दिल से निकले शब्द ही कविता
लखनऊ : काव्य का न तो कोई बना- बनाया खांका है न ही पैमाना है| मन के भाव जब शब्दों में आकार लेते हैं तो कविता का जन्म होता है| आम आदमी भी जो कहता सुनता है वो एक कविता हो सकती है| विद्योत्तमा फ़ाउंडेशन की लखनऊ इकाई की गोष्ठी में राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध मिश्रा…

