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देवानंद- सुरैया : प्रेम जो अधूरा होकर भी मुकम्मल हो गया

लेखक : दिलीप कुमार इस निरंकुश दुनिया में अगर रोमियो – जूलिएट, हीर – रांझा थे, तो हमारे प्रिय देव साहब एवं सुरैय्या जी भी थे. वैसे भी इस निरंकुश दुनिया में प्रेम करना सबसे ज्यादा ख़तरनाक रहा ख़ासकर भारतीय परिवेश में जहां इंसानो से ज्यादा ग़ुरूर को तरजीह दी जाती हो. देव साहब एवं…

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