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21वीं सदी के 21वें साल में हिन्दी सिनेमा

कहानी और उसके पात्र ही फिल्म की आत्मा होती है। फिल्में समाज को चेहरा दिखाती है। साथ ही उस दौर को परिभाषित भी करती है। 21 सदी के पिछले दो दशकों में कहानी और पात्रों की सीमा का तेजी से विस्तार हुआ है। कथा, पटकथा, पात्र और संवाद लेखन सभी स्तर पर नए प्रयोग हुए।…

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