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जिंदगी इतनी आसान नहीं…

डॉ शिल्पी शुक्ला बक्शी जि़दगी इतनी आसन नहीं, जितनी नज़र आती है, घना कोहरा हो, या आँधी, रोज़ी-रोटी की तलाश, घर से बाहर ले आती है, तपती है, गलती है देह, सभी मौसमों में, तभी गरीब के पेट की, आग बुझ पाती है, बेबस चेहरों पर फिर भी , सुंदर मुस्‍कान नज़र आती है, मिट्टी…

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इक प्रेम कहानी

डॉ. शिल्पी बक्शी शुक्ला अंबर से बरसता ये पानी, कहता है, अजब कहानी । हमने न सुनी थी, पर अंबर ने अपने आंसुओं से बुनी थी । तुमने न कही थी, पर इसकी पीड़ा हर पल धरा ने सही थी । सदियों से चलती, इक प्रेम कहानी, किसी फकीर की ज़बानी ।  कुछ जानी-कुछ अनजानी,…

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व्यंग्य : भैंसे की व्यथा कथा

संजीव जायसवाल ‘संजीव’ आ. सम्पादक जी, सादर प्रणाम, मैं कालू राम अध्यक्ष, अखिल भारतीय भैंसा संघ इस पत्र के माध्यम से अपने भैंसा समुदाय की व्यथा कथा सुनाना चाहता हूँ. इस देश में रंगभेद की कुरीति का सबसे बड़ा शिकार हम लोग ही हुए है लेकिन किसी ने भी कभी हमारी कोई सुध नहीं ली….

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लघु कथा : मेरे साहिर…

पवन जैन सडक की तरफ खुलती बालकनी , डूबता सूरज , अदरक की चाय और कारवां पे चलते मेरे पसंदीदा गीत ..कहने को ये मेरे बेहद सुकून के पल होते हैं ..ऑफिस से घर लौटते लोग ,सभी को जल्द से जल्द घर पहुँचने की जल्दी ..जहाँ उनका कोई इन्तिज़ार कर रहा होता है . अक्सर…

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निरंकार देव सेवक और बालगीत साहित्य

डॉ. नितिन सेठी           समय अपने गर्भ में अनगिनत रहस्यों-तथ्यों को समेटे रहता है। अपने प्रवाह के साथ समयचक्र इन्हें अपने अस्तित्व में अतीत का चोला पहना देता है। अतीत के रूप में ये रहस्य और तथ्य इतिहास की संज्ञा से विभूषित होते हैं। इतिहास में मात्र अतीत या प्राचीनकाल की घटनाओं का संकलन ही…

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कहानी : मंदी से तरक्की की राह

लेखक : मनीष शुक्ल मंदी की तलवार अचानक ऐसे चल जाएगी ये तो कभी सोचा भी नहीं था… रौनिक उपाध्याय सुबह तैयार होकर ऑफिस गया और शाम को टर्मिनेशन लेटर लेकर घर लौट आया। रौनिक घर आकर सीधे बेड रूम में जाकर पसर गया। न सुनिधि से कुछ बोला, न ही यशी को गोद में…

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जन्मदिन : साहित्य में सूर्य बनकर चमके राष्ट्रकवि दिनकर

छायावाद की छाया से निकलकर राष्ट्रवाद की अलख जगाने वाले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का जन्म आज के दिन यानि 23 सितंबर 1908 को हुआ था। मूलरूप से छायावादी कवि ने राष्ट्रवाद की एक से बढ़कर एक कविताएं लिखी। जब आजादी का संघर्ष चरम पर था उसी समय दिनकर की कविताएं देश में जोश भर…

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व्यंग्य : करोना और भूकंप, मच गया हड़कंप

लेखक : मनीष शुक्ल अरे यार! खाली ही चाय ले आई हो… चिप्स या पापड़ ही भून लेती तो कसम से मजा आ जाता… जैसे ही अभिषेक ने अपनी फरमाइश ‘इन्दु’ को सुनाई तो तुरंत झल्लाकर बोली- बारात में नहीं आए हो तुम लोग, जो दिनभर ऑर्डर मारा करते हो। कभी पानी ले आओ, कभी…

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व्यंग्य : इल्जाम क्रिकेट पर

लव कुमार सिंह देवियों और सज्जनों! हमारे 50 साला पड़ोसी के घुटने बोल गए हैं। वे अपने दिल से भी लाचार हो गए हैं। पता है इल्जाम किस पर आया है? पहले महेंद्रि सिंह धोनी, अब विराट एंड कंपनी का नाम आया है। आपको भले ही इस पर हंसी आए, पर पड़ोसी इस इल्जाम पर…

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व्यंग्य : डोन्ट बरी ! फूड और प्वाइजन दोनों हो जायेंगे सस्ते ….!

डोन्ट बरी ! फूड और पोआईजन दोनों हो जायेंगे सस्ते ….! रवीन्द्र प्रभात कल दफ्तर से लौटा, निगाहें दौड़ाई, हमारा तोताराम केवल एक ही रट लगा रहा था- “राम-नाम की लूट है लूट सकै सो लूट………!” कुछ भी समझ में न आया तो मैंने तोते को अपने पास बुलाया और फरमाया- मुंह लटकाता है, पंख…

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