छात्रों को ‘मेक इन इंडिया-मेक फॉर द वर्ल्ड’ के लिए तैयार करती है नई शिक्षा नीति
- नई शिक्षा नीति के विविध आयाम’ शैक्षिक दक्षता वृद्धि व्याख्यान पर बोले दुर्गाशंकर मिश्र
- पूर्व मुख्य सचिव ने किया उत्कर्षिनी-2.0′ का विमोचन एवं विशिष्ट महानुभावों को सम्मानित
लखनऊ। संकल्प से साधना, समर्पण के माध्यम से सिद्धि मिलती है। महामना ने संकल्प की सिद्धि को परिश्रम की पराकाष्ठा से आगे बढ़ाया और विश्व प्रसिद्ध बीएचयू को स्थापित किया। उक्त वक्तव्य पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर सिंह ने रविवार को दिया। वह नक्षत्र फाउंडेशन की ओर से आईसीसीएमआरटी में हुई शैक्षिक दक्षता वृद्धि व्याख्यानमाला की ‘नई शिक्षा नीति के विविध आयाम’ विषयक 27वीं प्रस्तुति में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने ‘उत्कर्षिनी-2.0’ का विमोचन एवं सम्मान समारोह में विशिष्ट महानुभावों को सम्मानित भी किया।
प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एमपी अग्रवाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति का सर्वाधिक बेहतर क्रियान्वयन यूपी में हुआ है। कुछ वर्षों में इसका और प्रभाव दिखाई पड़ेगा। आईसीसीएमआरटी के निदेशक राजीव यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन पुस्तक की संपादक डॉ. ऋचा आर्या, आभार प्रदर्शन नक्षत्र फाउंडेशन की संरक्षक एवं सह संपादक रेखा झा ने किया। वैज्ञानिक कवि पंकज प्रसून ने विमचित हुई पुस्तक की समीक्षा करते हुए उत्कर्षिनी-2.0 के विविध आलेखों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस दौरान सचिवालय प्रशासन विभाग के उप सचिव एवं सचिवालय के मुख्य व्यवस्था अधिकारी जयशंकर प्रसाद झा, नक्षत्र फाउंडेशन अध्यक्ष डॉ.उदय प्रताप सिंह आदि भी मौजूद रहे।
श्री मिश्र ने कहा कि कोविड काल की त्रासदी में भारत आत्मनिर्भर बनकर निकला। वेतनभोगी से कर्मयोगी बनने के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। टीचर अब मेंटर हो रहे हैं, वह मेंटरशिप करते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि हमें हिमालय की चोटी पर नया हिमालय गढ़ना है। हर मंडल मुख्यालय पर स्पोर्ट्स कॉलेज बनने वाला है। मेरठ में खेल विश्वविद्यालय बनकर तैयार है। डिग्री के साथ छात्रों को दक्षता चाहिए। नई शिक्षा नीति छात्रों को ‘मेक इन इंडिया-मेक फॉर द वर्ल्ड’ के लिए तैयार करती है। यह शिक्षा व्यवस्था का परिवर्तन नहीं है, पूरी विचारधारा का परिवर्तन है।
इन विशिष्ट महानुभावों का हुआ सम्मान
पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने पुस्तक की संपादक डॉ. ऋचा आर्या, सह संपादक रेखा झा, लेखक डॉ. रंजना डीन, डॉ. नेहाश्री श्रीवास्तव, डॉ. संदीप चौरसिया, ऋचा तिवारी, डाॅ. रेनू चौधरी, डाॅ. दीपू राम, अंकिता यादव, डॉ. संदीप चौरसिया, पूजा तोमर, डॉ. रूपेश पीवी, रवि मिश्र, डॉ. प्रांजल कौशल, वैज्ञानिक कवि पंकज प्रसून, पत्रकार डॉ.अतुल मोहन सिंह आदि को सम्मानित किया।
नई शिक्षा नीति से ही निकलेगा विश्वगुरु के पद पर भारत की पुनः स्थापना का रास्ता
पूर्व मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने कहा कि शैक्षिक दक्षता वृद्धि व्याख्यानमाला से मुझे जुड़ने का अवसर मिला, यह अवस्मरणीय है। नई शिक्षा नीति अमूलचूल परिवर्तन करने की नीति है। विश्वगुरु के पद पर देश की पुनः स्थापना का रास्ता यहीं से निकलेगा। नई शिक्षा नीति-2020 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच को अनुवादित करती है जो सोच भारत को 2047 में विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, सबल-सशक्त और समुन्नत भारत बनाना चाहती है। यह नीति नौकरी दिलाने के लिए नहीं, शोध की सोच विकसित करने के लिए है। नई शिक्षा नीति पर्यावरण को संरक्षित करने, स्वच्छता को अपने आचरण का हिस्सा बनाने के लिए बाध्य करती है। यह हमें फ्लैक्सिबिलिटी देती है। यह नीति छात्रों को बांधती नहीं है, आपको विस्तार के लिए मुक्त करती है। सकरे रास्ते में डालने के लिए नहीं यह सफलता का एक्सप्रेसवे खोलने वाली है। यह हमें नवाचार के लिए प्रेरित करती है। शुरूआती शिक्षा हमारी मातृभाषा में होनी चाहिए। विविध भाषाओं का ज्ञान आपको बहुआयामी बनाती है। भारतीय ज्ञान परम्परा को आधार बनाने पर जोर देती है।
नई शिक्षा नीति छात्र-छात्राओं को समस्या का नहीं समाधान का देती है अवसर
नई शिक्षा नीति आपको मौका देती है कि साइंस के होकर आर्ट पढ़ सकते हैं। यह क्रेडिट आधारित है। इसमें बहुत कुछ खुलना बाकी है। एक साल आप पढ़ाई करेंगे तो प्रमाणपत्र, दो साल में डिप्लोमा, तीन साल में डिग्री और चार साल में ऑनर्स मिल जाएगा। नई शिक्षा नीति आपको अनंत अवसर देती है। देश आपको माहौल दे रहा है। नई शिक्षा नीति आपको मौका देती है। नई शिक्षा नीति आपको समस्या के समाधान का मौका देती है। निरंतर अध्ययन करने का अवसर देती है। प्रधानमंत्री ने 2022 में पंच प्रण का नारा दिया, यह बहुत बड़ा संदेश था। भारतीय ज्ञान परम्परा में अकूत भंडार है। नई शिक्षा नीति सिर्फ डिग्री दिलाने तक सीमित नहीं है यह कौशल विकास पर जोर देती है।

