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स्वदेशी कवच करेगा ट्रेनों की सुरक्षा

  • दिल्ली-मुंबई रूट के मथुरा-कोटा सेक्शन पर कवच का संचालन
  • लोको पायलटों को कोहरे में भी कैब के अंदर सिग्नल की जानकारी मिलेगी

नई दिल्ली : ट्रेनों की अब हाइटेक सुरक्षा कर दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा| केंद्र सरकार की पहल अब रंग लाई है| रेलवे ने ट्रेनों की सुरक्षा के लिए देश में निर्मित कवच प्रणाली लागू की है| भारत के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस प्रणाली को दिल्ली-मुंबई रूट के मथुरा-कोटा सेक्शन के लिए शुरू किया|

इस मौके पर उन्होने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’  मंत्र के तहत रेलवे ने कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का निर्माण किया है| इस प्रणाली की डिज़ाइन, विकास और निर्माण देशी है। जिसको अनुसंधान डिज़ाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ने बनाया है|  

गौरतलब है कि आजादी के बाद पिछले 60 वर्षों में देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की उन्नत रेल सुरक्षा प्रणालियां स्थापित नहीं की गई थीं। रेल और यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में कवच प्रणाली को चालू किया गया है।

भारतीय रेलवे छह वर्षों की छोटी सी अवधि में देशभर के विभिन्न मार्गों पर कवच 4.0 को लागू करने की तैयारी कर रहा है। कवच प्रणालियों पर 30,000 से ज़्यादा लोगों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है। आईआरआईएसईटी (भारतीय रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग एवं दूरसंचार संस्थान) ने कवच को अपने बीटेक पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए 17 एआईसीटीई-अनुमोदित इंजीनियरिंग कॉलेजों, संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

कवच, प्रभावी ब्रेक लगाकर लोको पायलटों को ट्रेन की गति बनाए रखने में मदद करेगा। कोहरे जैसी कम दृश्यता की स्थिति में भी लोको पायलटों को सिग्नल के लिए केबिन से बाहर देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पायलट केबिन के अंदर लगे डैशबोर्ड पर जानकारी देख सकते हैं।

कवच !!

कवच एक स्वदेशी रूप से विकसित रेल सुरक्षा प्रणाली है। इसे रेलगाड़ियों की गति की निगरानी और नियंत्रण करके दुर्घटनाओं को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसे सुरक्षा अखंडता स्तर 4 (एसआईएल 4) पर डिज़ाइन किया गया है। यह सुरक्षा डिज़ाइन का उच्चतम स्तर है।

कवच का विकास 2015 में शुरू हुआ। इस प्रणाली का 3 वर्षों से अधिक समय तक बड़े स्तर पर इसका परीक्षण किया गया। तकनीकी सुधारों के बाद इस प्रणाली को दक्षिण मध्य रेलवे (एसीआर) में स्थापित किया गया। पहला परिचालन प्रमाणपत्र 2018 में प्रदान किया गया। दक्षिण-मध्य रेलवे में प्राप्त अनुभवों के आधार पर एक उन्नत प्रारूप ‘कवच 4.0’ विकसित किया गया। इसे मई 2025 में 160 किमी प्रति घंटे तक की गति के लिए अनुमोदित किया गया। कवच के घटकों का निर्माण स्वदेशी रूप से किया जा रहा है।

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