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कविता : प्रेम…

डॉ जया आनंद प्रेम पाना आसान है इसके लिए अहं को कूटना पीसना है बस थोड़ा सा सरल होना है ….और सरल होना शायद! कितना कठिन !!! …पर मेरे लिए नहीं, कबीर को थोड़ा तो समझा ————————— 2. प्रेम आत्मा को उज्ज्वल करता हुआ विस्तार देता है संकुचन नहीं, विचारों को परिष्कृत करता हुआ उदार…

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