मनीष शुक्ल एवं डॉ राखी बख्शी के सम्पादन में पुस्तक अफसाना लिख रहा हूँ का विमोचन किया गया| लेखक मंच पर आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री एवं विधायक अनुपमा जायसवाल ने कहा कि अफसाना लिख रहा हूँ पुस्तक फिल्मों के ऐसा दस्तावेज़ है को पाठकों को सीधे तौर पर जोड़ती है| विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह ने कहा पुस्तक में डॉ शिल्पी शुक्ला बक्शी के लेख के जरिये फिल्मों में नारी सशक्तिकरण को बखूबी परिभाषित किया गया है| मुख्य वक्ता राज्य ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र मिश्र ने कहा कि अफसाना… पुस्तक फिल्मों के इतिहास को सँजोती है| साथ ही भविष्य की फिल्मी यात्रा को भी बयान करती है| पुस्तक के संपादक डॉ मनीष ने बताया कि पुस्तक में देश भर के जाने- माने 13 विशेषज्ञ लेख हैं| जिसमें फिल्मों के पितामह दादा साहब फाल्के युग से लेकर ओटीटी युग के सिनेमा को विस्तार से परिभाषित किया गया है|
शिल्पायन प्रकाशन की पुस्तक “अफसाना लिख रहा हूँ” के विमोचन के अवसर पर भारत तिब्बत सहयोग मंच की राष्ट्रीय मंत्री (महिला शाखा) राधा पांडेय ने कहा कि अफसाना लिख रहा हूँ, ऐसी पुस्तक है जो फिल्मों के विभिन्न आयामों को प्रतिबिम्बित करती है| कार्यकम के अध्यक्ष लखनऊ विश्वविद्यालय में हिन्दी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो (डॉ) सौरभ मालवीय ने कहा कि फिल्में समाज का दर्पण होती है, पुस्तक के जरिए हमें पिछले सवा सौ वर्षों की फिल्मी यात्रा की जानकारी मिलती है| वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक श्रीधर अग्निहोत्री ने कहा कि पुस्तक एक ओर चमकते सितारों कि दास्तान बयान करती है तो दूसरी ओर गुमनाम हो चुके कलाकारों के योगदान का उल्लेख करती है| संपादक डॉ राखी बख्शी ने आभार जताते हुए कहा कि फिल्मों की कहानी राष्ट्रवाद के बिना अधूरी है| राष्ट्रवाद पर आधारित फिल्मों ने समय- समय पर देश को एकजुट करने का कार्य किया है| कार्यक्रम में छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के प्रोफेसर (डॉ) ओंकार नाथ गुप्ता, वरिष्ठ साहित्यकार रेणु मिश्रा, यूपी मेट्रो के महाप्रबंधक पंचानन मिश्रा, लंका फिल्म के अभिनेता चंद्रभूषण सिंह, शिल्पायन प्रकाशन के उमेश शर्मा, समाज सेवी शालिनी मिश्रा, जरीन अंसारी, जसपाल सिंह, मोहम्मद अकबर आदि ने विचार प्रकट किए|

