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फिल्म फेयर : मिल गया तो मिट्टी, न मिला तो सोना…

लेखक : दिलीप कुमार हिन्दी सिनेमा में दादा साहब फाल्के पुरूस्कार के बाद फिल्मफेयर पुरूस्कार सबसे बड़ा माना जाता है. हालाँकि दादा साहेब फाल्के पुरूस्कार की पात्रता बहुत कठिन है, हिंदी सिनेमा में सक्रिय 50 साल का सफ़ल कॅरियर होना सबसे बड़ी पात्रता है. वहीँ फिल्मफेयर हर साल आयोजित होता है. जिसे मिल गया तो…

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