प्रा. संजय पवार को भारत श्रीलंका गौरव सम्मान, “गद्य क्षणिका रत्नाकर” और “त्रिवेणी संसार” किताबों का लोकार्पण
पुणे : दस जनवरी विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी शिलोंग (मेघालय), केलनीय विश्वविद्यालय कोलंबो (श्रीलंका), भारतीय उच्चायोग कोलंबो (श्रीलंका) के संयुक्त तत्वावधान में उच्चायोग के स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के सभागार में दो दिवसीय द्वितीय विश्व हिंदी सम्मेलन २०२६ का आयोजन किया गया था। भारत से अठारह राज्यों और श्रीलंका के विभिन्न संस्थानों के हिंदी सेवी तथा साहित्यकार प्रतिनिधि निमंत्रित किए गए थे। भारत श्रीलंका द्वितीय हिंदी सम्मेलन २०२६ में पैंतीस कवियों ने अपनी स्वरचित कविताऐं प्रस्तुत की तथा बत्तीस लेखकों ने अपने शोध आलेख प्रस्तुत किए। पिंपरी चिंचवड़ के हिंदी तथा मराठी के वरीय साहित्यकार निमंत्रित कवि प्रा. संजय पवार ने अपनी स्वरचित “अश्वत्थामा” कविता प्रस्तुत की। इसी विश्व हिंदी सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में में प्रा. संजय पवार की “गद्य क्षणिका रत्नाकर” और “त्रिवेणी संसार” इन दो किताबों का लोकार्पण किया गया। इस समय मंच पर भारत श्रीलंका के शीर्षस्थ अधिकारी तथा देश विदेश के साहित्यकार उपस्थित थे।

समारोह में प्रा. संजय पवार को उनके साहित्यिक प्रयासों तथा हिंदी भाषा के प्रसार-प्रचार और सांस्कृतिक संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान हेतु “भारत-श्रीलंका हिंदी गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के समय मंच पर स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक प्रोफेसर डॉ. अंकुरण दत्ता, छात्र सलाहगार तथा प्रोफेसर अतिला कोतलावल, प्रोफेसर सुभाषिनी रत्नायके, भारत श्रीलंका लेखक मिलन शिविर के संयोजक तथा पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी मेघालय के संचालक डॉ. अकेला भाई, उपस्थित थे।
दिनांक ९ जनवरी से १३ जनवरी २०२६ तक आयोजित इस समारोह में भारत के भिन्न भिन्न राज्यों तथा श्रीलंका के साहित्यकारों में साहित्यिक संवाद, कवि सम्मेलन, संगोष्ठी तथा बेंटोटा, नुवारा एलिया, कैंडी, कोलंबो पर्यटन का आयोजन किया गया था। श्रीलंका का लोकजीवन, प्राकृतिक सौंदर्य, साहित्य, कला, इतिहास, परंपरा आदि की सहभागी प्रतिनिधियों ने जानकारी प्राप्त की। लेखकीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण इस शिविर में साहित्यकारों को साहित्य लेखन के लिए विद्वानों द्वारा आवाहन किया गया।
उच्चायोग के दूसरे एक कार्यक्रम में हिंदी की सेवारत प्रोफेसर, शिक्षक, छात्रों को उनकी विशिष्ट सेवा के लिए स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र द्वारा सम्मानित किया गया। इस समारोह में श्रीलंका के शिक्षा एवम् उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मधुर सेनेविरत्न, उच्चायुक्त डॉ.संतोष झा, उप उच्चायुक्त संलाजल पांडे आदि मान्यवर उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारत की ओर से डॉ जसपाल सिंह, डॉ ज्ञानेश्वर सोनार, डॉ अशोक भाटिया, राम अवतार मेघवाल सागर, डॉ प्रताप मोहन भारतीय आदि और श्रीलंका के हिंदी सेवी, साहित्यकार, शिक्षक, छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

