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हास्य नाटक आज की जरूरत : डा.विद्याविंदु सिंह

  • आरके नाग के दो नाट्य संग्रहों का विमोचन

लखनऊ । बली हाल में आयोजित समारोह में आरके नाग से प्रसिद्ध रामकिशोर नाग के लिखे दो हास्य नाट्य संग्रहों ‘इटालियानो’ और ‘हम तो चले हरिद्वार’ का विमोचन पद्मश्री डा.विद्याविंदु सिंह, अभिनेता डा.अनिल रस्तोगी और एसबीआई के सहायक महाप्रबंधक दिवाकर मणि ने किया। 

इस अवसर पर अध्यक्षीय वक्तव्य में डा.विद्या विंदु ने नाटकों में साधारणीकरण की जरूरत बताते हुए कहा कि संत्रास भरे आज के समय में हास्य नाटकों की महत्ता बढ़ गयी है। मनोरंजन का साधन तो होते ही हैं, साथ ही समाज को स्वरूप और समस्याओं को इंगित करते हुए उनका समाधान भी सुझाते हैं।

बिम्ब सांस्कृतिक समिति रंगमण्डल के संयोजन और नवल शुक्ल के संचालन में चले कार्यक्रम में डा. अनिल रस्तोगी ने रमेश मेहता, सतीश डे आदि के हास्य नाटकों के दौर की चर्चा करते हुए कहा  कि नाग के लिखे हास्य नाटक मंचन के योग्य हैं। उन्हें मोहन राकेश के नाम का पुरस्कार मिल चुका है। हास्य नाटक लिखना और करना दोनों मुश्किल होता है। 

बैंक अधिकारी दिवाकर मणि ने काव्येषु नाटकं रम्यं उक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि नाट्य साहित्य समाज को शिक्षित करता है।रचनाकार गोपाल कृष्ण शर्मा मृदुल ने विचार रखते हुए बताया कि लेखक ने हास्य के संग व्यंग्य को भी बखूबी नाटकों में उभारा है। श्री नाग ने आभार व्यक्त करते हुए अपने रचनाकर्म के बारे में बताया। विमोचित संग्रहों में विशिष्ट हास्य के तीन-तीन प्रहसन हैं। नाटक वे अब तक विविध विषयों पर ममता, रांग नम्बर, बंगला नम्बर 302, द कान्ट्रैक्ट, बकरी की मौत, सत्यदेव, कैदी सूरज की वापसी, स्पीड ब्रेकर, रिसते रिश्ते, कबीर एक ध्रुव तारा, घौलू पंडित, मुझे मौत दे दो आदि 46 छोटे बड़े नाटक लिखे हैं। इनमें से अधिकांश मंचित हो चुके हैं। उनका नाट्य संग्रह ‘वन टू का फोर’ भी प्रकाशित हो चुका है।

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