फादर्स डे : आसान नहीं पिता बन जाना..
–आर्यावर्ती सरोज “आर्या” लखनऊ स्मरण हो उठती हैं पिता की वो त्याग भावना, मेरे लिए, वाहन प्रबंध और,स्वयं बस से जाना, स्कूटर, मोटरसाइकिल से विद्यालय छोड़ कर आना, मेरी सभी इच्छाएं पूर्ण करना माथे पर सिकन तक न लाना, संघर्षों को स्वयं ही साधा, मुख पर ले प्रभामंडल की आभा, सुख -सुविधाओं का प्रबंध करना…

