कहानी : “देहदान”
डॉ. रंजना जायसवाल बचपन में जब खुद को ढूंढना होता तो आस्था बारिश में भीग लेती। पानी की बूंदे सिर्फ तन को ही नहीं मन को भी अंदर तक धुल देती और वो अपने अंदर एक नई आस्था को पाती। आस्था…आस्था यही नाम तो रखा था बाबा ने उसका…क्योंकि उन्हें विश्वास था कि कुछ भी…
