स्वर्णिम दौर का नायाब सिनेकार… गुरुदत्त
लेखक : दिलीप कुमार गुरुदत्त साहब का नाम जेहन में आते ही आता है, एक अधूरापन, कुछ टूटा बिखरा हुआ… सिनेमा का वो स्वर्णिम दौर जिसमें गुरुदत्त साहब का अविस्मरणीय योगदान हमेशा याद रहेगा.. कहते हैं प्रतिभा उम्र की पाबंद नहीं होती…गुरुदत्त साहब के लिए यह बात उस दौर में सटीक बैठती थी. फिर चाहे…

