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फादर्स डे : आसान नहीं पिता बन जाना..

–आर्यावर्ती सरोज “आर्या” लखनऊ स्मरण हो उठती हैं पिता की वो त्याग भावना, मेरे लिए, वाहन प्रबंध और,स्वयं बस से जाना, स्कूटर, मोटरसाइकिल से विद्यालय छोड़ कर आना, मेरी सभी इच्छाएं पूर्ण करना  माथे पर सिकन तक न लाना, संघर्षों को स्वयं ही साधा, मुख पर ले प्रभामंडल की आभा, सुख -सुविधाओं का प्रबंध करना…

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नागरी प्रचारिणी सभा काव्य गोष्ठी में कवियों ने बांधा समां

देवरिया जिले के  नागरी प्रचारिणी सभा में ,कल मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें अध्यक्ष आचार्य परमेश्वर जोशी जी, उपाध्यक्ष -सरोज पाण्डेय जी, और निर्भीक चन्द्र विश्वकर्मा जी, महामंत्री- अनिल कुमार त्रिपाठी जी, पूर्व मंत्री- इन्द्र कुमार दीक्षित जी, संयुक्त मंत्री -सौरभ श्रीवास्तव, आय -व्यय निरीक्षक रमेश चन्द्र तिवारी , विज्ञान संचारक – अनिल…

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वरिष्ठ साहित्यकार आर्यावर्ती सरोज को काव्य चंद्रिका सम्मान

लखनऊ | त्रिवेणी नगर में अखिल भारतीय अनागत साहित्य संस्थान की गोष्ठी एवं सम्मान समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार आर्यावर्ती सरोज “आर्या” को “काव्य चंद्रिका, सारस्वत सम्मान” से सम्मानित किया गया। इस काव्य गोष्ठी के अध्यक्ष -आदरणीय सत्येन्द्र तिवारी, मुख्य अतिथि -आदरणीय रमाशंकर सिंह, विशिष्ट अतिथि – प्रवीण पाण्डेय जी रहे, एवं संचालन – विशिष्ट ग़ज़लकार…

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एक मुस्कराहट कर देती है मौन को निलंबित : डॉ सिधांशु

साहित्यकार मनीष शुक्ल के कविता संग्रह निलंबित मौन के स्वर के स्वर का लोकार्पण और संवाद   मौन को आपकी एक मुस्कराहट निलंबित कर देती है| फिर जो स्वर निकलते हैं| वो दिल की आवाज होती है| कानपुर मेट्रो और बुक लैंड बुक फेयर की ओर आयोजित साहित्यकार मनीष शुक्ल के कविता संग्रह निलंबित मौन…

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निलंबित मौन का स्वर ही मुखर आवाज

विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मनीष शुक्ल के  कविता संग्रह निलंबित मौन के स्वर का विमोचन किया लखनऊ पुस्तक मेले में कलमकारों ने संवाद व् परिचर्चा की विश्व कविता दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश के विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने साहित्यकार- पत्रकार मनीष शुक्ल के पहले कविता संग्रह निलंबित मौन के स्वर…

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विश्व पुस्तक मेले में मनीष शुक्ल के  कविता संग्रह निलंबित मौन के स्वर पर चर्चा

साहित्य के महाकुम्भ विश्व पुस्तक मेला में आयोजित ‘संवाद’ कार्यक्रम में चर्चित कथाकार, पत्रकार व व्यंग्यकार मनीष शुक्ल के पहले कविता संग्रह ‘निलंबित मौन के स्वर’ के विमोचन समारोह में आयोजित लेखक से संवाद कार्यक्रम में पुस्तक पर चर्चा हुई| वरिष्ठ साहित्यकारों एवं राजनेताओं ने कविता को लेकर अपने संस्मरण और अनुभव साझा किये| मुख्य…

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दिल से निकले शब्द ही कविता

लखनऊ : काव्य का न तो कोई बना- बनाया खांका है न ही पैमाना है| मन के भाव जब शब्दों में आकार लेते हैं तो कविता का जन्म होता है| आम आदमी भी जो कहता सुनता है वो एक कविता हो सकती है| विद्योत्तमा फ़ाउंडेशन की लखनऊ इकाई की गोष्ठी में राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध मिश्रा…

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कविता : मां मेरी यह कहती है….

डॉ शिल्पी बक्शी शुक्ला मां मेरी यह कहती है, जिन पेड़ों पर फल लगता है, उनकी शाखें झुक जातीं हैं, करने प्रणाम अस्‍ताचल सूर्य को, बहती नदियां रूक जातीं हैं, गिरती हैं लहू की बूंदे तो, बंजर धरती भी सोना हो जाती है, सहती है बोझ ये धरती, तभी ये सृष्टि चल पाती है, मिलते…

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व्यंग्य यात्री 2022 व कविता संग्रह ‘जि़ंदगी इतनी आसान नहीं का लोकार्पण

लखनऊ पुस्तक मेले में लोकार्पण समारोह लखनऊ पुस्‍तक मेले में सोमवार को वरिष्‍ठ पत्रकार एवं कथाकार मनीष शुक्‍ल के संपादन में प्रकाशित व्‍यंग्‍य संग्रह ‘व्‍यंग्‍य यात्री 2022’ एवं डॉ.शिल्‍पी बख्‍शी शुक्‍ला के काव्‍य संग्रह ‘जि़ंदगी इतनी  आसान नहीं’ का लोकार्पण किया गया। लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि डॉ. सूर्य कुमार पाण्‍डेय, अति विशिष्‍ट अतिथि महेन्‍द्र…

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मां मेरी यह कहती है…

— डॉ शिल्पी बक्शी शुक्ला मां मेरी यह कहती है, जिन पेड़ों पर फल लगता है, उनकी शाखें झुक जातीं हैं, करने प्रणाम अस्‍ताचल सूर्य को, बहती नदियां रूक जातीं हैं, गिरती हैं लहू की बूंदे तो, बंजर धरती भी सोना हो जाती है, सहती है बोझ ये धरती, तभी ये सृष्टि चल पाती है,…

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