खिलाड़ी और कोच को सुविधा देकर ही सच होगा खेलों इंडिया का सपना
प्रशांत कुमार राष्ट्रीय स्तर के गोताखोर तैराकी कोच व शारीरिक शिक्षक कॉमनवेल्थ गेम्स अभी चंद दिनों पूर्व ही सम्पन्न हुए हैं। इसमें भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है लेकिन अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से मिलों दूर है। अगर कुश्ती जैसे परंपरागत खेलों को छोड़ दें तो तैराकी जैसे खेल अभी भी सुविधाओं के अभाव में मैडल…

