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हिन्दी सिनेमा के पुलिस कमिश्नर इफ्तिखार

लेखक : दिलीप कुमार किशोर कुमार का एक गीत है – ‘जाना था जापान पहुँच गए चीन समझ गए ना’ – इफ्तेखार पर यह गीत सटीक बैठता है. आज के दौर में हो सकता है सिनेप्रेमी इफ़्तेख़ार को न जानते हों  लेकिन पुरानी फ़िल्मों में पुलिस की वर्दी में एक रुआबदार आवाज़ लगभग हर फिल्म…

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लखनऊ से निकली थी मौसीक़ी सम्राट तलत महमूद की गायिकी

लेखक दिलीप कुमार तलत महमूद’ एक ऐसा नाम, जो ग़ज़ल, मौसीक़ी, संगीत की दुनिया का सबसे बड़ा नाम है, जिनकी शख्सियत का तिलिस्म आज भी कायम है. तलत महमूद साहब ग़ज़ल की दुनिया के तानसेन कहे जाते हैं, जिनकी आवाज़ में एक सौम्य लहजा, उनकी जुबां से लखनवी नफासत टपकती थी. बेहद मजाकिया, जिनका मन…

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देवानंद- सुरैया : प्रेम जो अधूरा होकर भी मुकम्मल हो गया

लेखक : दिलीप कुमार इस निरंकुश दुनिया में अगर रोमियो – जूलिएट, हीर – रांझा थे, तो हमारे प्रिय देव साहब एवं सुरैय्या जी भी थे. वैसे भी इस निरंकुश दुनिया में प्रेम करना सबसे ज्यादा ख़तरनाक रहा ख़ासकर भारतीय परिवेश में जहां इंसानो से ज्यादा ग़ुरूर को तरजीह दी जाती हो. देव साहब एवं…

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कहानी गीत की : खोया खोया चाँद…

खोया हुआ चाँद, कविराज शैलेन्द्र ढूंढकर लाए थे, जिसको मशहूर संगीतकार बर्मन दादा ढूढ़ रहे थे. फिल्म काला बाजार के लिए विजय आनन्द ने एस डी बर्मन और शैलेंद्र की जोड़ी को मौका दिया गया था. साहिर लुधियानवी से अलग होने के बाद मजरुह सुल्तानपुरी के साथ बर्मन दादा की जोड़ी जमती थी, लेकिन मजरुह…

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यादें : निर्देशकों के लिए सिलेबस हैं ऋषिकेश दा…

दिलीप कुमार स्तंभकार सत्यजीत रे को सिनेमा का पूरा संस्थान कहते हैं, तो विमल रॉय को सिनेमा का अध्यापक कहते हैं. वही ऋषिकेश दा को उस विद्यालय का स्टूडेंट कह सकते हैं. सत्यजीत, विमल रॉय, ऋषिकेश दा आदि का सिनेमा की यात्रा अपने आप में मुक्कमल सिलेबस है. फिल्म निर्देशन की दुनिया में गहराई, अध्यापन,…

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प्रेम त्रिकोण का नया ‘अंदाज” नर्गिस, दिलीप और राज…

दिलीप कुमार स्तंभकार महबूब खान निर्देशित फिल्म “अंदाज़” 1949 में आई उस दौर की सबसे बड़ी फ़िल्मों में से एक  इसमें प्रेम त्रिकोण में दिलीप कुमार, नर्गिस और राज कपूर हैं. दूरदर्शी संगीतकार नौशाद का संगीत है. गीत मजरुह सुल्तानपुरी द्वारा लिखें गए. अपने जारी होने के समय, अंदाज़ सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय…

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ब्लॉकबस्टर “आराधना” फिल्म शक्ति सामंत  बनाना ही नहीं चाहते थे…

दिलीप कुमार स्तंभकार आराधना एक ऐसी फिल्म थी, जिसमें राजेश खन्ना को सुपरस्टार बनाया, यह एक ऐसी फिल्म थी, जिसने शर्मिला टैगोर को एकलौता फिल्म फेयर पुरूस्कार दिलाया, आराधना एक ऐसी फिल्म थी, जिसने किशोर दा को बॉलीवुड में फिर से स्थापित कर दिया. जिसने शक्ति सामंत को उबारा ही नहीं बेस्ट फीचर फिल्म का…

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सिने आकाश से विलुप्त हो रहे सितारे, केके भी छोड़ गए

हाल के दिनों में जिस तरह से एक के बाद एक दिग्गज कलाकारों और फनकारों की मौत हो रही है। उससे कला जगत हिल गया है। अभी दो दिन बीते नहीं जब पंजाब के गायक सिद्धू मूसेवाले की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अब बॉलीवुड के मशहूर सिंगर केके की अचानक मौत ने…

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सत्य’ को ‘तथ्य’ के साथ कहने से बनी ‘द कश्मीर फाइल्स’: विवेक अग्निहोत्री

खुद पर यकीन करो और दिल की आवाज सुनो: विवेक अग्निहोत्री ‘आईआईएमसी फिल्म फेस्टिवल 2022’ का समापन नई दिल्ली। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर भारतीय जन संचार संस्थान एवं फिल्म समारोह निदेशालय, भारत सरकार* के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय ‘आईआईएमसी फिल्म फेस्टिवल 2022’ एवं ‘राष्ट्रीय लघु फिल्म निर्माण प्रतियोगिता’ के अंतिम…

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नेपाल-भारत साहित्य महोत्सव में पर्यटन गुरु धूम

काठमांडु- नेपाल में चल रहे अंतरराष्ट्रीय नेपाल-भारत साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन पर्यटन गुरु की धूम रही। साहित्यिक भ्रमण के दौरान सभी भारतीय प्रतिभागियों को ललितपुर,नेपाल महानगर पालिका मेयर के प्रतिनिधि द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया गया तथा “पर्यटन गुरु हॉलीडेज प्राइवेट लिमिटेड” के सौजन्य से पाटन और ललितपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का…

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