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सिनेमा के गिरते हुए दौर में उम्मीद की किरण हैं नवाज

लेखक : दिलीप कुमार पाठक   कुछ ऐक्टर होते हैं, जिनको पर्दे पर देखना सिर्फ़ अच्छा लगता है, उनकी मौजूदगी फिल्म को खास बना देती है. कई फ़िल्मों में ख़ास स्टोरी नहीं होती, फिर भी कुछ अदाकार अपनी वर्सेटैलटी से फिल्म के कथानक को रोचक बना देते हैं.. ऐसे ही  नवाजुद्दीन सिद्दीकी (नवाज़) हैं, जो…

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हिन्दी सिनेमा के पुलिस कमिश्नर इफ्तिखार

लेखक : दिलीप कुमार किशोर कुमार का एक गीत है – ‘जाना था जापान पहुँच गए चीन समझ गए ना’ – इफ्तेखार पर यह गीत सटीक बैठता है. आज के दौर में हो सकता है सिनेप्रेमी इफ़्तेख़ार को न जानते हों  लेकिन पुरानी फ़िल्मों में पुलिस की वर्दी में एक रुआबदार आवाज़ लगभग हर फिल्म…

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